बिहार की राजनीति में हलचल, विधायक अनंत सिंह बोले- जब नीतीश कुछ नहीं थे, तब हमने पार्टी के लिए कुर्बानी दी
बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह के बयानों से इन दिनों बिहार की सियासत में एक अलग ही हलचल मची हुई है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर एक हैरान करने वाला दावा किया है। अनंत सिंह ने कहा कि जब नीतीश कुमार कुछ नहीं थे, तब उन्होंने पार्टी के लिए बड़ी कुर्बानियां दी थीं, और उस संघर्ष के दौरान उनके 9 लोग मारे गए थे।
उन्होंने नीतीश कुमार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैंने पार्टी के लिए अपनी जान की बाजी लगाई है, लेकिन उन्होंने क्या किया है? अनंत सिंह ने आगे कहा, — “पार्टी के साथ कौन है और कौन नहीं है, हम कोई भगवान नहीं हैं। हम सिर्फ अपनी बात जानते हैं। हमको न तो मरने का कोई गम है और न ही जीने की कोई खुशी है। हम पार्टी को अपना मानते हैं, अब पार्टी को जो मानना है वह माने।”
⚔️ जेडीयू से नाराजगी और नीरज कुमार के विरोध की असली वजह
दरअसल, विधायक अनंत सिंह इन दिनों आगामी एमएलसी (MLC) चुनावों को लेकर जेडीयू (JDU) नेतृत्व से खासे नाराज चल रहे हैं। उनकी मुख्य आपत्ति नीरज कुमार को पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर है। हालांकि, पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एमएलसी चुनावों को लेकर अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया है कि, — “मैं प्रचार के लिए जाऊँगा, लोगों से मिलूँगा और उनसे अनुज कुमार को वोट देने की अपील करूँगा। मैं पार्टी में हूँ और वहाँ पूरी तरह मौजूद रहूँगा। जैसे नीरज कुमार पार्टी में हैं, ठीक वैसे ही मैं भी पार्टी का हिस्सा हूँ।”
🤝 प्रशांत किशोर के उम्मीदवार को समर्थन और पुराना इतिहास
जेडीयू विधायक अनंत सिंह और पार्टी के आधिकारिक एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच मतभेद तब खुलकर सामने आए थे जब अनंत सिंह पटना स्नातक सीट के लिए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन दाखिल करने वाले कार्यक्रम में पहुँच गए थे। रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अनुज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि नीरज कुमार जेडीयू के प्रत्याशी हैं, लेकिन इसके बावजूद अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से अनुज कुमार को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया था।
आपको बता दें कि इससे पहले साल 2015 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी अनंत सिंह की नाराजगी खुलकर सामने आई थी, जब नीतीश कुमार की पार्टी द्वारा उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। इसके बाद उन्होंने मोकामा सीट से एक निर्दलीय (स्वतंत्र) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जेडीयू के विरोध के बावजूद इस सीट पर भारी मतों से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की थी।