आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग शक्ति रूपों की विधि-विधान से आराधना की जाती है। इस संपूर्ण पूजन में कलश स्थापना के बिना माता रानी की पूजा अधूरी मानी जाती है। घटस्थापना करते समय मिट्टी की वेदी तैयार करके उसमें जौ बोए जाते हैं और फिर उसके ऊपर पवित्र कलश स्थापित किया जाता है। जौ को ‘ज्वारे’ या ‘खेतड़ी’ भी कहा जाता है। इसे बोने के पीछे एक गहरा धार्मिक और पौराणिक महत्व छिपा हुआ है। भक्तजन पूरे नौ दिनों तक बहुत भक्ति-भाव से इनकी देखभाल करते हैं, ताकि घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का वास हो सके।
🌱 सृष्टि का प्रथम अन्न और माता अन्नपूर्णा का पावन स्वरूप
हिंदू धर्म और शास्त्रों में जौ को बेहद पवित्र माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जौ को माता अन्नपूर्णा का ही एक स्वरूप माना जाता है और इसे इस सृष्टि की सबसे पहली फसल यानी ‘प्रथम अन्न’ कहा गया है। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य या नवरात्रि के विशेष पूजन में इसे सबसे पहले शामिल किया जाता है। जब नवरात्रि की घटस्थापना होती है, तो मिट्टी में जौ बोकर देवी मां का ध्यान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि देवी को यह प्रथम अन्न अर्पित करने से घर में कभी भी अन्न और धन की कोई कमी नहीं होती है और घर में हमेशा सकारात्मकता बनी रहती है।
👀 जौ के उगने के तरीके से मिलते हैं भविष्य के खास संकेत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में बोए गए जौ के उगने के तरीके और उनके रंगों से भविष्य के कई शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं:
-
हरा-भरा उगना (शुभ संकेत): यदि नौ दिनों के दौरान ज्वारे बहुत तेजी से उगते हैं और उनका रंग पूरी तरह हरा-भरा रहता है, तो इसे जीवन में आने वाली सुख-समृद्धि, खुशहाली और धन-धान्य में वृद्धि का बहुत बड़ा शुभ संकेत माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि माता रानी की कृपा परिवार पर पूरी तरह बनी हुई है।
-
पीला पड़ना या न उगना: इसके विपरीत, यदि जौ ठीक से न उगे या उनका रंग पीला पड़ जाए, तो इसे भविष्य में आने वाली कुछ परेशानियों या बाधाओं का संकेत समझा जाता है।
यही वजह है कि पूरे नौ दिनों तक इन ज्वारों की बहुत सावधानी और पवित्रता के साथ देखभाल की जाती है। इन्हें कभी भी अशुद्ध हाथों से नहीं छुआ जाता और नियमित रूप से स्वच्छ जल देकर सींचा जाता है, ताकि ये खूब घने और हरे-भरे उगे।