‘सीएम हेमंत सोरेन छोड़ें गृह विभाग, तैनात हो स्थायी DGP’; पलामू में पूर्व मंत्री KN त्रिपाठी का बड़ा बयान
पलामू (झारखंड): झारखंड सरकार के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी ने पलामू में आयोजित एक पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था और नीतिगत मामलों को लेकर सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक कार्यों की काफी व्यस्तता है, इसलिए उन्हें गृह विभाग का प्रभार छोड़ देना चाहिए और किसी सक्षम मंत्री को गृह मंत्री का जिम्मा सौंपना चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने राज्य में पिछले लंबे समय से खाली चल रहे स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर जल्द से जल्द पूर्णकालिक अधिकारी को नियुक्त करने की भी वकालत की।
⚖️ ‘पुलिस संरक्षण में हो रहीं हत्याएं, सुधार न हुआ तो सरकार के खिलाफ करेंगे विद्रोह’
पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने पलामू और पूरे झारखंड की विधि-व्यवस्था (Law & Order) पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में अपराध पर अंकुश नहीं लग पा रहा है और आए दिन लगातार हत्याओं की वारदातें सामने आ रही हैं।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पलामू में हुई कुछ हालिया हत्याओं में पुलिस अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका निकलकर सामने आई है और कई स्थानीय पुलिस अधिकारी पूर्व डीजीपी के संपर्क में हैं। उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यद्यपि वे खुद सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन यदि राज्य की कानून व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया गया तो वे सरकार की नीतियों के खिलाफ जन-विद्रोह की शुरुआत करने से पीछे नहीं हटेंगे।
🛢️ एथेनॉल ब्लेंडिंग पर वैज्ञानिक शोध सार्वजनिक करे केंद्र, बीजेपी जारी करे व्हाइट पेपर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने केंद्र सरकार की एथेनॉल पॉलिसी और भारतीय जनता पार्टी पर भी करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और बीजेपी को एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के मुद्दे पर देश के सामने श्वेत पत्र (White Paper) जारी करना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल और डीजल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और आम वाहन मालिकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एथेनॉल के प्रभावों को लेकर किए गए वैज्ञानिक शोध की रिपोर्ट को जानबूझकर जनता से छिपा रही है और एथेनॉल उत्पादन व आपूर्ति से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेताओं को पहुंचाया जा रहा है।