ब्रेकिंग
CJP प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने वाले जुनैद मलिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट! पुलिस पर प्रताड़ना और परिजन... NEET पेपर लीक पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का अनोखा प्रदर्शन, सिर पर पट्टी और हाथ में लाठी लेकर पहुं... 'NEET के छात्रों से ऐंठे जाते हैं ₹1.32 लाख करोड़'; सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2026 पर बहस के दौरान प्... शिर्डी में गुरु पूर्णिमा उत्सव का आगाज! MP और गुजरात के भक्तों ने बाबा के चरणों में न्यौछावर किए लाख... दिल्ली में महिलाओं को हर महीने मिलेंगे ₹2500! 'लक्ष्मी योजना' को कैबिनेट की मंजूरी, रक्षाबंधन पर आएग... सिर में नक्सलियों की गोली फंसी होने के बाद भी रोज लगा रहे 10 KM दौड़, पढ़ें हॉक फोर्स के जांबाज शिवक... फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में छात्रों का हंगामा! बिजली, शौचालय व पेयजल की मांग को लेकर सड़क पर उ... IIT दिल्ली से घर बैठे सीखें AI और डेटा साइंस! सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू, जानें अप्लाई क... मसूरी-देहरादून मार्ग पर भारी भूस्खलन! मैगी पॉइंट के पास रेस्टोरेंट हुआ क्षतिग्रस्त, घंटों ठप रहा ट्र... छात्र प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! निर्दोषों को तुरंत रिहा करने के ...

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पीएम मोदी के संकटमोचकों में होती है गिनती

NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में बड़े विरोध-प्रदर्शन हुए। छात्रों की नाराजगी की गंभीरता को समझते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रह्लाद जोशी को पीएम मोदी के प्रमुख संकटमोचकों में से एक माना जाता है। ऐसे में जाहिर तौर पर सवाल उठते हैं कि आखिर पीएम मोदी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी इन्हें क्यों दी और धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को ही क्यों चुना? आइए इसे मुख्य बिंदुओं के जरिए समझते हैं।

💼 मजबूत प्रशासनिक अनुभव और संवेदनशील मंत्रालयों में बेहतर प्रदर्शन

प्रह्लाद जोशी वर्तमान समय में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास विभिन्न संवेदनशील मंत्रालयों में काम करने का लंबा और सफल प्रशासनिक अनुभव है।

🏛️ विशाल संसदीय अनुभव और मानसून सत्र के दौरान विपक्ष को साधने की क्षमता

पीएम मोदी का यह फैसला एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। मौजूदा मानसून सत्र में उनकी भूमिका बेहद अहम हो सकती है, क्योंकि प्रह्लाद जोशी 2019 से 2024 तक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं। उनके पास संसदीय प्रक्रियाओं का लंबा अनुभव है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनाना, संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाना और तीखी बहसों को कुशलता से संभालना शामिल है।

🎓 छात्रों और आंदोलनों के प्रति संवेदनशीलता

सरकार का मानना है कि नए शिक्षा मंत्री छात्रों के आंदोलनों के प्रति संवेदनशीलता को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रति सच्ची चिंता और संवेदनशीलता दिखाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने तथा युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मोदी सरकार हमेशा छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है और किसी भी अनियमितता के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

🧘 दबाव के मौकों पर शांत रहने और विपक्ष का सामना करने की अद्भुत कला

पीएम मोदी ने प्रह्लाद जोशी को इसलिए भी चुना है क्योंकि अपने लंबे अनुभव के कारण उनके पास दबाव के मौकों पर शांत रहने की अद्भुत क्षमता है। उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ है। साथ ही संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के कड़े हमलों का सामना करने और माहौल को शांत करने वाले कुशल राजनेता के तौर पर उनकी खास पहचान है।

🤝 NEP 2020 लागू करने के लिए एक अनुभवी और भरोसेमंद नेतृत्व

प्रह्लाद जोशी एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने, उच्च शिक्षा में प्रत्यायन (Accreditation) से जुड़े सुधारों और स्किल इंटीग्रेशन प्रोग्राम के लिए केंद्र व राज्य की संस्थाओं के बीच लगातार तालमेल की जरूरत है। ऐसे में एक अनुभवी और सर्वमान्य नेता ही इन बड़े ढांचागत (Structural) बदलावों को सफलता से आगे बढ़ा सकता है।