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CJP प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने वाले जुनैद मलिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट! पुलिस पर प्रताड़ना और परिजनों को उठाने का आरोप

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक शख्स काफी सुर्खियों में रहा, जिनका नाम जुनैद मलिक है। जुनैद ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की थी, जिसके लिए जनता ने उनके सेवाभाव की काफी सराहना की थी।

वहीं, अब जुनैद ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली और यूपी पुलिस पर उन्हें अवैध रूप से प्रताड़ित करने और हिरासत में लेने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने जुनैद की इस याचिका को तुरंत सूचीबद्ध (List) करने के अनुरोध का कोर्ट में विरोध किया है। अपनी याचिका में जुनैद मलिक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गैर-कानूनी तरीके से दिल्ली से उठाया और 5-6 घंटे तक गाड़ी में घुमाते हुए डराया-धमकाया। इसके बाद उन्हें देहरादून रोड पर एक दूर-दराज की सुनसान जगह पर छोड़कर पुलिसकर्मी चले गए।

👨‍👩‍👧‍👦 “पिता को गाजियाबाद से उठाया, बहन के ससुराल में मारा छापा”: परिजनों को प्रताड़ित करने का भी लगाया आरोप

अपनी याचिका में जुनैद ने केवल खुद पर ही नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात कही है।

उन्होंने बताया कि गाज़ियाबाद पुलिस ने उनके पिता को बिना किसी कानूनी नोटिस के हिरासत में लिया और उनके घर पर छापा मारा। इसके साथ ही पुलिस टीम मेरठ में उनकी शादीशुदा बहन के घर भी पहुंची और उनके ससुर तथा देवर को जबरन उठा ले गई। हालांकि, काफी पूछताछ के बाद पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों को छोड़ दिया।

🏛️ जबरन कार्रवाई रोकने और कानून के मुताबिक जांच की सुप्रीम कोर्ट से अपील

जुनैद मलिक का आरोप है कि पुलिस द्वारा उठाए गए ये ज़बरदस्ती वाले कदम बिना किसी कागज़ी कार्रवाई, एफआईआर या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए गैर-कानूनी तरीके से उठाए गए।

उन्होंने देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) से गुहार लगाई है कि वह उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ पुलिस की इस जबरन और दमनकारी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि यदि उनके खिलाफ कोई जांच लंबित है, तो उसे पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष तरीके से किया जाए।

💉 RML अस्पताल से लौटते समय किया गया किडनैप जैसी स्थिति का सामना

दाखिल याचिका के मुताबिक, 24 जुलाई की आधी रात को जुनैद मलिक एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगवाकर राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें रास्ते से ही जबरन उठा लिया।

पुलिस अधिकारियों ने उन्हें करीब 5 से 6 घंटे तक एक बंद गाड़ी में बिठाकर रखा। इस दौरान उन पर दबाव बनाया गया, डराया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

📱 “फंडिंग कहां से आती है?”: पुलिस ने जबरन फोन अनलॉक कर खंगाला डेटा

मलिक का आरोप है कि पुलिस ने जबरदस्ती उनका मोबाइल फोन छीनकर उसे अनलॉक कराया और उसकी चैट्स तथा कॉल्स की गहनता से जांच की।

इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उनसे मुख्य रूप से फंडिंग के बारे में तीखे सवाल पूछे कि CJP प्रदर्शन में खाने-पीने की व्यवस्था करने के लिए पैसा कहां से आता है और उन्हें कौन फंड कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि पूछताछ के बाद पुलिस उन्हें देहरादून रोड पर सुनसान जगह छोड़कर चली गई, जहां से जुनैद ने जैसे-तैसे कैबे बुक कर दिल्ली वापसी की। यह आवेदन आरजेडी (RJD) सांसद मनोज कुमार झा की उस रिट याचिका में दाखिल किया गया है, जिसमें CJP प्रोटेस्ट के दौरान हुई पुलिस हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। यह आवेदन एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड नेहा राठी के माध्यम से दाखिल किया गया है।