ब्रेकिंग
NHAI Tunnel Project Shimla: मकानों में दरारें आने से सहमे लोग, एनएचएआई ने कहा— नवंबर 2025 से बंद है ... Rajasthan Mayor Election News: अजमेर, पाली, अलवर और उदयपुर में बीजेपी जीती, बीकानेर में कांग्रेस ने ... Youth Dies During Cricket Match: दौसा में मैच के दौरान टॉस जीतकर बैटिंग करने उतरे युवक की मौत, वीडिय... Jamui Viral Video Case: बिहार के जमुई में नाबालिग से छेड़खानी मामले में बड़ा एक्शन, 3 आरोपी गिरफ्तार... Tarn Taran Police Encounter: तरनतारन में पुलिस और गैंगस्टरों के बीच मुठभेड़; 1 लाख का इनामी ढेर, एक ... Madhya Pradesh News: देवास में युवती का अनोखा ड्रामा, चिट्ठियां फेंककर की प्रेमी को बुलाने की मांग —... AAP vs BJP: 'पंजाब को बदनाम करने की साजिश'; संजय सिंह ने बताया क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले चेहरों का सच Owaisi Viral Speech on Wife: सोने से पहले बीवी को बोलें I Love You, चुनावी मंच से ओवैसी ने समर्थकों ... Delhi Voter List SIR Notice: वीआईपी कल्चर पर भड़के खरगे; कहा- क्या अब देश में आम और VIP मतदाता की नई... Canada Plane Crash News: कनाडा में फ्लाइट ट्रेनिंग के दौरान विमान हादसा, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो ...

MP High Court Decision: पीड़िता के बच्चे से नहीं मिला DNA, रेप के आरोपी को हाईकोर्ट ने किया बाइज्जत बरी

जबलपुर। मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म और गर्भवती करने के संवेदनशील मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़िता द्वारा जन्म दिए गए बच्चे का डीएनए (DNA) आरोपी के डीएनए से मेल नहीं खाता है। वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव और डीएनए रिपोर्ट में अंतर पाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 10 साल की सजा से दोषमुक्त (Acquit) कर दिया है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ द्वारा की गई।

📜 जानिए क्या था पूरा मामला: सिवनी जिला अदालत ने सुनाई थी 10 साल की सजा

मामला सिवनी जिले के लखनादौन तहसील का है। यहां रहने वाले छोटू टेकाम पर पड़ोस में निवास करने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप लगे थे।

इस मामले में जिला न्यायालय (सेशन कोर्ट) ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी छोटू टेकाम को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए अधिकतम 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जिला अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी की ओर से अधिवक्ता द्वारा हाईकोर्ट में आपराधिक अपील याचिका दायर की गई थी।

👨‍👩‍👧 माता-पिता के काम पर जाने के दौरान हुई घटना: शिकायत के बाद दर्ज हुआ था प्रकरण

याचिका में बताया गया कि अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के माता-पिता मजदूरी के सिलसिले में नागपुर (महाराष्ट्र) गए हुए थे।

जब वे नागपुर से वापस लौटे, तो उन्हें पता चला कि उनकी मानसिक रूप से असक्षम बेटी गर्भवती हो गई है। बेटी के गर्भवती होने की जानकारी मिलते ही परिजनों ने संदेह के आधार पर पड़ोस में रहने वाले युवक के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। युवती के बयानों और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसके बाद निचली अदालत ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुना दी थी।

🧬 डीएनए जांच में नहीं हुआ जैविक पिता का मिलान: हाईकोर्ट ने माना वैज्ञानिक साक्ष्य को आधार

हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि फोरेंसिक जांच में पीड़िता द्वारा जन्म दिए गए नवजात शिशु और आरोपी का डीएनए आपस में मैच नहीं हुआ है।

इससे यह पूर्णतः सिद्ध होता है कि आरोपी युवक उस बच्चे का जैविक (Biological) पिता नहीं है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने मामले के दस्तावेजों और लैब रिपोर्ट का गहन अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि यद्यपि पीड़िता और नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मेल खाता है, परंतु आरोपी का डीएनए बच्चे के डीएनए से भिन्न है।

🕊️ तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ: हाईकोर्ट ने दिए तत्काल रिहाई के आदेश

एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य ही अपराध की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, तो केवल संदेह या बयानों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट एक अकाट्य और वैज्ञानिक प्रमाण है, जो आरोपी के जैविक पिता न होने की पुष्टि करती है। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) दिया जाना सर्वथा न्यायसंगत है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई 10 साल की सजा को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को तत्काल दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।