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‘NEET के छात्रों से ऐंठे जाते हैं ₹1.32 लाख करोड़’; सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2026 पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी के कड़े तेवर

नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए लाए जा रहे सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पर संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला।

उन्होंने लोकसभा में सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि अपने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर पैलेट गन क्यों चलवाई गई, क्या वे कोई आतंकवादी थे? उन्होंने छात्रों के समर्थन में पुरजोर आवाज उठाते हुए कहा कि किसी की लाचारी और पीड़ा का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार देश के नौजवानों से इतना क्यों डरती है और आरोप लगाया कि देश के शिक्षा तंत्र में आरएसएस (RSS) के लोगों को चुन-चुनकर भरा गया है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “देश के भविष्य और युवाओं पर पैलेट गन तथा AK-47 का इस्तेमाल करने की क्या जरूरत आन पड़ी? छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया था? क्या यह आदेश प्रधानमंत्री ने दिया या गृह मंत्री ने? उन्हें इसका जवाब देना ही होगा। पूरा देश आज उनसे जवाब मांग रहा है, यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी का मुद्दा नहीं है।”

📢 “सिस्टम बच्चों के भविष्य को कुचल रहा है, क्या पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई की मांग करना जायज नहीं?”

लोकसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था देश के बच्चों के सुनहरे भविष्य को निर्दयता से कुचल रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पेपर लीक करने वाले भू-माफियाओं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करना जायज नहीं है?

उन्होंने आगे कहा कि देश के युवा पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया। मैं संसद के पटल से पूछना चाहती हूं कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किस स्तर से जारी हुआ था।

💰 “NEET के छात्रों से वसूले जाते हैं ₹1.32 लाख करोड़, RSS के प्रचारकों से भर दिया पूरा शिक्षा तंत्र”

प्रियंका गांधी ने कहा कि अफसोस की बात यह है कि देश में इतना बड़ा संकट खड़ा होने के बाद भी प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी यह सोच रहे हैं कि पीआर (PR) स्टंट और विज्ञापनों के सहारे उनकी नैया पार हो जाएगी।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाया कि देश का कुल शिक्षा बजट जहाँ लगभग ₹1.4 लाख करोड़ है, वहीं अकेले NEET परीक्षा की तैयारी और व्यवस्था के नाम पर बच्चों व उनके अभिभावकों से ₹1.32 लाख करोड़ ऐंठ लिए जाते हैं।

प्रियंका ने कहा, “सरकार ने हमारे पूरे एजुकेशन सिस्टम को आरएसएस (RSS) के प्रचारकों से भरकर अंदर से खोखला कर दिया है। एनटीए (NTA) को जबरन लाकर और पूरे सिस्टम को सेंट्रलाइज़ करके मामलों को और अधिक उलझा दिया गया है। देश के कुल बजट में शिक्षा का अनुपात हर साल बढ़ने के बजाय असल में घटता जा रहा है।”

उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री का जिक्र करते हुए कहा कि एक दिन पहले पूर्व शिक्षा मंत्री का अभिनंदन किया जा रहा था, जबकि उसी वक्त महाराष्ट्र में एक परिवार अपनी होनहार बेटी की मौत का मातम मना रहा था। आपको आखिर किस बात का अहंकार है, जहाँ आंखों में शर्म होनी चाहिए थी, वहां सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

❌ “10 सालों में 152 बार हुए पेपर लीक, फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड पहले से ही खराब”

केंद्र सरकार की आर्थिक और रोजगार नीतियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “इस सरकार ने लगातार उन सभी क्षेत्रों और सेक्टरों को कमजोर करने का काम किया है जिनसे देश में रोजगार पैदा होते थे। आज हमारी पूरी परीक्षा प्रणाली ही ध्वस्त हो चुकी है। पिछले एक दशक (10 वर्षों) में देश भर में 152 बार से ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिनसे करोड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। इसके बावजूद किसी एक भी मुख्य दोषी या पेपर लीक माफिया के सदस्य को कड़ी सजा नहीं दी गई है।”

प्रियंका गांधी ने सलाह देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को तुरंत अपने सलाहकार बदल लेने चाहिए, क्योंकि केवल दिखावटी कमेटियां बनाने से कोई ठोस समाधान नहीं निकलने वाला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बनाई गई कमेटियों में गोमूत्र के विशेषज्ञों को बिठाया गया है। इस नए बिल से पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकेंगी और आज की ‘Gen Z’ पीढ़ी झूठ को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। सिस्टम में वास्तविक रूप से शिक्षित लोगों को शामिल करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का पुराना रिकॉर्ड पहले से ही काफी खराब रहा है।