भारत बना आईफोन मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का एक्सपोर्ट पहुंचा 1 लाख करोड़ के करीब
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भारत अब स्मार्टफोन निर्माण, विशेष तौर पर आईफोन (iPhone) तैयार करने का एक बहुत बड़ा और प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। देश की सबसे बड़ी स्वदेशी आईफोन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स’ ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के दौरान एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में कंपनी का कुल आईफोन एक्सपोर्ट लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत से भी अधिक की शानदार बढ़त को दर्शाता है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास जमा किए गए ताजा वित्तीय आंकड़ों से यह साफ जाहिर होता है कि दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी Apple की वैश्विक सप्लाई चेन के भीतर अब टाटा ग्रुप की भूमिका कितनी अधिक मजबूत और निर्णायक हो चुकी है। चीन से बाहर निकलकर Apple जिस तेजी से अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रहा है, उसका सबसे बड़ा प्रत्यक्ष लाभ भारत को मिल रहा है।
अमेरिका, ताइवान और आयरलैंड तक छाई भारतीय आईफोन की धूम, रेवेन्यू में भारी उछाल
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत आने वाली विभिन्न इकाइयों ने मिलकर वित्त वर्ष 2026 में कुल 99,128 करोड़ रुपये का भारी-भरकम एक्सपोर्ट रेवेन्यू दर्ज किया है। भारत की धरती पर निर्मित इन अत्याधुनिक आईफोन्स को सबसे अधिक संख्या में अमेरिका, ताइवान और आयरलैंड जैसे देशों में निर्यात किया गया है। गौरतलब है कि आयरलैंड में ही Apple कंपनी का मुख्य यूरोपीय हेडक्वार्टर स्थित है। यदि आंकड़ों के आंकड़ों पर गौर करें, तो इन इकाइयों ने अकेले ताइवान को 47,930 करोड़ रुपये, अमेरिका को 38,508 करोड़ रुपये और आयरलैंड को 11,980 करोड़ रुपये मूल्य के आईफोन्स का निर्यात किया है। कंपनी के कुल उत्पादन रेवेन्यू में केवल एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत तक रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बाजार की निरंतर बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अब दुनिया के नक्शे पर एक अनिवार्य मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में स्थापित हो चुका है।
तीन बड़ी कंपनियों का मिलाजुला योगदान, पुराने आंकड़ों से तुलना में क्यों आ रही है तकनीकी चुनौती?
टाटा ग्रुप की इस बड़ी सफलता के पीछे उसकी तीन प्रमुख विनिर्माण इकाइयां काम कर रही हैं। पहली खुद ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स’ है, दूसरी ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम सॉल्यूशंस’ (जो पहले विस्ट्रॉन का कारोबार हुआ करती थी और जिसे टाटा ने अधिग्रहित किया था), तथा तीसरी ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स एंड सॉल्यूशंस’ है (जो मूल रूप से पेगाट्रॉन टेक्नोलॉजी इंडिया थी और अब एक ज्वाइंट वेंचर है जिसमें टाटा की 60% और पेगाट्रॉन की 40% हिस्सेदारी है)। बीते वित्त वर्ष (FY25) में इन तीनों कंपनियों ने मिलकर 76,953 करोड़ रुपये का निर्यात किया था। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि FY25 के आंकड़ों की सीधे तौर पर FY26 से तुलना करना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा, क्योंकि विस्ट्रॉन वाले कारोबार ने पिछले वर्ष 12 महीनों के बजाय 15 महीनों का वित्तीय ब्योरा प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में आई गिरावट ने भी कुल एक्सपोर्ट वैल्यू को बढ़ाने में परोक्ष रूप से मदद की है।
रिकॉर्ड तोड़ एक्सपोर्ट और कमाई के बीच तेजी से बढ़ा कंपनी का शुद्ध घाटा
एक तरफ जहां कंपनी के निर्यात ने नए कीर्तिमान रचे हैं, वहीं दूसरी तरफ उसके शुद्ध घाटे (Net Loss) में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू 96 प्रतिशत की जोरदार छलांग के साथ 1,29,902 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, लेकिन इसके साथ ही कंपनी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 1,611 करोड़ रुपये हो गया (जो इसके पिछले साल मात्र 69 करोड़ रुपये था)। इसके अतिरिक्त, विदेशी मुद्रा के खर्च से जुड़े आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं, जहां इन कंपनियों का कुल फॉरेक्स आउटगो 1,29,641 करोड़ रुपये रहा है। यह इस बात का संकेत है कि भारत के भीतर आईफोन तैयार करने के लिए अभी भी विदेशों से आयात किए जाने वाले कंपोनेंट्स और पार्ट्स पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ रहा है, हालांकि इस खर्च में कुछ हिस्सा अन्य शुल्कों का भी हो सकता है।
घरेलू बाजार में भी रही छप्परफाड़ बिक्री, Apple इंडिया ने दर्ज किया तगड़ा मुनाफा
अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ देश के अपने घरेलू बाजार में भी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। समीक्षाधीन वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की घरेलू बिक्री में 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 30,182 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इसमें वे सभी उत्पाद शामिल हैं जिनकी आपूर्ति भारत में Apple की स्थानीय सेल्स और सर्विस इकाई यानी ‘Apple इंडिया’ को की गई है। खुद Apple इंडिया ने भी इस अवधि के दौरान 1,03,853 करोड़ रुपये की जबरदस्त बिक्री दर्ज करते हुए 5,311 करोड़ रुपये का भारी-भरकम शुद्ध मुनाफा कमाया है।