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Durg Coal Scam: दुर्ग-भिलाई में कोयला चोरी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़; फर्जी GST बिल के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ की स्टील सिटी दुर्ग-भिलाई में पुलिस को औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय माफियाओं के खिलाफ एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है. जिले के खुर्सीपार थाना क्षेत्र में फर्जी जीएसटी (GST) बिल और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे चोरी के कोयले की धड़ल्ले से चल रही खरीदी-बिक्री के काले साम्राज्य का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस पूरे रैकेट के मुख्य सरगना सहित कुल तीन शातिर आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है. इस बड़ी कार्रवाई से कोयला चोरी करने वाले अंतराज्यीय सिंडिकेट और बोगस बिलिंग करने वाले गिरोह में हड़कंप मच गया है.

🔎 गुप्त सूचना पर खुर्सीपार गेट के पास पुलिस की दबिश: ₹3 लाख मूल्य का 15 टन से अधिक अवैध कोयला जब्त

इस पूरे सुनियोजित खेल का आधिकारिक तौर पर खुलासा करते हुए दुर्ग क्राइम डीएसपी यदुमणि सिदार ने बताया कि पुलिस को लंबे समय से इस क्षेत्र में अवैध माइनिंग और स्क्रैप की चोरी की सूचनाएं मिल रही थीं. इसी बीच शुक्रवार को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली कि खुर्सीपार गेट के पास विजय केसरवानी नामक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से भारी मात्रा में कोयले का भंडारण (स्टॉक) कर उसे ऊंचे दामों पर बाजार में खपाया जा रहा है. इनपुट के आधार पर एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और खुर्सीपार पुलिस की संयुक्त टीम ने गोदाम पर अचानक दबिश दी, जहां से पुलिस ने 15.530 टन अवैध कोयला बरामद किया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 3 लाख रुपये आंकी गई है.

📄 जांच में फर्जी निकले विजय केसरवानी के जीएसटी दस्तावेज: भिलाई स्टील प्लांट और रेलवे से चोरी होता था कोयला

क्राइम डीएसपी ने बताया कि जब गोदाम में छापेमारी कर विजय केसरवानी को हिरासत में लिया गया और कोयले के वैध कागजात मांगे गए, तो उसने पुलिस टीम को गुमराह करने के लिए तुरंत कई पक्के जीएसटी बिल और परिवहन दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए. लेकिन जब साइबर विंग और वाणिज्यिक कर विभाग की मदद से उन दस्तावेजों की बारकोड और ऑनलाइन जीएसटी नंबर से त्वरित जांच की गई, तो वे सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाए गए. कड़ाई से की गई पूछताछ में मुख्य आरोपी विजय केसरवानी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. उसने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जब्त किया गया यह कोयला रेलवे के मालगाड़ी वैगनों और भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के भीतर से चोरी कर लाया गया था, जिसे वैध दिखाने के लिए यह कागजी धोखाधड़ी की जाती थी.

⛓️ राजकुमार मिश्रा और सुनील शर्मा भी चढ़े पुलिस के हत्थे: पूरे सिंडिकेट और बोगस फर्मों की कुंडली खंगालने में जुटी पुलिस

मुख्य आरोपी विजय केसरवानी की निशानदेही पर पुलिस ने इस रैकेट को तकनीकी और कागजी सहायता देने वाले दो अन्य मास्टरमाइंड आरोपियों को भी तत्काल घेराबंदी कर दबोच लिया. आरोपी ने पुलिस को बताया कि फर्जी जीएसटी फर्म बनाना, बोगस इनवॉइस जेनरेट करना और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए हूबहू दिखने वाले नकली बिल तैयार करने का मुख्य काम राजकुमार मिश्रा और सुनील शर्मा द्वारा किया जाता था. पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी का माल रखने और जालसाजी की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है. दुर्ग पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार और किन-किन बड़े कोयला व्यापारियों और फैक्ट्रियों से जुड़े हुए हैं.