ब्रेकिंग
Bhiwani Murder Case: भिवानी में आटा चक्की संचालक की सनसनीखेज हत्या, लिव-इन पार्टनर ने प्रेमी और पिता... Faridabad DJ Operators Protest: शादियों में डीजे बैन के खिलाफ उतरे डीजे संचालक, महापंचायत में रखी रो... Kurukshetra Road Accident: पिहोवा में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार की टक्कर से मौलाना आजाद मेड... Panchkula Ravan Effigy Controversy: पंचकूला में दशहरे से पहले रावण के पुतले बनाने को लेकर बड़ा विवाद... Amit Jani Threatened in Sonipat: फिल्म निर्माता अमित जानी पर हमले की कोशिश, वैष्णो देवी से लौटते समय... Rohtak Crime News: रोहतक में चार साल की बच्ची से तीन बार हुआ यौन उत्पीड़न, सगे पिता और मां गिरफ्तार Haryana Agniveer Job Reservation: हरियाणा में पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी का ऐलान, ग्रुप-सी... Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में कोटा से तीन संदिग्ध शूटर गिरफ्तार, हरियाणा औ... Karnal Sarpanch Suspended: करनाल में वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप में हसनपुर की सरपंच मंजू रानी ... Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में राजस्थान के कोटा से तीनों शूटर गिरफ्तार

Rajnath Singh Article: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का विपक्ष पर बड़ा हमला, ‘पोस्ट-ट्रुथ’ राजनीति और दुष्प्रचार पर उठाए सवाल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेताओं पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर विवाद, गलत जानकारी और झूठे आरोपों के जरिए अफरा-तफरी पैदा कर रहे हैं. समाचार पत्र के लिए लिखे अपने लेख में सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि झूठ का मुकाबला करना और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा बहाल करना बेहद जरूरी है.

राजनाथ सिंह ने लिखा, ‘कहा जाता है कि युद्ध में अक्सर सबसे पहले सच की ही बलि चढ़ती है. राजनीतिक मुकाबलों में भी यह बात तेजी से सच साबित हो रही है, जहां ‘पोस्ट-ट्रुथ’ (सत्य-बाद की) राजनीति सार्वजनिक विमर्श का एक अहम पहलू बनती जा रही है’. उन्होंने लिखा कि ‘पोस्ट-ट्रुथ’ के इस दौर में झूठा प्रचार, तोड़-मरोड़ कर पेश की गई बातें और तर्कहीन भावनात्मक अपीलें अक्सर ठोस तथ्यों और पुख्ता सबूतों पर हावी हो जाती हैं, जहां तार्किक बहस की जगह भड़काऊ बयानबाजी ले लेती है.

📉 ‘भ्रमित करने के लिए गलत सूचनाओं का अभियान’: संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रहार

कभी मुख्य रूप से अकादमिक चर्चाओं का विषय रहा ‘पोस्ट-ट्रुथ’ अब रोजमर्रा की राजनीति का हिस्सा बन गया है. लोगों को भ्रमित करने के लिए चलाए जा रहे गलत सूचनाओं के अभियान न केवल जनमत को प्रभावित करने के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कम करने के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. उन्होंने लिखा कि आरोपों को बार-बार दोहराया और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, भले ही उन्हें साबित करने के लिए कोई सबूत मौजूद न हो.

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की राजनीतिक चर्चा भी इस प्रवृत्ति से अछूती नहीं है. विपक्ष के कुछ धड़े लगातार जानबूझकर आक्रोश पैदा कर रहे हैं, दुष्प्रचार फैला रहे हैं और अराजकता फैलाने के लिए गलत सूचनाओं का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे अपने स्वार्थी राजनीतिक लक्ष्यों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रख रहे हैं.

🗳️ EVM, SIR और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता: विपक्ष के तीन बड़े मुद्दों पर राजनाथ सिंह की दो-टूक

रक्षा मंत्री ने अपने लेख में विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे तीन प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया—पहला, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) में हेरफेर के आरोप; दूसरा, मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) से जुड़ा विवाद; और तीसरा, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें.

  • EVM पर: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ मामले में सभी संदेहों को दूर कर दिया था और पेपर बैलेट पर लौटने की मांग को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि बिना किसी ठोस सबूत के केवल शक के आधार पर बार-बार सवाल उठाना निंदनीय है, लेकिन विपक्ष इसके बावजूद झूठ दोहराने से बाज नहीं आ रहा है.

  • SIR पर: मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर खड़ा किया गया विवाद इस बात का उदाहरण है कि कैसे कुछ लोग अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए एक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं.

  • चुनाव आयोग पर: मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद और ECI को बदनाम करने के लिए निरंतर अभियान चलाया गया है. राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के शासनकाल और आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि तब संवैधानिक संशोधनों और संस्थाओं का किस तरह दुरुपयोग किया गया था, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में संविधान और न्यायिक फैसलों के प्रति पूरा सम्मान दिखाया गया है.

⚖️ ‘असहमति झूठ पर आधारित नहीं होनी चाहिए’: डॉ. अंबेडकर के ‘अराजकता के व्याकरण’ का किया जिक्र

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस लेख का उद्देश्य विपक्ष की आलोचना करना नहीं है, क्योंकि असहमति लोकतंत्र की प्राण-वायु है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि झूठ फैलाने या जन-विश्वास पर द्वेषपूर्ण हमले करने की छूट मिल जाए. उन्होंने कहा कि जब संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों पर लोगों ने चिंता जताई थी, तो सरकार ने व्यापक जनहित में उन कानूनों को वापस भी ले लिया था.

अपने लेख के आखिर में राजनाथ सिंह ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए प्रसिद्ध भाषण ‘अराजकता का व्याकरण’ (Grammar of Anarchy) का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को इसे पढ़ना चाहिए और लोकतंत्र में ‘असहमति’ और ‘अराजकता’ के बीच के महत्वपूर्ण अंतर को समझना चाहिए.