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Pratapgarh Police Controversy: प्रतापगढ़ में एसओ ने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लिए महिला को जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से पुलिस का एक बेहद अमानवीय और संवेदनहीन चेहरा सामने आया है. यहां कंधई थाना प्रभारी (थानाध्यक्ष) ने एक दुधमुंहे बच्चे को गोद में लिए महिला को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया. इस पूरी घटना का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिस वक्त थानाध्यक्ष ने महिला को थप्पड़ मारा, उस वक्त मौके पर महिला पुलिसकर्मी भी ड्यूटी पर मौजूद थीं. दरअसल, यह पूरा विवाद एक पेड़ काटने की घटना को लेकर शुरू हुआ था, जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा था. यह संवेदनशील मामला कंधई थाना इलाके के परानपुर गांव का है.

🌳 परानपुर गांव में विवादित पेड़ काटने पहुंची थी टीम, महिला आरक्षियों की मौजूदगी में हुआ बल प्रयोग

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जिले के कंधई थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले परानपुर गांव में एक विवादित सफेदे (यूकेलिप्टस) का पेड़ काटने के दौरान एसओ कंधई आदित्य सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे. इस पुलिस टीम में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए महिला आरक्षी (महिला सिपाही) भी विशेष रूप से शामिल थीं. इसी दौरान एसओ द्वारा एक स्थानीय महिला को थप्पड़ मारने का वीडियो कैमरे में कैद हो गया जो अब इंटरनेट पर वायरल है. मौके पर महिला आरक्षियों की सक्रिय मौजदूगी के बावजूद पुरुष एसओ द्वारा इस तरह सीधे हाथ उठाने की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

⚔️ क्या था पूरा विवाद? आंधी में गिरे पेड़ के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों में था टकराव

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दिनों आई तेज आंधी की वजह से गांव में यूकेलिप्टस का एक बड़ा पेड़ अचानक गिर गया था, जिसके चलते गांव का मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था. इस गिरे हुए पेड़ के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर गांव के दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. मंगलवार को एसओ आदित्य सिंह पुलिस बल, महिला आरक्षियों व राजस्व (लेखापाल) की टीम के साथ मौके पर स्थिति को सुलझाने पहुंचे थे. राजस्व टीम की मौजूदगी में जैसे ही पेड़ को रास्ते से हटाने के लिए आरा चलाया गया, तभी विरोध स्वरूप एक पक्ष की कुछ महिलाएं आरा रोकने और काम बंद कराने के लिए अचानक आगे बढ़ीं. वायरल वीडियो में इसी धक्का-मुक्की के बीच एसओ एक महिला को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं.

⚖️ एसओ ने आरोपों को किया खारिज, लेकिन सुप्रीम कोर्ट और NHRC की गाइडलाइंस के उल्लंघन का आरोप

इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए एसओ आदित्य सिंह ने थप्पड़ मारने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि महिलाएं अचानक चल रहे कंक्रीट/लकड़ी काटने वाले आरे की तरफ तेजी से दौड़ पड़ी थीं, जिससे कोई बड़ा हादसा हो सकता था; इसी संभावित हादसे को रोकने और महिलाओं को सुरक्षित दूरी पर हटाने के लिए उन्हें पीछे धकेला गया था.

दूसरी ओर, इस मामले में कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन बेहद सख्त और साफ हैं. नियमानुसार, किसी भी महिला से जुड़ी प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई में केवल महिला पुलिसकर्मी ही बल प्रयोग या धरपकड़ कर सकती हैं. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के नियम भी यही कहते हैं कि महिला पुलिस की मौजूदगी में कोई भी पुरुष अधिकारी किसी महिला पर सीधे बल प्रयोग नहीं कर सकता. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि थप्पड़ मारना किसी भी सूरत में “न्यूनतम बल” (Minimum Force) की श्रेणी में नहीं आता है. अगर मौके पर महिला सिपाही तैनात थीं, तो प्रदर्शनकारी महिलाओं को हटाने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की थी. ऐसे में पुरुष एसओ का सीधे हस्तक्षेप करना पूरी तरह से विभागीय नियमों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है.