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Balodabazar DMF Meeting: बलौदाबाजार में डीएमएफ की बड़ी कार्ययोजना को मंजूरी; स्कूलों में नियुक्त होंगे 453 शिक्षक

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है. बलौदाबाजार जिला पंचायत के मुख्य सभाकक्ष में आयोजित शासी परिषद की उच्च-स्तरीय बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर एक व्यापक नई कार्ययोजना को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है. इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर-चांपा क्षेत्र की सांसद कमलेश जांगड़े, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा सहित जिले के तमाम वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे.

🏫 शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा संजीवनी बूटी सा सहारा: ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में नियुक्त होंगे 453 नए शिक्षक

बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस बात पर कड़ा जोर दिया कि खनिज संपदा के दोहन से मिलने वाली रॉयल्टी राशि का सीधा और वास्तविक लाभ उन गरीब और आदिवासी परिवारों तक पहुंचना चाहिए, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खनन गतिविधियों के कारण प्रभावित हैं. कार्ययोजना के विधिवत अनुमोदन के साथ ही आगामी पांच वर्षों की दीर्घकालिक विकास रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा की गई. इसी कड़ी में, बलौदाबाजार जिले के जो स्कूल वर्षों से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं, वहां शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने के लिए डीएमएफ फंड के माध्यम से तुरंत 453 योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है, जिससे ग्रामीण बच्चों का भविष्य संवर सकेगा.

🩺 स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई ताकत: विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और लैब टेक्नीशियनों के 99 पदों को मिली हरी झंडी

शिक्षा के साथ-साथ बैठक में जिले की जर्जर स्वास्थ्य सेवाओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई. खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण और अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों के त्वरित इलाज के लिए जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, कुशल स्टाफ नर्सों और आधुनिक लैब टेक्नीशियनों की कमी को दूर किया जाएगा. इसके लिए कुल 99 नए पदों की व्यवस्था इस नई कार्ययोजना में शामिल की गई है. इसके अतिरिक्त, सुदूर गांवों और वनांचल क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की बारहमासी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई पाइपलाइन और वाटर प्यूरीफायर परियोजनाओं पर चर्चा हुई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भीषण जल संकट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर काम शुरू करें.

💼 युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और कुपोषण के खिलाफ जंग: महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से किया जाएगा मजबूत

शासी परिषद की बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया कि डीएमएफ राशि को केवल कंक्रीट के अधोसंरचना (इमारतों) के निर्माण तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय युवाओं को रोजगार योग्य बनाने पर निवेश किया जाएगा. विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में गरिमापूर्ण रोजगार प्राप्त कर सकें. इसके साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत कुपोषण को जिले की सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए विशेष पोषण आहार योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है. कुपोषित बच्चों की पहचान, उनके विशेष उपचार और महिलाओं व स्वयं सहायता समूहों (SHG) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें सीधे स्थानीय कुटीर उद्योगों और छोटे व्यवसायों से जोड़ा जाएगा.

🚜 दिव्यांगों-बुजुर्गों को विशेष सहायता और कृषि में आधुनिक तकनीक: सड़क, पुल-पुलिया और सोलर लाइट से जगमगाएगा बलौदाबाजार

इस नई समावेशी कार्ययोजना में समाज के सबसे कमजोर वर्गों जैसे वृद्ध एवं दिव्यांगजनों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. इनके जीवन स्तर में सुधार के लिए आजीविका सृजन के उपाय, आवश्यक मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल और अन्य कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक कृषि उपकरणों को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके. भौतिक विकास के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत, मुख्य चौराहों पर हाई-मास्ट लाइट लगाने और ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ से जुड़े कार्यों को भी त्वरित रूप से क्रियान्वित किया जाएगा.

“बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को भारी खनन के कारण डीएमएफ के तहत एक बहुत बड़ी राशि प्राप्त होती है. यदि इस राशि का पूरी ईमानदारी और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए, तो जिले की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है. अब सबसे बड़ी चुनौती इन स्वीकृत योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी तरीके से समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारने की होगी.” — शासी परिषद के मुख्य वक्ता