AISA President Neha Bora Released: दिल्ली पुलिस ने आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को किया रिहा, कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके आज होंगे SEM कोर्ट में पेश
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने रिहा कर दिया है। उन्हें शुक्रवार शाम को पुलिस ने तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिया था। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया है, और आज शनिवार को उन्हें एसईएम (SEM) कोर्ट में पेश किया जाएगा। दिपके को पुलिस ने उस वक्त हिरासत में लिया था, जब वे तिरंगा मार्च में शामिल होने जा रहे थे।
दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद सीजेपी ने कहा था कि उसके संस्थापक अभिजीत दिपके का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। इससे पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने दावा किया था कि उसकी अध्यक्ष नेहा बोरा का पता चल गया है और कई घंटों तक अनिश्चितता की स्थिति रहने के बाद वह आरके पुरम पुलिस थाने में मिलीं।
🗣️ “आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव” — रिहाई के बाद बोलीं नेहा बोरा
रिहा होने के बाद नेहा बोरा ने कड़े शब्दों में प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है मानो वे कोई बहुत बड़े अपराधी हों। यह चलन इस देश में लंबे समय से चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह अवैध रूप से हिरासत में लिया जा रहा है। चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन ही छोड़ा जाता है।
उन्होंने आगे कहा, “कानूनी तौर पर लोगों को, खासकर महिलाओं को सूरज ढलने के बाद छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है—अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता? वही, जो आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई है। दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं।” उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और एसआईआर (SIR) को रोकने की मांग की, ताकि आम नागरिक सुकून से रह सकें।
🚨 आइसा और CJP के गंभीर आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
आइसा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर सवाल उठाया था कि दिल्ली पुलिस ने नेहा को आधी रात तक थाने में क्यों रखा? एक महिला छात्र नेता को इस तरह हिरासत में रखना कहाँ तक जायज है? वहीं, सीजेपी ने आरोप लगाया कि उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है और उनका वकीलों से संपर्क नहीं होने दिया जा रहा है।
सीजेपी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “यह सरकार युवाओं के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों करती है? हम भारत के समान अधिकार वाले नागरिक हैं। अभिजीत हाथ में तिरंगा लेकर अपने घर से बाहर निकले थे, तो तिरंगा लेकर चलना अपराध कैसे हो सकता है?” आइसा के पूर्व नेता एन साई बालाजी और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।