ब्रेकिंग
Indian Navy Power: भारतीय नौसेना में एक साथ शामिल हुए INS दूनागिरी, INS अग्रे और INS संशोधक; पीएम मो... TMC and Shiv Sena Crisis: टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत; बीजेपी पर लगे आरोप, नेतृत्व संकट पर ... Maharashtra Politics: संजय देशमुख के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का वाशिम दौरा; पार्टी ... Veena T ED Summons: केरल के पूर्व सीएम की बेटी वीना टी की बढ़ी मुश्किलें; मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED... Ayodhya Ram Mandir Controversy: दान गबन मामले पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान; पूछा- अब तक FIR क्यों ... Khunti Encounter News: खूंटी में पुलिस और PLFI उग्रवादियों के बीच मुठभेड़; टॉप कमांडर श्रवण दास गिरफ... Nuh Encounter News: नूंह में पुलिस और पशु-तस्करों के बीच मुठभेड़; जवाबी फायरिंग में एक तस्कर घायल, क... Deoria Tragic Incident: फादर्स डे से ठीक पहले पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत; रेलवे ट्रैक पर सुसाइड करने ... Heartbreaking Father-Son Death: देवरिया में ट्रेन के सामने कटकर पिता-पुत्र ने तोड़ा दम; बचाने की कोश... NEET Re-Exam Bareilly: नीट पुनर्परीक्षा के दौरान छात्रा की बिगड़ी तबीयत; परीक्षा केंद्र पर बेहोश होक...

पत्रकारिता में भरपूर पैसा, सम्मान और पावर…मीडिया क्षेत्र में नाम के साथ पैसा भी,नए जमाने का यंग मीडिया

ऑनलाइन जर्नलिज्म, वेब आधारित पत्रकारिता है। इसे नए जमाने की पत्रकारिता भी कह सकते हैं। प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्रोनिक मीडिया की अपेक्षा यह पत्रकारिता तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हालांकि इन दोनों पत्रकारिता के लक्ष्य तो समान हैं, लेकिन तरीका, उपकरण अलग-अलग हैं। ऑनलाइन पत्रकारिता को डिजीटल पत्रकारिता भी कह सकते हैं। डिजीटल पत्रकारिता में सभी प्रकार की न्यूज, फीचर एवं रिर्पोट संपादकीय सामग्री आदि को इंटरनेट के जरिए वितरित किया जाता है। इसमें सामग्री को ऑडियो और वीडियो के रूप में प्रसारित किया जाता है। इसमें सामग्री को नवीन नेटवर्किंग तकनीकी के सहयोग से प्रसारित करते हैं।

इस पत्रकारिता में पारंपरिक पत्रकारिता की तुलना में प्रयोग की संभावनाएं अधिक हैं। वेब जर्नलिज्म में दर्शक को क्या पढ़ना है, यह उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। वह कुछ भी कहीं से भी पढ़ सकता है, जबकि पारंपरिक पत्रकारिता में पाठक की इच्छा के बजाए संपादक की इच्छा पर पठन सामग्री निर्भर करती है। इसमें कुछ सेकंेंड़ों में ही विश्व में घटित किसी भी घटना पर त्वरित रिर्पोटिंग संभव है और उसका प्रसारण भी त्वरित सारांश के तौर पर ही होता है। जबकि प्रिंट पत्रकारिता में इसे 24 घंटे का समय पाठक तक पहुंचने में लगता है। डिजीटल पत्रकारिता में तो लेखक और पाठक की त्वरित टिप्पणी संभव होती है और सुधार की संभावनाएं भी बहुत तीव्र होती हैं।

कई समाचार पत्र और समाचार चैनलों ने अपनी वेबसाइट लांच कर दी हैं। वे प्रतिस्पर्धा के तौर पर त्वरित ही किसी भी समाचार का वेबसाइट पर प्रसारण करते हैं और उसका अपडेशन भी करते रहते हैं। डिजीटल पत्रकारिता में खबरों को तोड़-मरोड़ कर रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। साथ ही इसमें विज्ञापन को भी पाठक रोचक ढंग से पढ़ सकते हैं।

