Delhi High Court on BS4 Vehicle Ban: दिल्ली में बाहरी राज्यों की BS-4 गाड़ियों के प्रवेश पर रोक बरकरार, हाईकोर्ट ने तुरंत राहत देने से किया इनकार
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बनाए गए नियमों के बीच हाईकोर्ट से एक अहम अपडेट सामने आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार की उस विवादास्पद अधिसूचना पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों के सर्दियों के महीनों के दौरान शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस रोक के खिलाफ फरीदाबाद के एक अधिवक्ता द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था, जिस पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब इस याचिका पर आगामी 27 नवंबर को विस्तार से सुनवाई की जाएगी, क्योंकि उसी दिन इसी से मिलता-जुलता एक अन्य मामला भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
फरीदाबाद के वकील ने पर्यावरण विभाग के 23 जून के नोटिफिकेशन को दी है चुनौती, हर साल 1 नवंबर से 31 जनवरी तक लागू है प्रतिबंध
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरमुख दास कोहली नामक वकील ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर दिल्ली सरकार के पर्यावरण और वन विभाग द्वारा जारी 23 जून 2026 के नोटिफिकेशन के पैराग्राफ 4 को चुनौती दी है। यह अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी की गई थी। इस नियम के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर पंजीकृत और बीएस-6 मानक से नीचे के डीजल-पेट्रोल वाहनों को हर साल 1 नवंबर से लेकर 31 जनवरी तक दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाती है।
रजिस्ट्रेशन के आधार पर भेदभाव का लगाया गया आरोप, याचिकाकर्ता बोले— दिल्ली में पंजीकृत BS-4 गाड़ियों पर नहीं है ऐसी कोई रोक
याचिकाकर्ता वकील का तर्क है कि उनके पास हरियाणा में पंजीकृत एक बीएस-4 (BS-IV) पेट्रोल फॉक्सवैगन पोलो कार है। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह प्रतिबंध गाड़ियों के बीच केवल उनके रजिस्ट्रेशन के राज्य या स्थान के आधार पर भेदभाव पैदा करता है, जबकि इसका उनके वास्तविक प्रदूषण स्तर (एमिशन) से कोई लेना-देना नहीं है। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि कोई समान मॉडल की बीएस-4 गाड़ी दिल्ली के भीतर ही पंजीकृत है, तो उस पर इस प्रकार का कोई प्रतिबंध लागू नहीं होता है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का दावा, 27 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
याचिका में यह भी उठाया गया है कि यह तीन महीने की पूर्ण पाबंदी दैनिक वायु गुणवत्ता (AQI) के स्तर पर विचार किए बिना एकतरफा तरीके से लागू की जाती है, जो कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के प्रावधानों के विपरीत है। जीआरएपी में प्रदूषण के वास्तविक स्तर के आधार पर क्रमिक और अलग-अलग पाबंदियां लगाने का नियम है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दिल्ली सरकार का यह निर्देश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(d) और 19(1)(g) के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करता है। बहरहाल, अदालत इस मामले पर अब 27 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी।