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रांची सदर अस्पताल में चमत्कार! बिहार की महिला का सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, मिली नई जिंदगी

रांची (झारखंड): झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने सर्वाइकal स्पाइनल कॉर्ड (गर्दन की रीढ़ की हड्डी) के अंदर मौजूद जटिल ट्यूमर से जूझ रही एक 57 वर्षीय महिला का अत्यंत चुनौतीपूर्ण और सफल ऑपरेशन कर उन्हें नई जिंदगी दी है। मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली बिंदु देवी पिछले तीन वर्षों से इस गंभीर समस्या से पीड़ित थीं। ट्यूमर के दबाव के कारण उनके दोनों हाथों की ताकत लगभग समाप्त हो चुकी थी और धीरे-धीरे पैरों में भी लकवा जैसी कमजोरी बढ़ती जा रही थी।

🏥 तीन साल से भटक रहे थे परिजन, BHU और पटना में 8 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं मिली थी राहत

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मरीज की स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि वह लंबे समय से बिस्तर पर रहने को मजबूर थीं।

परिजनों ने उनके बेहतर इलाज की आस में बीएचयू (वाराणसी) सहित पटना और एजीपीजीआई (SGPGAI) लखनऊ जैसे देश के कई नामचीन बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे। पिछले तीन सालों में इलाज पर लगभग 7 से 8 लाख रुपये पानी की तरह बह गए, लेकिन ट्यूमर की स्थिति अत्यधिक जोखिम भरी होने के कारण डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। अंततः थक-हारकर परिजन बिंदु देवी को रांची सदर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार की यूनिट में लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जोखिम उठाते हुए ऑपरेशन का फैसला लिया।

🩺 न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार की टीम ने किया जोखिम भरा ऑपरेशन, मरीज की हालत में तेजी से सुधार

न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार ने बताया कि यह सर्जरी काफी जटिल और जोखिम भरी थी, क्योंकि ट्यूमर सीधे सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड के अंदर स्थित था।

ऑपरेशन के दौरान जरा सी भी चूक से स्पाइनल कॉर्ड डैमेज होने और मरीज के हमेशा के लिए पैरालाइज्ड (लकवाग्रस्त) होने का भारी खतरा बना रहता है। इस बेहद संवेदनशील मामले को विशेषज्ञता और अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

डॉ. विकास ने आगे बताया कि सर्जरी के महज दो से तीन दिनों के भीतर ही मरीज के हाथों और पैरों की संवेदनाएं व ताकत वापस लौटने लगी हैं। फिलहाल बिंदु देवी की सेहत में तेजी से सुधार है और वह अपने दोनों हाथों को खुद उठा पा रही हैं। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम की डॉ. ज्योतिका के साथ रमीज, सोहेल, संजू, अमन और पूनम का विशेष योगदान रहा।

👏 “सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि”, सिविल सर्जन और उपाधीक्षक ने पूरी टीम को सराहा

रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने सदर अस्पताल की इस बड़ी उपलब्धि पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल जैसे सरकारी संस्थान में इतनी जटिल और हाइ-रिस्क न्यूरो सर्जरी का सफलतापूर्वक होना राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करता है। इससे गरीब मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वहीं अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने कहा कि यह सफलता चिकित्सकों के उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है और यह मामला उन मरीजों के लिए आशा की नई किरण है जो लंबे समय से लालाज बीमारियों से जूझ रहे हैं।