नगर निगम भोपाल: नियमों को ताक पर रखकर बांटे जा रहे प्रभार, 10 विभागों के ‘सुपर बॉस’ बने एक ही उपायुक्त
भोपाल। राजधानी के नगर पालिक निगम भोपाल में प्रशासनिक व्यवस्था और कार्य विभाजन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), आयुक्त नगर निगम भोपाल तथा अपर आयुक्त (सामान्य प्रशासन) की कार्यप्रणाली पर नियम-विरुद्ध प्रभार सौंपने के आरोप लग रहे हैं।
हाल ही में जारी आदेश के अनुसार, उपायुक्त श्री हीरेन्द्र सिंह कुशवाह को एक-दो नहीं, बल्कि 10 महत्वपूर्ण विभागों/शाखाओं (उद्यान, अतिक्रमण, सी.एम. हेल्पलाइन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, निर्वाचन, जनगणना, गोवर्धन परियोजना, वेटनरी/डॉग एवं अपील शाखा) का कार्यभार सौंप दिया गया है।
संबल घोटाले के आरोपियों और संविदा कर्मचारियों को संवेदनशील प्रभार!
चर्चा का विषय सिर्फ 10 विभागों का प्रभार ही नहीं, बल्कि निगम में चल रही नियम-विरुद्ध पदस्थापना का खेल भी है:
दागी कर्मचारियों पर मेहरबानी: जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीयन शाखा का प्रभार सत्यप्रकाश बड़वैया और मयंक जाट जैसे कर्मचारियों को सौंपा गया है, जिन पर बहुचर्चित संबल योजना घोटाले का गंभीर प्रकरण दर्ज है। सवाल उठ रहा है कि ऐसे संवेदनशील और जनसरोकार वाले विभागों की जिम्मेदारी आपराधिक/घोटाले के मामलों में घिरे कर्मचारियों को किस आधार पर दी गई?
संविदा कर्मियों को कमान: सामान्य प्रशासन के नियमों को दरकिनार करते हुए कंप्यूटर शाखा जैसा महत्वपूर्ण व गोपनीय प्रभार एक संविदा कर्मचारी के हाथों में सौंप दिया गया है।
सामान्य प्रशासन के नियमों की उधड़ती धज्जियां
मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संतुलन बना रहे। लेकिन भोपाल नगर निगम में नियमों को ताक पर रखकर दागी और पसंदीदा कर्मचारियों को मनचाहे प्रभार बांटे जा रहे हैं।
क्या निगम में अधिकारियों का अकाल है?
एक ही उपायुक्त को 10-10 विभागों का बोझ सौंपने और दागी कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने क्या भोपाल नगर निगम में योग्य अधिकारियों की भारी कमी है, या फिर यह किसी बड़े प्रशासनिक संरक्षण का नतीजा है? जनता के काम अटक रहे हैं और व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।