बहादुरगढ़ नगर परिषद की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा को यह बड़ा झटका भी लगा है। नगर परिषद के वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। खास बात यह रही कि भाजपा के वाइस चेयरमैन के खिलाफ कांग्रेस, इनेलो और निर्दलीय पार्षदों ने ही नहीं, बल्कि भाजपा की टिकट पर चुनाव जीतने वाले पार्षदों ने भी पालेराम शर्मा के खिलाफ वोट कर अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। पार्षदों ने अपनी जीत का जश्न भी मनाया और ढोल की थाप पर जमकर थिरकते हुए भी दिखाई दिए।
📊 एडीसी की अध्यक्षता में हुई बैठक: 26 पार्षदों ने एकमत होकर किया मतदान
झज्जर जिले के एडीसी जगनिवास की अध्यक्षता में बहादुरगढ़ नगर परिषद कार्यालय में बैठक बुलाई गई। इस बैठक में शहर के कुल 31 पार्षदों में से 26 पार्षद शामिल हुए। बैठक में नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी, वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम समेत 5 पार्षद अनुपस्थित रहे। शहर के 31 पार्षदों और चेयरपर्सन को मिला कर कुल 32 वोटों में से बैठक में उपस्थित सभी 26 पार्षदों ने राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम के खिलाफ वोट किया। इसके साथ ही अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया।
📜 लंबे समय से चल रही थी नाराजगी: 25 पार्षदों ने दिया था नोटिस
हम आपको बता दें कि 17 मार्च को 25 पार्षदों ने राजपाल शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। नगर परिषद के कई पार्षद लंबे समय से वाइस चेयरमैन के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे थे। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पार्षदों ने इसे भाईचारे की जीत करार दिया। पार्षदों के कहना है कि अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े पार्षदों ने एकजुट होकर पालेराम शर्मा को पद से हटाने का फैसला लिया था, जिसमें अब जाकर उन्हें कामयाबी हासिल हुई है।
⚖️ गंभीर आरोपों के घेरे में वाइस चेयरमैन: अभद्र भाषा और विकास में बाधा का आरोप
पार्षदों ने एक बार फिर से पालेराम शर्मा पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने, विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने और महिला पार्षदों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। पार्षदों का मानना है कि उनकी कार्यशैली के कारण नगर परिषद का माहौल खराब हो रहा था। अब अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद शहर के विकास कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
🚩 भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका: एकजुट विपक्ष और बागियों ने बदली तस्वीर
इस घटनाक्रम को बहादुरगढ़ की स्थानीय राजनीति में भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अपनी ही पार्टी के पार्षदों का बागी होना संगठन की आंतरिक कलह को दर्शाता है। पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद में अब बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य होने की उम्मीद बनी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर परिषद का अगला वाइस चेयरमैन कौन बनेगा।