Haryana News: दुष्यंत चौटाला के साथ पुलिस के रवैये पर भड़के रणजीत चौटाला, बोले- यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी
सिरसा: जिले से एक बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है जहां हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि “इस तरह की घटना हरियाणा प्रदेश में तो बिलकुल नहीं होनी चाहिए. एक द्वारा अधिकारी के इस तरह के व्यवहार से पूरी पुलिस की बदनामी हुई है. यह सिर्फ एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे और कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है.”
‘इस तरह की घटनाएं मन में डर और अविश्वास पैदा करती है’: रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि “दुष्यंत चौटाला जैसे वरिष्ठ नेता जो हरियाणा के डिप्टी सीएम रह चुके हैं और सांसद का भी दायित्व निभा चुके हैं. उनके साथ इस तरह का व्यवहार न केवल निंदनीय है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है.” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “पुलिस का काम जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करना होता है लेकिन इस तरह की घटनाएं लोगों के मन में डर और अविश्वास पैदा करती है.”
‘पवन कुमार की हरकत से पुलिस की छवि को नुकसान’: उन्होंने हिसार सीआईए प्रभारी पवन कुमार का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि “उनकी इस हरकत से हरियाणा पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचा है.” चौटाला ने कहा कि “एक जिम्मेदार अधिकारी से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती. अगर एक पूर्व उपमुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठना स्वाभाविक है.”
‘आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें सीएम’: पूर्व मंत्री ने इस मामले में राज्य सरकार की धीमी प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि “इस तरह के मामलों में तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए थी ताकि एक स्पष्ट संदेश जाए कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या अमानवीय व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें.
‘..यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है’: रणजीत सिंह चौटाला ने आगे कहा कि “लोकतंत्र में पुलिस एक महत्वपूर्ण स्तंभ होती है और उसकी जिम्मेदारी सिर्फ कानून लागू करना नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है. यदि पुलिस ही अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने लगे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है.”
‘घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए’: उन्होंने यह भी कहा कि “इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.” उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि “पुलिस बल को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए.” अंत में चौटाला ने कहा कि “यह मामला सिर्फ एक नेता का नहीं है बल्कि हर उस नागरिक का है जो इस उम्मीद के साथ जीता है कि कानून उसे सुरक्षा देगा. अगर इस विश्वास को ठेस पहुंचती है तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है.”