Jalaun Lawyer Murder Case Jalaun: उत्तर प्रदेश के जालौन में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार हत्याकांड का खुलासा, 34 साल पुराने जमीन विवाद में दी गई थी 10 लाख की सुपारी
उरई: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गयादीन अहिरवार (67) की हत्या के मामले में पुलिस ने कई सनसनीखेज और चौंकाنے वाले खुलासे किए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ के मुताबिक, इस दुस्साहसिक हत्याकांड के पीछे करीब 34 साल पुराना 32 बीघा जमीन का एक बड़ा विवाद मुख्य वजह रहा है। आरोप है कि वरिष्ठ वकील की हत्या को अंजाम देने के लिए पूरे 10 लाख रुपये की भारी-भरकम सुपारी दी गई थी, जिसके साजिश के तार कानपुर तक जुड़े हुए पाए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने जमीन विवाद से जुड़े मुख्य आरोपी इंद्रजीत सिंह यादव और वारदात को अंजाम देने वाले तीन शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सुपारी लेने का मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा है।
कदौरा के माधव सिंह की संपत्ति से जुड़ा है 34 साल पुराना जमीनी विवाद, वसीयत और अदालती मुकदमों के बीच गहराती गई रंजिश
इस बहुचर्चित हत्याकांड की जड़ें कदौरा क्षेत्र के चतेला गांव के निवासी माधव सिंह की विशाल संपत्ति से जुड़ी हुई हैं। माधव सिंह के पास कुल मिलाकर लगभग एक हजार बीघा जमीन थी, जिसमें से उन्होंने हांसा गांव की 32 बीघा जमीन अपनी नातिन अपर्णा सिंह के नाम कर दी थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, माधव सिंह और उनके पुत्र रामगोपाल के निधन के बाद वर्ष 1990 में वकील गयादीन अहिरवार ने एक वसीयत का हवाला देते हुए इस पूरी जमीन पर अपना कानूनी दावा ठोक दिया था। इसके बाद अपर्णा सिंह और वकील गयादीन अहिरवार के बीच लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई का दौर शुरू हो गया। दोनों पक्ष वर्षों तक अदालतों में मुकदमेबाजी करते रहे, जिसके बाद अंततः अदालत से अपर्णा सिंह के पक्ष में राहत मिली। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 में इस विवादित जमीन को मैनपुरी जिले के करहल क्षेत्र के कठौली गांव निवासी इंद्रपाल सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह यादव को बेच दिया, जो कि लंबे समय से कानपुर में रह रहा था। हालांकि, जमीन का यह विवाद थमा नहीं और इसी वर्ष जून माह में गयादीन ने इंद्रजीत, उसकी पत्नी सविता समेत कुल सात लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया, जिससे रंजिश और अधिक गहरी हो गई।
दस्तावेज देने के बहाने कार में बैठाकर किया गया था अपहरण, कानपुर लाकर नहर किनारे की गई थी नृशंस हत्या
घटना के दिन यानी शनिवार को मृत वकील गयादीन अहिरवार एक मुकदमे की सुनवाई के सिलसिले में उरई आए हुए थे और दोपहर के वक्त बस के जरिए वापस कालपी पहुंचे। उनका बेटा हर्षनाथ अपने स्कूटर से उन्हें रिसीव कर घर ले जा रहा था, तभी रास्ते में मोनू यादव मिल गया। उसने कुछ बेहद जरूरी दस्तावेज देने और साथ में नाश्ता करने के बहाने गयादीन को अपनी कार में बैठने के लिए राजी कर लिया। आरोप है कि उस कार के भीतर पहले से ही तीन अन्य लोग मौजूद थे। इसके बाद सुनियोजित तरीके से वकील साहब को उनके बेटे से अलग कर अगवा कर लिया गया और उन्हें सीधे कानपुर ले जाया गया। वहां गुजैनी क्षेत्र के गंभीरपुर इलाके में नहर के किनारे बीते शनिवार (31 अक्टूबर) को उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई और वारदात को अंजाम देने के बाद शव को पास की नहर में फेंक दिया गया।
तीन शूटर पुलिस गिरफ्त में, मुख्य साजिशकर्ता मोनू यादव की तलाश जारी; कानपुर के वकीलों ने बुलाई दो दिन की हड़ताल
इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इंद्रजीत सिंह यादव को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान उसने इस बात का खुलासा किया कि वकील की हत्या की पूरी सुपारी मोनू यादव और उसके पिता अजय यादव को दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने हत्या की वारदात में शामिल बताए जा रहे सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मुठभेड़ के दौरान दो शूटरों के पैरों में गोली लगने की भी जानकारी सामने आई है, जबकि मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी भी फरार है जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। दूसरी ओर, वरिष्ठ वकील गयादीन अहिरवार की इस निर्मम हत्या से आक्रोशित होकर कानपुर के वकीलों ने मंगलवार और बुधवार को दो दिनों की पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। वकीलों ने पीड़ित शोकाकुल परिवार के लिए पांच करोड़ रुपये का मुआवजा देने, परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी प्रदान करने तथा इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। पुलिस अब फरार चल रहे मोनू यादव की तलाश के साथ-साथ इस हत्याकांड की पूरी साजिश और सुपारी के पैसों के लेनदेन के हर एक पहलू की गहराई से जांच कर रही है।