Karma Puja 2026: मांदर की थाप पर थिरका झारखंड; करमा पर्व की पूर्व संध्या पर रांची में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
रांची। प्रकृति और संस्कृति के महापर्व ‘करमा’ की पूर्व संध्या पर सोमवार को झारखंड के विभिन्न हिस्सों में भव्य व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राजधानी रांची समेत राज्य के कई प्रमुख स्थानों पर अखरा, महाविद्यालयों और सांस्कृतिक मंचों को विशेष रूप से सजाया गया था। देर शाम तक ढोल-नगाड़ों और मांदर की गूंजती थाप पर युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक पारंपरिक नृत्य-गान का आनंद लेते रहे। 22 सितंबर को मुख्य करम पूजा पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रूप में मनाई जाएगी।
🪘 जनजातीय लोक संस्कृति की दिखी अद्भुत झलक: पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने प्रस्तुत किया करमा नृत्य
करमा की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रमों में झारखंड की समृद्ध लोक और जनजातीय संस्कृति का मनमोहक रूप देखने को मिला।
पारंपरिक वेशभूषा व आभूषणों से सजे कलाकारों, युवाओं और छात्र-छात्राओं ने मांदर, ढोल और बांसुरी की सुरीली धुन पर सामूहिक करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मधुर गीत-संगीत और थिरकते कदमों के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय और भक्तिमय नजर आया।
🎶 क्षेत्रीय भाषाओं में गूंजे पारंपरिक करम गीत: प्रकृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम का दिखा संदेश
विभिन्न आयोजन स्थलों पर कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली, नागपुरी और खोरठा सहित कई क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं में पारंपरिक करम गीत प्रस्तुत किए गए।
इन लोक गीतों के माध्यम से प्रकृति के प्रति आभार, सामाजिक परंपराओं और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के अटूट स्नेह को अभिव्यक्त किया गया। नई पीढ़ी के युवाओं ने भी पूरे उत्साह और गर्व के साथ इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया।
🏫 शिक्षण संस्थानों व अखरों में विशेष आयोजन: रांची यूनिवर्सिटी और DSPMU में सजती दिखी मंडली
रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) संकाय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी और दीक्षांत मंडप सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों में करमा की पूर्व संध्या पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन संस्थानों के अखरों और भव्य सांस्कृतिक मंचों पर छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके अतिरिक्त शहर की विभिन्न सरना समितियों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी अखरों में विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ।
🌿 प्रकृति के प्रति आभार और सामाजिक एकजुटता का पर्व: नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास
करमा पर्व झारखंड की लोक परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से जुड़ी महान संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस पावन पर्व के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द, एकजुटता और भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम का संदेश दिया जाता है। पूर्व संध्या पर आयोजित इन भव्य कार्यक्रमों में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक सहेजकर पहुंचाने का सार्थक प्रयास भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
✨ मुख्य करम पूजा के लिए रांची तैयार: मांदर की थाप से सराबोर हुआ पूरा राज्य
सोमवार देर रात तक विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मांदर और ढोल की थाप सुनाई देती रही।
पारंपरिक गीतों की धुनों पर युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नृत्य किया। करमा पूर्व संध्या के इन शानदार आयोजनों ने रांची समेत पूरे झारखंड में पर्व के उमंग और उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। मंगलवार को मुख्य करम पूजा के साथ यह महापर्व अपने पूर्ण पारंपरिक और आध्यात्मिक रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।