ब्रेकिंग
AAP vs BJP: 'पंजाब को बदनाम करने की साजिश'; संजय सिंह ने बताया क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले चेहरों का सच Owaisi Viral Speech on Wife: सोने से पहले बीवी को बोलें I Love You, चुनावी मंच से ओवैसी ने समर्थकों ... Delhi Voter List SIR Notice: वीआईपी कल्चर पर भड़के खरगे; कहा- क्या अब देश में आम और VIP मतदाता की नई... Canada Plane Crash News: कनाडा में फ्लाइट ट्रेनिंग के दौरान विमान हादसा, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो ... Iran Inflation Rate: ईरान में महंगाई दर पहुंची 69% के पार, भारत के मुकाबले 14 गुना ज्यादा बुरे हाल iPhone 18 Pro Price in India: भारत में आईफोन 18 सीरीज की धूम, फीचर्स और कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश MP High Court Decision: पीड़िता के बच्चे से नहीं मिला DNA, रेप के आरोपी को हाईकोर्ट ने किया बाइज्जत ... Madhya Pradesh TET News: 12 अक्टूबर से शुरू होगी परीक्षा! जानें 5 साल से कम और ज्यादा सेवा वाले शिक्... MP DA Hike News Today: 9 महीने का इंतजार होगा खत्म! मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों का 3% बढ़ सकता... India Under-19 vs Australia: युवा ऑलराउंडर यशबर्धन चौहान का शानदार प्रदर्शन, भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ...

Madhya Pradesh TET News: 12 अक्टूबर से शुरू होगी परीक्षा! जानें 5 साल से कम और ज्यादा सेवा वाले शिक्षकों पर क्या पड़ेगा असर

भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों से जुड़ा टीईटी (Teacher Eligibility Test) का मामला अब सीधे बड़े आंदोलन की ओर बढ़ गया है। राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में 27 सितंबर से भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन की घोषणा की है। संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 25 सितंबर तक उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश का शिक्षक वर्ग सड़कों पर उतरेगा। दरअसल, यह मामला केवल परीक्षा देने या न देने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश, नौकरी की निरंतरता, पदोन्नति और वर्षों से सेवा दे रहे गुरुजनों के भविष्य की चिंताएं जुड़ी हुई हैं।

📜 जानिए क्या है टीईटी विवाद और सुप्रीम कोर्ट की समय-सीमा: क्यों आमने-सामने हैं शिक्षक और सरकार

टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा, शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत शिक्षकों के लिए एक अनिवार्य योग्यता है।

मध्य प्रदेश में वर्तमान में कार्यरत हजारों शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी व्यवस्था लागू होने से काफी पहले हुई थी। ऐसे में शिक्षकों का तर्क है कि दशकों की निष्ठावान सेवा के बाद उन पर अचानक नई परीक्षा थोपना उनकी सेवा शर्तों का उल्लंघन है। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 के अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि आरटीई एक्ट के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है। इसके बाद मई 2026 में कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाते हुए इस व्यवस्था को बरकरार रखा, लेकिन शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी पास करने की अंतिम समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी।

📊 किन शिक्षकों पर क्या पड़ेगा असर: सेवा अवधि और पदोन्नति का समझें पूरा गणित

  • जिनकी सेवा 5 साल से कम बची है: टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त ऐसे शिक्षकों को बिना परीक्षा पास किए सेवानिवृत्ति (Retirement) तक सेवा में बने रहने की छूट है, लेकिन यदि वे पदोन्नति (Promotion) चाहते हैं, तो उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना ही होगा।

  • जिनकी सेवा 5 साल से अधिक बची है: ऐसे सभी सेवारत शिक्षकों को तय समय-सीमा यानी 31 अगस्त 2028 तक अनिवार्य रूप से टीईटी पास करना होगा।

  • पदोन्नति (Promotion) के नियम: शिक्षक की सेवा अवधि कितनी भी बची हो, यदि वह उच्च पद पर प्रमोशन पाना चाहता है, तो टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा।

📢 पुरानी पेंशन और ई-अटेंडेंस का भी विरोध: शिक्षकों ने धार में सामूहिक उपवास कर सौंपा ज्ञापन

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से अध्यापन करा रहे अनुभवी शिक्षकों को दोबारा परीक्षा के दायरे में लाना व्यावहारिक रूप से अनुचित है।

भोपाल में होने वाले इस महा-आंदोलन में केवल टीईटी से मुक्ति ही नहीं, बल्कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, लंबे समय से लंबित पदोन्नतियां, समयमान वेतनमान, पेंशन-ग्रेच्युटी के लाभ और ई-अटेंडेंस व्यवस्था की समीक्षा जैसी कई ज्वलंत मांगें शामिल हैं। इसी क्रम में 20 सितंबर को धार जिले में सैकड़ों शिक्षकों ने सामूहिक उपवास रखकर प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था।

🗓️ 12 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित है टीईटी परीक्षा: आंदोलन का समय बेहद निर्णायक

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, वर्ष 2026 की टीईटी प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं 12 अक्टूबर 2026 से आयोजित होने जा रही हैं।

इस परीक्षा से प्रदेश के लगभग 1.5 लाख सेवारत शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। हालांकि शासन द्वारा 2028 तक पात्रता हासिल करने का समय दिया गया है, लेकिन परीक्षा की तारीख पास होने के कारण शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। यही वजह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित यह आंदोलन इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करने में निर्णायक माना जा रहा है।

⚔️ क्या टीईटी पास नहीं करने पर चली जाएगी नौकरी? जानिए कानूनी पक्ष और आगे का रास्ता

इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील और गंभीर पहलू नौकरी पर खतरे की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यदि 5 वर्ष से अधिक की सेवा शेष रहने वाले शिक्षक निर्धारित अंतिम तिथि तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं, तो उनकी नियमित सेवा जारी रखने पर विधिक संकट खड़ा हो सकता है। मूल फैसले में ऐसी स्थिति में सेवा से पृथक करने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) की बात कही गई थी। हालांकि, 5 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों को सेवानिवृत्ति तक अभयदान दिया गया है।

शिक्षक संगठनों द्वारा सरकार को दी गई 25 सितंबर की डेडलाइन अब समाप्त होने की कगार पर है, जिसके बाद 27 सितंबर से भोपाल में आर-पार की लड़ाई की शुरुआत होने जा रही है।