ब्रेकिंग
Ranchi Crime News: लोअर बाजार थाना क्षेत्र में प्रोफेसर के घर काम करने वाली नाबालिग लड़की की संदिग्ध... Palamu News: मेदिनीनगर में दो महिलाओं और नवजात की मौत के बाद बड़ा एक्शन, लापरवाही पर प्राइवेट हॉस्पि... Babulal Marandi Statement: झारखंड में बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी बोले- राहुल गांधी और उनके समर्थक है... झारखंड के 19 लाख किसानों के खाते में पहुंचे 300 करोड़ रुपये, पीएम मोदी ने जारी की सम्मान निधि की किस... Ranchi Pithoria Crime News: होटल मैनेजर बालेश्वर गोराई की धारदार हथियार से निर्मम हत्या, शव मिलने से... झारखंड के दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चों का मुफ्त इलाज करेगी हेमंत सरकार, 10 लाख तक का खर्च उठाएगी स... Hazaribagh Hotel Firing News: हजारीबाग के होटल एके इंटरनेशनल में ताबड़तोड़ फायरिंग, अपराधियों ने चला... रेलवे में नौकरी और कन्फर्म टिकट का झांसा देकर ठगी करने वालों के खिलाफ धनबाद रेलवे स्टेशन पर सतर्कता ... Hazaribagh News: जल जीवन मिशन में लापरवाही पर भड़के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, संवेदकों को दी कड़ी चेता... Janjgir Champa News: नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की मांग, ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से कराए जाएं चुनाव; ...

Jagdalpur News: बस्तर में छात्रावास अधीक्षक संघ की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासनिक अमले के बीच खलबली मच गई है। छात्रावास अधीक्षक संघ ने अपनी प्रमुख पांच सूत्रीय मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का आयोजन किया। इस दौरान संघ के बैनर तले तमाम सदस्यों ने विभागीय सचिव के नाम एक कड़ा ज्ञापन बस्तर कलेक्टर को सौंपा, जिसमें स्पष्ट रूप से यह अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया, तो वे आगामी 12 नवंबर को अनिश्चितकालीन और उग्र आंदोलन करने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष पल्लव झा ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि विभाग की मंशानुरूप ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज करने और डिजिटल पंजी अपलोड करने की प्रक्रिया से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने में जो व्यावहारिक परेशानियां आ रही हैं, वे उनका कड़ा विरोध करते हैं।

विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं और सेवा शर्तों से जूझ रहे अधीक्षक, 12 साल बाद भी नहीं हुआ नियमों का निर्धारण

प्रदर्शन कर रहे छात्रावास अधीक्षक संघ का कहना है कि वे इन दिनों कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनमें बच्चों का 30 दिवसीय मेडिकल लीव, दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या, बुनियादी संसाधनों की कमी, तथा सामूहिक व्यवस्था पर संचालित होने वाले मेस से जुड़ी दिक्कतें प्रमुख हैं। मेस संचालन के नियमों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी दिन पांच बच्चे अनुपस्थित रहते हैं, तो उसके आधार पर ईंधन या राशन कम नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, नियुक्ति के पूरे 12 साल बीत जाने के बाद भी विभाग आज तक सेवा शर्तों (अवकाश, कार्य अवधि और दायित्वों) का स्पष्ट निर्धारण करने में पूरी तरह असमर्थ रहा है। चौबीस घंटे छात्रावास परिसर में ही मौजूद रहने के कारण उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन लगभग समाप्त हो चुका है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कर्मचारी छात्रावास अधीक्षक के पद पर ही भर्ती होते हैं और इसी पद से सेवानिवृत्त भी हो जाते हैं, जबकि अन्य सरकारी विभागों में समय पर पदोन्नति (प्रमोशन) की सुचारू प्रक्रिया लागू है।

महिला अधीक्षकों ने पारिवारिक दायित्वों और आवास सुरक्षा का दिया हवाला, संतुलन बैठाने में हो रही है भारी परेशानी

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला सचिव रामेश्वरी साहू ने महिला अधीक्षकों की पीड़ा बयां करते हुए कहा कि कार्य के दौरान महिला कर्मचारियों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। महिला अधीक्षकों को अनिवार्य रूप से छात्रावास परिसर में ही निवास करना होता है, जिसके चलते कई बार पारिवारिक और सामाजिक दृष्टिकोड से असहज परिस्थितियां बनती हैं और वे अपने पिता, पति या बच्चों के प्रति अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पाती हैं। काम के अत्यधिक दबाव के कारण निजी जीवन और आधिकारिक जीवन के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है। इसीलिए संघ की यह मुख्य मांग है कि अधीक्षकों का आवासीय कक्ष परिसर के भीतर ऐसा हो, जिसमें सीसीटीवी कैमरे लगे हों और मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह से अलग हो, ताकि परिवार की सुरक्षा और अधीक्षक के आधिकारिक कर्तव्यों दोनों का सुचारू रूप से पालन किया जा सके।

संघ की प्रमुख पांच मांगें, जिन पर प्रशासन और सरकार से की जा रही है त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

छात्रावास अधीक्षक संघ द्वारा शासन के समक्ष रखी गई मुख्य पांच मांगें निम्नलिखित हैं:

  • छात्रावास अधीक्षकों के लिए स्पष्ट सेवा शर्तों का निर्धारण किया जाए।

  • अधीक्षक संवर्ग का व्यवस्थित तरीके से कैडर पुनर्गठन किया जाए।

  • शिक्षक संवर्ग के रूप में प्रभावी रूप से काम कर रहे अधीक्षकों को VSK ऐप के माध्यम से हर वक्त ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता से छूट दी जाए।

  • ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जाएं तथा मेस राशि में की जाने वाली अनुचित कटौतियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

  • प्रदेश के सभी छात्रावासों के सुचारू संचालन हेतु पर्याप्त बजट आवंटन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।