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Manisha Bhanwala Gold Medal: हरियाणा की बेटी मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रचा इतिहास, स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं

जींद: हरियाणा के माटी से ताल्लुक रखने वाली और जींद जिले के सिवाहा गांव की होनहार बेटी तथा स्टार पहलवान मनीषा भनवाला ने वैश्विक पटल पर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित की जा रही प्रतिष्ठित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान मनीषा ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) पर अपना कब्जा जमा लिया है। इस बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि के साथ ही वह इस विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला पहलवान बनने का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं।

59 किलोग्राम भारवर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अमेरिकी पहलवान एबिगेल नेट को 8-6 से दी मात, दिखाया गजब का कौशल

प्रतियोगिता के 59 किलोग्राम भारवर्ग के अंतर्गत खेले गए खिताबी और अत्यंत रोमांचक मुकाबले में मनीषा का मुकाबला अमेरिका की मजबूत पहलवान एबिगेल नेट के साथ हुआ। इस कड़े मुकाबले के दौरान मनीषा ने अपनी बेहतरीन दांव-पेच, उत्कृष्ट तकनीक, सूझबूझ और अटूट आत्मविश्वास का परिचय देते हुए अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी को 8-6 के कड़े अंतर से शिकस्त दी और देश की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया। मुकाबले की हर एक पल पर दर्शकों की निगाहें टिकी थीं, और मनीषा ने अंततः अपने शानदार खेल से बाजी अपने नाम कर ली।

भाई रिंकू ने बेटी की इस सफलता को बताया भारतीय महिला कुश्ती के लिए मील का पत्थर, परिवार और गांव में जश्न का माहौल

पहलवान मनीषा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद उनके परिवार और पैतृक गांव सिवाहा में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है और उत्सव जैसा माहौल है। मनीषा के भाई रिंकू ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस जीत को भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में एक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने कहा कि मनीषा की यह कड़ी मेहनत और लगन पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

रोहतक में जूनियर कोच के रूप में दे रही हैं सेवाएं, वर्ष 2015 से शुरू हुआ था कुश्ती का सफर

वर्तमान में मनीषा रोहतक में जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं और खेल के साथ-साथ युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित भी कर रही हैं। उनके कुश्ती के सफर की शुरुआत वर्ष 2015 में प्रसिद्ध खेल स्कूल निडानी से हुई थी। अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, कड़े संघर्ष और दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक लगातार चार वर्षों तक सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भी भारत के लिए पदक जीतकर वह अपनी असाधारण खेल प्रतिभा का लोहा पहले ही मनवा चुकी हैं।