इंसानों की तरह दिल्ली की हर संपत्ति का बनेगा ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड’! लैंड रिकॉर्ड बिल 2026 से पारदर्शी होगी व्यवस्था
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार जल्द ही राष्ट्रीय राजधानी की सभी संपत्तियों का इंसानों की तरह ही एक विशिष्ट ‘यूनिक आइडेंटिफिकेशन प्रॉपर्टी आधार कार्ड’ जारी करने जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी में भूमि और संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।
इसी उद्देश्य से सरकार शीघ्र ही ‘दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026’ लाने जा रही है। इस कानून के लागू होने के बाद पूरी दिल्ली की प्रत्येक संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वे कर उसका सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिसके उपरांत हर प्रॉपर्टी के लिए एक यूनिक कार्ड प्रदान किया जाएगा।
🏛️ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान: विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पारित होगा विधेयक
विधेयक पर बात करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जिस प्रकार आधार कार्ड ने प्रत्येक नागरिक की पहचान को एक विश्वसनीय और प्रामाणिक स्वरूप प्रदान किया है, ठीक उसी प्रकार अब दिल्ली की प्रत्येक संपत्ति की भी एक डिजिटल पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
इससे राजधानी में संपत्तियों के रिकॉर्ड पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित बनेंगे। सरकार इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित करेगी।
🛸 ‘स्वामित्व’ योजना के तहत 30 गांवों में ड्रोन सर्वे सफल, अब पूरी दिल्ली में लागू होगा मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार पहले चरण में केंद्र सरकार की ‘स्वामित्व’ (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में आधुनिक तकनीक और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के सहयोग से ड्रोन सर्वे कर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार कर चुकी है।
यह परियोजना एक बेहद सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सामने आई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार हुआ है और भविष्य में भूमि संबंधी विवादों की गुंजाइश न के बराबर होगी।
🏠 हर घर, दुकान और इमारत के प्रत्येक तल का तैयार होगा विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड
इसी अनुभव को आधार बनाते हुए अब दिल्ली सरकार पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में व्यापक स्तर पर भूमि एवं संपत्ति का सर्वे कराने जा रही है।
प्रस्तावित ‘दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026’ के तहत केवल गांव ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक एवं अन्य सभी प्रकार की संपत्तियों का भी विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसमें प्रत्येक भवन के प्रत्येक तल (Floor) तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि राजधानी की कोई भी संपत्ति इस व्यवस्था से बाहर न छूटे।
📜 भूमि विवादों, फर्जीवाड़े और लोन संबंधी समस्याओं से मिलेगी स्थायी मुक्ति
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दशकों से व्यवस्थित और प्रामाणिक भूमि रिकॉर्ड के अभाव में आम नागरिकों को मालिकाना हक प्रमाणित करने, खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, होम लोन, नक्शा स्वीकृति और अदालतों में लंबित वर्षों पुराने विवादों का सामना करना पड़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्तियों का प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध होगा, जिससे अस्पष्टता दूर होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
🌐 आधुनिक डिजिटल शासन व्यवस्था की मजबूत नींव रखेगा यह ऐतिहासिक सर्वे
यह पहल केवल रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस (Digital Governance) की मजबूत नींव भी बनेगी।
आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्वेक्षण और डिजिटल मैपिंग के माध्यम से तैयार होने वाला यह डेटाबेस नागरिकों को अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और सुगम नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
🆔 मंत्रियों के समूह की स्वीकृति प्रक्रिया में बिल, यूनिक प्रॉपर्टी ID से होगी पहचान
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड पूरी तरह अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली पर आधारित है, जिसमें भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया गया है।
इसी तकनीक को अब पूरे दिल्ली में लागू कर प्रत्येक संपत्ति का ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड’ तैयार किया जाएगा, जिससे राजधानी में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन का एक नया और आधुनिक अध्याय प्रारंभ होगा। वहीं, ‘दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026’ मंत्रियों के समूह (GoM) की विस्तृत समीक्षा के बाद अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया में है। इस कानून के माध्यम से दिल्ली में प्रत्येक संपत्ति को एक ‘यूनिक प्रॉपर्टी ID’ (Unique Property ID) के रूप में चिह्नित किया जाएगा।