NHAI Projects in Jharkhand: झारखंड में नेशनल हाईवे का विकास, पलमा-गुमला फोरलेन शुरू और छत्तीसगढ़ सीमा तक ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तेज
रांची: झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के विकास को एक नई और तेज गति मिल रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं से गुमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में आवागमन बेहद आसान होने के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है। पलमा से गुमला तक NH-43 के लगभग 63.17 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और इस पर वाहनों का आवागमन भी शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही, झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से गुमला के भरदा तक 32.37 किलोमीटर लंबे फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण कार्य भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
💰 पलमा-गुमला फोरलेन तैयार, करीब 1908 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय, रांची के अंतर्गत पलमा-गुमला फोरलेन परियोजना का निर्माण एनएच-43 के किलोमीटर 26 से किलोमीटर 89.170 तक किया गया है। लगभग 63.17 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण परियोजना पर सिविल निर्माण लागत और निर्माण-पूर्व व्यय को मिलाकर कुल 1,908.43 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई है। निर्माण कार्य मुकम्मल होने के बाद इस मार्ग पर यातायात विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना का आधिकारिक पूर्णता प्रमाण-पत्र 31 जनवरी 2027 तक जारी किए जाने की पूरी संभावना जताई गई है।
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व्यापार और रोजगार को बढ़ावा: एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी संतोष कुमार आर्य ने कहा कि यह फोरलेन परियोजना झारखंड में सड़क अवसंरचना (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों का सफर सुगम होने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा कृषि उत्पादों, औद्योगिक कच्चे माल और अन्य जरूरी वस्तुओं की ढुलाई आसान होने से स्थानीय कारोबारियों को भी सीधा फायदा पहुँचेगा।
🌿 छत्तीसगढ़ सीमा से गुमला तक बनेगा नया ग्रीनफील्ड हाईवे
पलमा-गुमला फोरलेन की सफलता के बाद अब झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से गुमला के भरदा तक एक नए फोरलेन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। एनएच-43 के किलोमीटर 0 से किलोमीटर 32.370 तक बनने वाली इस आधुनिक सड़क पर लगभग 869.58 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इस परियोजना का निर्माण कार्य 18 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसे निर्धारित समयानुसार लगभग 730 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार लेन की मुख्य सड़क के अलावा 15 पुल, 22 ग्रेड-सेपरेटेड संरचनाएं, 95 बॉक्स कल्वर्ट, तीन पाइप कल्वर्ट और लगभग 10.08 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा थके हुए यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक विश्राम स्थलों (Rest Areas) का भी विकास किया जा रहा है।
👷 अधिकारियों के विचार और सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर
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विजय कुमार (महाप्रबंधक, NHAI): एनएचएआई के महाप्रबंधक विजय कुमार का कहना है कि यह परियोजना झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच आपसी संपर्क और परिवहन व्यवस्था को बेहद मजबूत करेगी। इससे व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही, स्थानीय उद्योगों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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कुमार गौतम (परियोजना निदेशक, PIU गुमला): एनएचएआई के परियोजना निदेशक कुमार गौतम ने बताया कि पलमा-गुमला खंड पर परिचालन पूरी तरह शुरू हो चुका है, जबकि छत्तीसगढ़ सीमा से भरदा तक निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इन सभी परियोजनाओं में उच्च गुणवत्ता, सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
🌳 सुरक्षा, आपातकालीन सहायता और पर्यावरण संरक्षण के पुख्ता इंतजाम
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सड़क संकेतकों (Signages), क्रैश बैरियर और जंक्शन सुधार जैसे तमाम सुरक्षा उपायों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में राजमार्ग पर यात्रा करने वाले नागरिक 1033 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। जरूरत के मुताबिक एंबुलेंस, पेट्रोलिंग वाहन और क्रेन जैसी त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की पूरी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही एंबुलेंस सेवाओं में जीपीएस (GPS/VTS) तकनीक के इस्तेमाल से कम से कम समय में सहायता पहुँचाने का प्रावधान है।
इसके अलावा सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी इस पूरी परियोजना का एक अहम हिस्सा बनाया गया है। पलमा-गुमला फोरलेन परियोजना के तहत कुल 1,04,250 पौधे लगाने का लक्ष्य है, जिनमें से 26,228 पौधे पहले ही रोपे जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 45,417 पौधों के रोपण के लिए आवश्यक राशि वन विभाग के खाते में जमा की जा चुकी है, और शेष पौधारोपण के लिए भी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इन दोनों परियोजनाओं से न केवल परिवहन सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, बल्कि स्थानीय श्रमिकों और तकनीकी कर्मियों के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुले हैं।