Delhi High Court Voter List Case: मतदाता सूची से नाम हटने पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फॉर्म-6 भरकर मिलेगा समाधान
दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में दिल्ली हाई Court ने दो मतदाताओं को राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम गणना प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मतदाता सूची से हट गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं. उनके आवेदन पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की खंडपीठ ने 2 मतदाताओं की याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की. याचिकाकर्ताओं के नाम SIR के दौरान गणना की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मतदाता सूची से हट गए थे. उनका कहना था कि वे अपने पुराने पते से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए थे, जिस वजह से गणना फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके.
📝 फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मिली छूट
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील संजय वशिष्ठ ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने एक याचिकाकर्ता को इस प्रक्रिया में मदद की पेशकश की थी.
हालांकि, एक याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि फॉर्म-6 भरने से उन पर गलत जानकारी या गलत घोषणा करने का आरोप लग सकता है. कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि यह डर बेबुनियाद है. पीठ ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 भरने का सुझाव निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्देश पर दिया गया था.
⚖️ वोटरों के लिए तय प्रक्रिया और कोर्ट का अंतिम निर्देश
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो फॉर्म-6 भर सकते हैं और उनके आवेदन पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया. दरअसल, याचिकाकर्ता ने कोर्ट में ECI के उन मौजूदा वोटरों के लिए तय प्रोसेस को चुनौती दी थी, जिनकी गिनती SIR के दौरान नहीं हो पाई थी.
उन्होंने उनकी इलेक्टोरल एंट्री को फिर से शुरू करने और Form 6 के ज़रिए नए नाम जुड़वाने के बजाय Form 8 के ज़रिए उनके नामों में सुधार और ट्रांसपोज़िशन की इजाज़त देने के लिए निर्देश मांगे थे. उनकी शिकायत यह थी कि वे अपने पिछले पते से शिफ्ट हो गए थे और इस वजह से, गिनती के फ़ॉर्म नहीं भर सके, जिससे उनके नाम वोटर लिस्ट से हट गए.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता का यह डर पूरी तरह निराधार है कि फॉर्म-6 भरने से उन पर गलत घोषणा का मामला बनेगा. इन तमाम स्पष्टीकरण के साथ अदालत ने रिट कार्यवाही को समाप्त कर दिया.