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TMC and Shiv Sena Crisis: टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत; बीजेपी पर लगे आरोप, नेतृत्व संकट पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। दोनों ही दलों में नेताओं के इस्तीफे और बागी गुटों के उभरने से विपक्षी खेमे में खलबली मची है। जहाँ विपक्षी दल इस टूट के लिए सीधे तौर पर बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं बीजेपी ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे इन पार्टियों के ‘नेतृत्व संकट’ का नतीजा बताया है।

🗳️ NDA को मिल सकता है बड़ा आंकड़ा

इस राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा फायदा एनडीए (NDA) को मिलता दिख रहा है। यदि टीएमसी से टूटे 20 सांसदों का नया गुट और शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसद एनडीए को समर्थन देते हैं, तो संसद में एनडीए का आंकड़ा 319 तक पहुंच सकता है। सत्ता पक्ष के लिए यह संख्या बल परिसीमन बिल जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को पारित कराने के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।

🚩 नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती खाई

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में असंतोष का मुख्य कारण शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच टूट चुका संपर्क है। एक बीजेपी सांसद ने कहा, “बालासाहेब ठाकरे के समय जो संबंध कार्यकर्ताओं से था, वह अब गायब है।” वहीं, टीएमसी में बागियों का आरोप है कि पार्टी को एक ‘निजी जागीर’ की तरह चलाया जा रहा था, जहाँ चुने हुए प्रतिनिधियों की कोई आवाज नहीं थी।

⚖️ आरोपों का दौर: बीजेपी पर निशाना बनाम नेतृत्व की विफलता

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकसभा में अपना संख्या बल बढ़ाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त कर रही है। वहीं, ममता बनर्जी भी अपनी पार्टी में बगावत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार मानती हैं। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं का कहना है कि टीएमसी में प्रशासनिक खामियों और विधानसभा चुनावों में करारी हार (294 में से केवल 80 सीटें) के कारण नेता पहले से ही पार्टी से असंतुष्ट थे और बदलाव चाहते थे।

🔍 ‘निजी कारण’ बनाम ‘व्यवस्थागत समस्या’

बीजेपी नेताओं ने अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं (जैसे बीएस येदियुरप्पा या उमा भारती) के इस्तीफे और टीएमसी-शिवसेना में हो रही बगावत के बीच स्पष्ट अंतर बताया। उन्होंने तर्क दिया कि उनकी पार्टी में ‘मजबूत समीक्षा तंत्र’ और ‘आरएसएस’ जैसा सपोर्ट सिस्टम है, जो असहमति को विद्रोह में बदलने से रोकता है। उनके अनुसार, टीएमसी और यूबीटी में हो रहा विद्रोह पार्टी की व्यवस्थागत विफलताओं को दर्शाता है।