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Thyroid Hormone Imbalance: थायराइड असंतुलन से शरीर में होते हैं कई बदलाव, जानिए इसके प्रमुख लक्षण और बचाव के उपाय

थायराइड हार्मोन के इंबैलेंस की समस्या किसी भी उम्र के इंसान को अपनी चपेट में ले सकती है। तितली जैसे आकार की थायराइड ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को एनर्जी में बदलने से लेकर हार्टबीट और शरीर के तापमान तक को नियंत्रित करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है। थायराइड हार्मोन का सामान्य स्तर से बढ़ना और घटना—दोनों ही स्थितियां सेहत के लिए नुकसानदायक साबित होती हैं। जब भी शरीर में इस तरह का असंतुलन होता है, तो हमारा शरीर कुछ खास संकेत देता है, जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

🧠 थायराइड असंतुलन के न्यूरोलॉजिकल और मानसिक लक्षण

मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज की इंटरनल मेडिसिन डायरेक्टर डॉक्टर मीनाक्षी जैन के अनुसार, थायराइड डिसऑर्डर होने पर कई बार न्यूरोलॉजिकल (Neurological) समस्याएं भी सामने आती हैं:

  • चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन: मरीज में ‘हाइपो इरिटेबिलिटी’ यानी बहुत ज्यादा गुस्सा आना, बिना बात के चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी स्थिति बन सकती है।

  • नींद और एंग्जायटी: रात में ठीक से नींद न आना या फिर दिनभर बहुत ज्यादा नींद और सुस्ती महसूस होना, साथ ही घबराहट व एंग्जायटी बने रहना।

  • याददाश्त और संतुलन: याददाश्त कमजोर होना या बातें भूलने लगना और चलते-चलते पैर लड़खड़ा जाना या शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हार्मोन की बहुत ज्यादा कमी होने से कई बार मरीज को कोमा या बेहोशी जैसी स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। वहीं, हार्मोन के बढ़ने पर अत्यधिक पसीना आना, नसों में कमजोरी और दिल की धड़कन तेज होना आम लक्षण हैं।

👩‍⚕️ महिलाओं को क्यों रखना चाहिए अधिक ध्यान?

थायराइड की समस्या मुख्य रूप से हमारी लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है और यह खासकर महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है। महिलाओं के शरीर में प्यूबर्टी (Puberty), प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज (Menopause) के दौरान कई बड़े हार्मोनल बदलाव आते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक मानसिक तनाव लेना भी इसका एक बहुत बड़ा कारण बन सकता है। यदि ऐसे कोई भी लक्षण महसूस हों, तो समय रहते डॉक्टर से परामर्श कर अपना चेकअप जरूर करवाएं।

🛡️ थायराइड को नियंत्रित रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

  • डॉक्टर की सलाह: थायराइड हार्मोन इंबैलेंस होने पर बिना देरी किए डॉक्टर की सलाह से नियमित रूप से दवाएं लें।

  • समय पर जांच: दवा शुरू करने के बाद हर 6 से 8 हफ्ते में अपने थायराइड हार्मोन की जांच (Thyroid Test) जरूर कराएं।

  • संतुलित आहार: अपनी डाइट को हेल्दी रखें और थाली में सेलेनियम, जिंक और आयरन से भरपूर फूड्स को शामिल करें।

  • पूरी नींद लें: रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें और समय पर सोने-जागने की आदत डालें।

  • एक्टिव लाइफस्टाइल: हार्मोन को नेचुरली बैलेंस करने के लिए फिजिकली एक्टिव रहें और रोजाना कुछ देर योग या प्राणायाम करें।