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ईरान-इजरायल तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य बंद! जहाजों पर फायरिंग से दुनिया भर में हड़कंप, क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल?

दुनिया भर में तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम रास्ता, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait), फिर ठप पड़ गया है. ईरान ने इस इलाके से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर न सिर्फ गोलियां दागी हैं, बल्कि इस पूरे रास्ते को अनिश्चितकाल के लिए ब्लॉक करने की चेतावनी भी दे डाली है. अमेरिका और ईरान के बीच गहराते इस तनाव का सीधा असर अब कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार पर पड़ने की आशंका है, जो हाल ही में युद्ध की आशंकाएं कम होने से थोड़ी राहत की सांस ले रहे थे.

समुद्र में गूंजी गोलियों की आवाज, तनाव चरम पर

ईरान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हड़कंप मचा दिया है. ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने सख्त फरमान जारी किया है कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में खड़े जहाज अपनी जगह से न हिलें. चेतावनी दी गई है कि अगर कोई भी जहाज हॉर्मुज की तरफ बढ़ने की जुर्रत करता है, तो उसे दुश्मन का सहयोगी मानकर सीधा निशाना बनाया जाएगा.

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रितानी नौसेना ने भी पुष्टि की है कि IRGC की गनबोट्स ने एक टैंकर के बेहद करीब आकर फायरिंग की है. गनीमत रही कि जहाज और उसका क्रू सुरक्षित बच गया. लेकिन ओमान के तट के पास एक कंटेनर शिप पर हुए अज्ञात हथियार से हमले ने जहाजरानी कंपनियों की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं. मेहर (Mehr) न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तमाम मालवाहक जहाज ईरानी सेना के अगले आदेश के इंतजार में बीच समंदर में फंसे हुए हैं.

दुनिया की ‘तेल की धमनी’ पर ब्रेक

दरअसल, हॉर्मुज स्ट्रेट कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है. यह ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की मुख्य लाइफलाइन है. दुनिया भर का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है.बीते शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में शांति की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड करीब 9 फीसदी टूटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया था. इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद जगी थी और शेयर बाजार भी इसी पॉजिटिव सेंटीमेंट में ऊपर चढ़ रहा था. लेकिन ईरान की इस ताजा नाकेबंदी ने बाजार की इस खुशी को ग्रहण लगा दिया है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में फिर से आग लग सकती है. इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट, रोजमर्रा की महंगाई और आपके निवेश पोर्टफोलियो पर भी पड़ेगा.

अमेरिका से आर-पार की जंग

यह पूरा समुद्री विवाद दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भू-राजनीतिक तनातनी का नतीजा है. अमेरिका लगातार ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने की कोशिश कर रहा है. इसी का आक्रामक जवाब देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने दो टूक कहा है कि जब ईरान खुद हॉर्मुज से अपना व्यापार नहीं कर सकता, तो किसी और को भी इसकी इजाजत नहीं दी जाएगी.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी तेल टैंकरों को जब्त करने की बड़ी तैयारी कर रहा है. हालांकि, इस तल्खी के बीच कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट बताती है कि पर्दे के पीछे एक प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, जिसके तहत अमेरिका 20 अरब डॉलर का अटका हुआ ईरानी फंड रिलीज करेगा और बदले में ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम का भंडार छोड़ देगा.

लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. ट्रंप का कहना है कि बातचीत चल रही है, लेकिन अगर सीजफायर आगे नहीं बढ़ा, तो हमले फिर शुरू हो सकते हैं. वहीं ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि उसका समृद्ध यूरेनियम उसकी संप्रभुता का हिस्सा है और इसे किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा.

लेबनान में सुलगती आग

इस भू-राजनीतिक तनाव के तार केवल समुद्र तक सीमित नहीं हैं. लेबनान में भी स्थिति बेकाबू होती जा रही है. इजरायली सेना ने सीजफायर उल्लंघन का हवाला देते हुए दक्षिणी लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं. इस पूरे संघर्ष में अब तक 2,000 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं और 10 लाख से अधिक लोग बेघर हुए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया है कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात एक फ्रांसीसी सैनिक की भी जान चली गई है, जिसका सीधा आरोप हिजबुल्लाह पर लगा है.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो भी जाता है, तो वह बहुत ही सीमित और अस्थाई होगा. फिलहाल, पक्के तौर पर स्थायी शांति की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी और निवेशकों को आने वाले कुछ दिनों तक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए.