INDIA गठबंधन के साथ हैं, लेकिन राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर साधी चुप्पी: मध्यावधि चुनाव के संकेत
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं।
हालांकि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी से जुड़े सीधे सवाल पर उन्होंने स्पष्ट रुख जाहिर करने के बजाय इसे भविष्य पर छोड़ दिया। उन्होंने दो-टूक कहा कि नेतृत्व का चयन एक सामूहिक निर्णय होगा, जिस पर वे अकेले क्या टिप्पणी कर सकती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने देश के सियासी समीकरणों पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वर्ष 2029 से पहले ही देश में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि “खेला हो चुका है और हो सकता है कि 2029 से पहले ही देश में मध्यावधि चुनाव (Mid-term Elections) हो जाएं।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बंगाल चुनाव में अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव उनके समर्थन में पहुंचे थे; यदि उन्हें पंजाब या उत्तर प्रदेश से बुलावा आएगा तो वह निश्चित रूप से वहां प्रचार के लिए जाएंगी।
⚡ मुख्य चुनाव आयुक्त को बताया ‘वैनिश कुमार’: SIR विवाद पर ममता बनर्जी का तीखा प्रहार
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़े तेवर:
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‘वैनिश कुमार’ कहकर साधा निशाना: नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें ‘वैनिश कुमार’ करार दिया।
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जनता नहीं करेगी माफ: उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने नागरिकों के मौलिक मतदान अधिकार को छीनने की कोशिश की है, जिसके लिए देश की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
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बड़ा राजनीतिक तूफान आने का दावा: उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जल्द ही एक बड़ा राजनीतिक तूफान आने वाला है और देश की राजनीति में आमूलचूल परिवर्तन होगा।
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प्रतिनिधिमंडल के अपमान का आरोप: उन्होंने कहा कि टीएमसी ने पहले दिन से एसआईआर प्रक्रिया पर तथ्यात्मक बात रखी। जब पार्टी 100 पीड़ितों को लेकर चुनाव आयोग पहुंची, तो वहां नेताओं को अपमानित कर बाहर जाने को कहा गया।
🏢 ‘चुनाव आयोग ने बीजेपी को दिलाई जीत’: एसआईआर और केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप
चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठाए गए सवाल:
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चुनावी धांधली का आरोप: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उन सभी विधानसभा क्षेत्रों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया जहां टीएमसी मजबूत थी, और एसआईआर की आड़ में वहां के मतदाताओं के नाम काटे गए।
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ईवीएम और बीएलओ का मुद्दा: उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और ईआरओ (ERO) को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दिया गया और चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।
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केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का दावा: मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों (CRPF और CAPF) के माध्यम से मतदाताओं को डराया गया और टीएमसी के पक्ष में मतदान न करने का दबाव बनाया गया।
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एसआईआर का बदला नाम: उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने निष्पक्षता ताक पर रखकर एसआईआर का नाम बदलकर ‘स्पेशल इंसेंटिव रूलिंग पार्टी’ कर दिया।
🛡️ इम्यूनिटी प्रोविजन और राजनीतिक प्रतिशोध पर उठाए सवाल: ‘थाने बन गए हैं बीजेपी दफ्तर’
आयोग को मिली कानूनी सुरक्षा और बंगाल की कानून-व्यवस्था पर बयान:
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इम्यूनिटी प्रावधान पर सवाल: ममता बनर्जी ने वर्ष 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के लिए बनाए गए लीगल इम्यूनिटी प्रोविजन पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी 147 सांसदों को संसद से निलंबित करके यह कानून पारित कराया गया था।
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राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप: उन्होंने कहा कि बंगाल में राजनीतिक बदले की भावना से फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
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स्थानीय पुलिस पर आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस थाने राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं और उनके अपने आवास के बाहर भी असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल खराब करने की कोशिशें की जाती हैं।
📊 अभिषेक बनर्जी का सनसनीखेज दावा: ‘बीजेपी को 150 सीटें गिफ्ट की गईं, 9 घंटे का सीसीटीवी फुटेज दिखाएं’
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप:
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आयुक्तों के मतभेद का हवाला: अभिषेक बनर्जी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में ‘पिक एंड चूज’ का खेल अब किसी राजनीतिक दल का आरोप नहीं, बल्कि खुद चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से सार्वजनिक हुआ है।
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58 सीटों की वास्तविक जीत का दावा: अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर बीजेपी मात्र 58 सीटें ही जीत सकी थी, जबकि करीब 150 सीटें योजनाबद्ध तरीके से उन्हें उपहार स्वरूप दी गईं।
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9 घंटे के सीसीटीवी फुटेज की चुनौती: उन्होंने कहा कि वे 100 संदिग्ध सीटों की सूची सार्वजनिक करने को तैयार हैं, बशर्ते चुनाव आयोग मतदान के दिन दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक के 9 घंटे का लाइव सीसीटीवी फुटेज पारदर्शी रूप से दिखाए।
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पुरस्कृत करने का आरोप: उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया हुई, उन्हें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही राज्य का मुख्य सचिव बना दिया गया, जबकि पूर्व सीईसी को एक निजी बैंक का चेयरमैन नियुक्त किया गया।