Tula Sankranti Significance: तुला संक्रांति 2026 कब है? जानिए इस दिन गंगा स्नान और सूर्य देव की पूजा का महत्व
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में तुला संक्रांति का पावन पर्व शनिवार, 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में संक्रांति के दिन स्नान, दान और सूर्य देव की पूजा-अर्चना को बेहद खास महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों की मदद करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष भर में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं, जिनमें तुला संक्रांति उस खास समय पर मनाई जाती है जब सूर्य देव का प्रवेश तुला राशि में होता है। इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और दान-पुण्य करते हैं। आइए जानते हैं कि तुला संक्रांति पर गंगा स्नान का क्या विशेष महत्व है।
🌊 तुला संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व और धार्मिक मान्यताएं
सनातन धर्म में मां गंगा को अत्यंत पवित्र नदी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति के सभी पाप व कष्ट दूर होते हैं। यही कारण है कि देश में हर पर्व और विशेष तिथि पर गंगा स्नान करने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। तुला संक्रांति के दिन भी पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन का संबंध सूर्य देव के राशि परिवर्तन से भी जुड़ा होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
🏠 गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ऐसे करें पूजन
कई बार दूरी, समय के अभाव या अन्य व्यस्तताओं के कारण हर व्यक्ति के लिए गंगा नदी या किसी तीर्थ स्थल तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में शास्त्रों में यह नियम बताया गया है कि आप घर पर ही स्नान करते समय पवित्र नदियों का स्मरण कर सकते हैं।
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सरल उपाय: तुला संक्रांति के दिन सुबह स्नान के समय अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा पवित्र गंगाजल मिला लें।
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पूजा और दान: स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें और मन में मां गंगा सहित सभी पवित्र नदियों का ध्यान करें। इसके साथ ही अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अनाज, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान अवश्य करें।