Haryana Vehicle Registration Boom: हरियाणा की सड़कों पर दौड़ पड़े 46 लाख से ज्यादा नए वाहन, गुरुग्राम और फरीदाबाद सबसे आगे
चंडीगढ़: हरियाणा राज्य के भीतर आधुनिक परिवहन के साधनों और गाड़ियों की मांग में जबरदस्त और लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। समाज में तेजी से बदलते रहन-सहन यानी एकल परिवारों की बढ़ती संख्या, बैंकिंग संस्थानों से बेहद आसान शर्तों और कम ब्याज दरों पर मिलने वाले वाहन ऋण (ऑटो लोन), तथा सार्वजनिक परिवहन के साधनों के मुकाबले अपने निजी वाहन से सफर करने की प्राथमिकता इसके मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों की अवधि के दौरान पूरे हरियाणा प्रदेश में कुल 46 लाख से ज्यादा नए वाहनों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया जा चुका है। राज्य की सड़कों पर लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच इसके सकारात्मक असर के रूप में सरकार के राजस्व में भी भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है, और प्रदेश में हर महीने औसतन करीब 93 हजार नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं, जिनमें लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी विभिन्न व्यावसायिक वाहनों की है।
वर्ष 2026 में अक्टूबर माह पूरा होने से पहले ही 9.49 लाख नए वाहन हुए पंजीकृत, टूटने वाले हैं पिछले सारे रिकॉर्ड
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2026 में अक्टूबर का महीना पूरा होने से पहले ही प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 9,49,393 नए वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि यानी अक्टूबर के अंत तक यह आंकड़ा लगभग 9.20 लाख के आसपास था, जिससे स्पष्ट होता है कि इस बार अक्टूबर के भीतर ही पिछले साल का रिकॉर्ड पीछे छूट गया है। चालू वर्ष के बचे हुए शेष दो महीनों के दौरान लगभग दो लाख और नए वाहनों के सड़कों पर उतरने की पूरी संभावना जताई जा रही है। यदि वाहनों की बिक्री की यही तेज रफ्तार बरकरार रहती है, तो वर्ष 2026 के अंत तक वाहन पंजीकरण की कुल वार्षिक वृद्धि दर 10 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है। आपको बता दें कि वर्ष 2025 के दौरान कुल 10,81,113 वाहनों का पंजीकरण हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 9,96,162, वर्ष 2023 में 8,35,626 और वर्ष 2022 में 7,39,412 दर्ज की गई थी।
वाहन खरीद के मामले में गुरुग्राम और फरीदाबाद सबसे आगे, औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में है सबसे अधिक मांग
नए खरीदे जाने वाले वाहनों के पंजीकरण के मामलों में मिलेजुले रुझानों के अनुसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद जिले पूरे प्रदेश में सबसे आगे बने हुए हैं। वर्ष 2026 के दौरान अब तक आरटीए कोड के तहत एचआर-23 गुरुग्राम में 83,429 और एचआर-51 फरीदाबाद में 41,210 नए वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। इसके बाद औद्योगिक व व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य क्षेत्रों में एचआर-6 पानीपत के अंतर्गत 32,504, एचआर-29 बल्लभगढ़ में 25,380 और एचआर-2 जगाधरी में 17,631 वाहन दर्ज किए गए हैं। स्पष्ट है कि जिन जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेज हैं, शहरी विस्तार बड़े पैमाने पर हो रहा है और आबादी का घनत्व अधिक है, वहां निजी और व्यावसायिक दोनों प्रकार के वाहनों की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है।
एकल परिवारों का बढ़ता चलन और आसान फाइनेंसिंग बनी गाड़ियों की बंपर बिक्री का मुख्य कारण
हरियाणा में निजी गाड़ियों की मांग में हो रही इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े और अहम सामाजिक-आर्थिक कारण छिपे हुए हैं। पहला कारण यह है कि संयुक्त परिवार प्रणाली की जगह अब एकल (न्यूक्लियर) परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते अलग-अलग परिवारों को अपने रोजमर्रा के दफ्तर और घरेलू कामकाज के आवागमन के लिए स्वतंत्र रूप से अलग वाहन की आवश्यकता महसूस होती है। दूसरा बड़ा कारण विभिन्न बैंकों और वित्तीय कंपनियों द्वारा बेहद आसान शर्तों पर आसानी से वाहन ऋण उपलब्ध कराना है, जिससे लोग एकमुश्त बड़ी नकदी खर्च किए बिना भी अपनी पसंद की गाड़ी घर ले आ रहे हैं। इसके अलावा तीसरा कारण सार्वजनिक बसों या किराये के वाहनों पर बार-बार होने वाला बढ़ता खर्च है, जिससे बचने के लिए लोग खुद का वाहन रखना अधिक किफायती और सुविधाजनक मानते हैं।
वाहनों की रिकॉर्ड खरीद से सरकारी खजाने में हो रही है करोड़ों रुपये की बंपर आमदनी
प्रदेश की सड़कों पर लगातार दौड़ते नए वाहनों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव हरियाणा सरकार के राजस्व (राजस्व संग्रह) पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल वाहन पंजीकरण के माध्यम से वर्ष 2022 में 32,41,51,82,863 रुपये, वर्ष 2023 में 39,50,10,02,169 रुपये, वर्ष 2024 में 43,87,36,56,590 रुपये और वर्ष 2025 में बढ़कर 45,89,52,27,726 रुपये का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हुआ था। चालू वर्ष 2026 में अब तक यह आंकड़ा 39,34,40,40,822 रुपये तक पहुंच चुका है। इस प्रकार लगातार बढ़ती वाहनों की यह खरीद राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।