डिजीटल पत्रकारिता का प्रारंभ

1970 में ब्रिटेन में ‘टेलीटेक्स्ट’ के माध्यम से डिजीटल पत्रकारिता अपने वजूद में आई। ‘टेलीटेक्सट’ एक ऐसी प्रणाली है जिसमें कोई भी जानकारी तुरंत व संक्षिप्त रूप में दे दी जाती है। यह प्रणाली भी वर्तमान में डिजीटल पत्रकारिता के समान ही है। ‘टेलीटेक्स्ट’ के अविष्कार के बाद ही वीडियो टेक्स्ट का अविष्कार किया गया। 1979 में इसे व्यवसायिक रूप से लांच किया गया था, जिसमें अनेक बिट्रिश अखबारों की कहानियों को ऑनलाइन प्रकाशित किया लेकिन 1986 में यह किन्हीं कारणों से बंद हो गया। इसी प्रकार 1981 में नाइट रीडर ने ‘व्युतटॉन’ के वीडियो टैक्सट सेवा की शुरूआत की और यह भी बंद हो गई। फिर कंप्यूटर बुलेटिन बोर्ड सिस्टम आया और 1990 में बीबीसी सॉफ्टवेयर, टेलीफोन मॉडेम की सहायता से ऑनलाइन समाचार सेवा की शुरूआत की। इसी साल विभिन्न समाचार पत्रों ने अपनी समाचार वेबसाइट शुरू कर दी। ‘नन्दो वर्ल्ड वाइड वेब’ पर सबसे पहले गंभीर प्रकार के समाचारों को प्रसारित (स्टीवएल) किया जाता था। इसी दौर में ऑनलाइन डिजिटल पत्रकारिता में तेज वृद्धि हुई।

प्रथम वाणिज्यिक सेवा ‘वेब ब्राउजर’ है। नेटस्केप नेविगेटर व इंटरनेट एक्सप्लोरर पर समाचार ऑनलाइन ही उपलब्ध रहते हैं और इन ऑनलाइन सेवा में समाचार सामग्री जैसे वीडियो ऑडियो टेक्स्ट आदि के रूप में प्रसारित की जाती थी। इस डिजिटल प्रारूप में दिन भर के समाचारों के लिए उपभोक्ता (यूजर) और पत्रकारों के मध्य संपर्क में रहता था। ये ‘संपर्क यूजर पत्रकार इंटरेक्शन बोर्ड’ पर होता था। इसके बाद ए ओ एल, याहू जैसे पोर्टलों ने विभिन्न समाचार वेबसाइटों से न्यूज के लिंक को एकत्र किया और विभिन्न न्यूज एजेंसियों तक इन सभी सामग्रियों को डिजीटल तौर पर उपलब्ध कराया। इसके बाद सन् 1995 मंे ‘सैलून’ की शुरूआत हुई। कंप्यूटर का अविष्कार तो 19वीं शताब्दी में हो चुका था। लेकिन इस समय कंप्यूटर के अन्य प्रारूप जैसे डेस्कटॉप और लैपटॉप और पामटाप के अविष्कार के बाद और दूरसंचार आधारित टेलीकॉम सेवा के सस्तहोने के कारण अधिकत्तर लोगों तक कंप्यूटर और मोबाइल की पहुंच हो गई। जिस कारण ऑनलाइन खबरों को जानने और पढ़ने में लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ने लगी। जिस कारण ऑनलाइन जर्नलिज्म या डिजीटल पत्रकारिता ने भी गति पकड़ ली।

