नूंह के सूंध गांव में बंदरों का खौफनाक आतंक, हमले में 17 वर्षीय किशोर की मौत और दो दर्जन से अधिक घायल
नूंह (हरियाणा): नूंह जिले के तावड़ू खंड अंतर्गत स्थित गांव सूंध में बंदरों का आतंक लगातार जानलेवा बनता जा रहा है। गांव में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले एक वर्ष के दौरान बंदरों के हिंसक हमलों में दो दर्जन से अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
इतना ही नहीं, कुछ समय पूर्व बंदरों के हमले के कारण 17 वर्षीय किशोर विक्रम उर्फ विक्की की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि कई बार जिला प्रशासन और संबंधित वन विभाग को लिखित शिकायत देने के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, जिससे पूरे गांववासियों में भारी रोष और गुस्सा व्याप्त है।
🏛️ शिकायत लेकर SDM दफ्तर पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं, 200 बंदरों के झुंड ने छीना लोगों का चैन
सोमवार को गांव की बड़ी संख्या में पीड़ित महिलाएं तावड़ू स्थित एसडीएम (SDM) कार्यालय पहुंचीं और प्रदर्शन कर बंदरों के बढ़ते आतंक से तुरंत निजात दिलाने की पुरजोर मांग की।
ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि गांव में करीब 150 से 200 बंदरों का बड़ा झुंड सुबह से शाम तक गलियों, मकानों की छतों और खेतों में खुलेआम घूमता रहता है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर अचानक हमला कर देना अब रोज की बात हो गई है। बंदरों के खौफ से लोगों ने घरों की छतों पर जाना बंद कर दिया है। बंदर घरों में जबरन घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं, तोड़फोड़ करते हैं और खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
🩸 रविवार को भी बंदरों के हमले में घायल हुए कई लोग, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि बीते रविवार को भी बंदरों के अचानक किए गए हमले में गांव के कई लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाना पड़ा।
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर वन विभाग की ओर से हर बार केवल कागजी आश्वासन ही दिए जाते हैं। यदि जल्द ही इन हिंसक बंदरों को पकड़कर दूर जंगलों या अभयारण्य में नहीं छोड़ा गया, तो गांव में कभी भी कोई बहुत बड़ी अनहोनी या जानलेवा हादसा हो सकता है।
🗣️ घर में घुसकर करते हैं तोड़फोड़, दुकान से उठा ले जाते हैं सामान: पीड़ित महिलाओं का दर्द
गांव सूंध की निवासी संगीता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “मेरे पति सुबह काम पर चले जाते हैं और मैं घर में अकेली रहती हूं। बंदर अक्सर दरवाजा खोलकर अंदर घुस आते हैं और भारी तोड़फोड़ मचाते हैं।”
वहीं लक्ष्मी ने बताया, “मेरे पति दिव्यांग हैं और परिवार पालने के लिए गांव में परचून की छोटी दुकान चलाते हैं, लेकिन बंदर दुकान में घुसकर सारा सामान उठाकर ले जाते हैं।” वहीं सुनेहरा देवी का कहना है कि सूंध एक बड़ा गांव है और यहां सैकड़ों बंदर दिन-रात आतंक मचाते हैं, ऐसे में प्रशासन को आमजन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
📜 सरपंच के खिलाफ भी दिखा आक्रोश, जल्द शुरू होगी बंदर पकड़ने की टेंडर प्रक्रिया: SDM जितेंद्र गर्ग
समस्या से बेहाल ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि बीर सिंह की निष्क्रियता पर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर गांव को इस समस्या से तुरंत राहत दिलाने की मांग की है।
इस संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम तावड़ू जितेंद्र गर्ग ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बीडीपीओ, संबंधित गांव के सरपंच और वन विभाग के अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि गांव से बंदरों को सुरक्षित पकड़ने के लिए बहुत जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।