सड़कों पर आवारा पशुओं के हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकारों को मुआवजे के लिए तंत्र बनाने का निर्देश
नई दिल्ली: सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं के कारण होने वाली लगातार सड़क दुर्घटनाओं और निर्दोष नागरिकों की जान जाने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को ऐसी दुर्घटनाओं में पीड़ितों या उनके आश्रितों को वित्तीय मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस नीतिगत तंत्र (Policy Mechanism) विकसित करने का कड़ा निर्देश दिया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा कि इन पालतू व आवारा पशुओं के मालिकों की सीधी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पीठ ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि दिन ढलने पर पशु हर रोज अपने तय आवास या गौशालाओं में वापस लौट आएं।
📜 मवेशी कानूनों का सख्ती से पालन कराएं राज्य, पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के मुआवजे के लिए बनाएं नियम
सर्वोच्च अदालत की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जिन भी राज्यों ने मवेशियों के नियंत्रण और प्रबंधन से संबंधित कानून बनाए हैं, वे उनके तत्काल और शत-प्रतिशत कार्यान्वयन के लिए कड़े कदम उठाएं।
अदालत ने कहा कि दोनों श्रेणियों—चाहे पीड़ित पैदल यात्री (Pedestrian) हो या वाहन चालक (Driver)—पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में समयबद्ध मुआवजे के भुगतान के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जो भी नियम उचित समझे जाएं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कानूनों में शामिल किया जाना चाहिए।
⚖️ किस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह ऐतिहासिक फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी पशुओं और मवेशियों की अनिवार्य डिजिटल टैगिंग (Mandatory Tagging) का निर्देश देते हुए कहा कि इससे पशुओं की पहचान, उनकी निगरानी करने, दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने तथा नियमित पशु चिकित्सा जांच और टीकाकरण से जुड़ने की क्षमता में अभूतपूर्व सुधार होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्देश पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश को चुनौती देने वाली एक पीड़ित महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए आया है। दरअसल, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने महिला को मिलने वाले 29.32 लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को रद्द कर दिया था। महिला के पति की सड़क पर टहलते समय एक आवारा सांड के जानलेवा हमले में सिर पर गंभीर चोट लगने से मृत्यु हो गई थी।
पति की असामयिक मृत्यु के पश्चात बेबस महिला ने न्याय और पर्याप्त वित्तीय सहायता की गुहार लगाते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। उस समय एकल-न्यायाधीश पीठ ने मृतक की अनुमानित आय, आयु और अन्य प्रासंगिक पहलुओं के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत मुआवजा तय करते हुए 29.32 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, बाद में राज्य की अपील पर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल-न्यायाधीश के इस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता महिला सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।