2008 मे अमेरिका ने तो सभी प्रकार के समाचारों को इंटरनेट के माध्यम से ही प्रसारित किया। यहां पर युवा समाचारों को डिजीटल रूप में ही पढ़ना पसंद करने लगें। इस कारण विभिन्न समाचार पत्रों ने चैनलों ने अपनी वेबसाइट आदि का निर्माण भी तेज कर दिया। इसलिए दर्शक ही नहीं बल्कि पत्रकार भी इंटरनेट का प्रयोग करने लगें तो वेबसाइट एवं डिजिटल मीडिया में तेजी से वृद्धि होने लगी।

पीयू रिसर्च सेंटर की रिर्पोट के अनुसार 18 से 29 वर्ष की आयु के 65 प्रतिशत युवा तो अधिकत्तर समाचारों को इंटरनेट के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं। क्योंकि नवीन समाचार पत्रों की साइटों के लांच होने के कारण, पारंपरिक समाचार संगठनों द्वारा भी ऑनलाइन समाचार में निरंतर निवेश किया जाने लगा जिससे इंटरनेट पर दर्शकों की संख्या भी बढ़ने लगी। ऑनलाइन न्यूज मीडिया उत्पादन का सबसे व्यापक रूप बनकर उभर रहा है। इसमें समाचार साइटों के अतिरिक्त डिजिटल पत्रकारिता इंडेक्स और मूल सामग्री को उत्पादित करने वाली साइट्स, साइटों के लिंक, मेटा और टिप्पणी, चर्चा करने वाली साइट्स, शेयर साइट्स, ब्लॉग्स, निजी साइट भी शामिल हैं। जिसमें करोड़ों दर्शक प्रत्यक्ष तौर पर उनसे कनैक्ट हो सकते हैं।

ऑनलाइन समाचारों के वितरण के लिए संगठन

ऑनलाइन समाचार को वितरित करने के लिए देश में अनेक संगठन कार्य कर रहे है। जिनका कार्य डिजिटल पत्रकारिता के लिए समाचारों को एकत्र करना एवं विभिन्न ऑनलाइन मीडिया में भेजना है। 1999 में ‘ऑनलाइन न्यूज एसोसिएशन’ की स्थापना हुई, यह संगठन ऑनलाइन पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें 1700 से अधिक सदस्य हैं। इनका कार्य डिजिटल प्रस्तुति के लिए समाचारों को एकत्र करना है। इसके अतिरिक्त अन्य मीडिया में अनेक समाचार संगठन भी हैं, जो ऑनलाइन समाचारों को वितरित करते हैं। जबकि कुछ समाचार संगठन तो माध्यमिक आउटलेट के रूप में वेब का भी उपयोग करते हैं।

डिजिटल पत्रकारिता का दूरगामी प्रभाव

डिजिटल पत्रकारिता तो अन्य पारंपरिक समाचार संगठनों को चुनौती दे रही है। इस मीडिया में दर्शक की रूचि अनुरूप ही विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं, जिससे पाठक इन्हें रोचक ढंग से पढ़ सकते हैं। इन वेबसाइट पर वर्गीकृत विज्ञापन (क्लासीफाइड एड) कम ही होते हैं। क्योंकि ये वर्गीकृत विज्ञापन तो भौगोलिक सीमा में या विभिन्न संस्करणों में प्रकाशित होते हैं, जो कि इसमें संभव नहीं है। हालांकि पूर्व में इन पर विज्ञापन देने की कोई निर्धारित नीति नहीं थी लेकिन अब इस मीडिया में भी विज्ञापन देने के लिए सीमा व शुल्क निर्धारित कर दिए गए हैं। साथ ही प्रिंट मीडिया के समान इनका सर्कुलेशन वितरण भी नहीं होता है।

डिजिटल पत्रकारिता का दूसरा पहलू यह भी है कि पाठक अब इस मीडिया पर समाचारों को कम कीमत में प्राप्त कर लेता है। जबकि अन्य किसी भी मीडिया (जैसे समाचार पत्र, मैग्जीन या अन्य किसी न्यूज चैनल) से समाचार जानने के लिए उसे ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ता है। डिजिटल पत्रकारिता के कारण समाचार पत्र उद्योग एवं विज्ञापन बिक्री नीति व व्यवसायिक मॉडल, प्रकाशन उद्योग, वितरण एवं सर्कुलेशन पर बहुत अधिक प्रभाव भी पड़ा है। लेकिन इसका भविष्य अभी चिंतनीय है क्योंकि डिजिटल पत्रकारिता की लोकप्रियता के कारण भविष्य में बडे़ शहरों में समाचार पत्र नहीं होंगे या कम संख्या में होंगे या फिर समाचार-पत्र अन्य समाचार-पत्रों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से उन्हें प्रकाशित करेंगे, विभिन्न संस्करण भी समाप्त हों जाएंगे या फिर अन्य किसी व्यवसाय के साथ मिलकर समाचार पत्रों को निकाला जाएगा।

भारतीय भाषा में ऑनलाइन खबर

भारत में 2000 से ऑनलाइन संस्करण में तेजी से दिखाई देने लगी। विभिन्न समाचार-पत्र, पत्रिकाएं एवं पब्लिकेशन हाउस ने अपने ऑनलाइन पब्लिकेशन शुरू कर दिए। भारत में अधिकत्तर ऑनलाइन समाचार हिंदी भाषा में उपलब्ध हैं। इस समय भारतीय भाषाओं में करीब दस करोड़ साठ लाख प्रयोक्ता इंटरनेट केे जरिए खबर को पढ़ते हैं। एक अनुमान के मुताबिक आगामी पांच साल में 2021 में यह संख्या बढ़कर अठ्ठाइस करोड़ चालीस लाख होने की उम्मीद है। यानि कुल मिलाकर सोशल मीडिया, फेसबुक, टिव्टर समेत तमाम इंटरनेट प्लेटफार्म पर हिंदी भाषा का महत्व बढ़ने लगेगा।

डिजिटल पत्रकारिता में स्किल्ड प्रोफेशनल की कमी

गौरतलब है कि पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा बना सोशल मीडिया अभी भी बड़े विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता पाठयक्रम में शामिल नहीं है। विद्यार्थी पारंपरिक पत्रकारिता की पढ़ाई तो कर लेते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं सिखाया जाता कि कैसे 140 शब्दों में अपनी बातों को व्यक्त कर दिया जाए, इसके अतिरिक्त संस्थागत पाठ्यक्रम में इन्हें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि अनेक कंपनियां तो विज्ञापन भी सोशल मीडिया पर दे रही हैं, लेकिन इन्हें ऐसे लोगों की आवश्यकता है कि वे टिव्टर, फेसबुक पर समाचार और विज्ञापन को व्यक्त कर सकें। प्रथम समाचार पत्र उदंड मार्तंड के बारे में तो बताना जितना जरूरी है उतना ही आवश्यक सोशल मीडिया पर समाचार लेखन व उसका प्रस्तुतिकरण है।

मुद्रित पत्रकारिता के साथ ऑनलाइन पत्रकारिता या डिजिटल पत्रकारिता भी नितांत आवश्यक है। हालांकि भारत में इस क्षेत्र में कैरियर की संभावनाएं तो बहुत हैं, क्योंकि अधिकत्तर समाचार पत्र, पत्रिका सभी डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध हैं। लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में स्किल्ड प्रोफेशनल की कमी दिखाई दे रही है। इसका प्रमुख कारण निर्धारित पाठ्यक्रम का न होना है।

हालांकि इंटरनेट ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है जो इसके साथ नहीं चल रहा है, उसके विकास पर ही नहीं बल्कि अस्तित्व पर भी संकट खड़ा होने लगा है। इसलिए डिजिटल होी पत्रकारिता का ऑनलाइन प्रारूप अति आवश्यक है। इसका वर्तमान ही नहीं बल्कि भविष्य भी उज्जवल है।