ब्रेकिंग
Ladakh Pashmina at Fashion Week: चांगथांग समुदाय की मेहनत और पश्मीना की अनूठी कला, दिल्ली के 'द ताज'... Ladakh New District Sankoo: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को मिला एक और नया जिला, सांकू बना आठवां जिला Mahua Moitra Circuit House Case: सुप्रीम कोर्ट ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा को दी राहत, सर्किट हाउस में... CAQM Strict Guidelines Delhi NCR: दिल्ली-NCR की प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों पर शिकंजा, 30 नवंबर त... Amit Kashyap Murder Case: मेरठ के चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में पत्नी और उसके प्रेमी को फांसी की स... Muzaffarnagar Priest Murder Case: बेटा होने की भविष्यवाणी गलत साबित होने पर 81 वर्षीय पुजारी की गोली... Mumbai Goregaon News: मुंबई के गोरेगांव में 18 महीने की मासूम की छठी मंजिल से गिरकर मौत, 10 साल की प... बिहार की राजनीति में हलचल, विधायक अनंत सिंह बोले- जब नीतीश कुछ नहीं थे, तब हमने पार्टी के लिए कुर्बा... Lucknow Shiva Sharma Murder Case: लखनऊ के चर्चित शिवा मर्डर केस में बड़ा खुलासा, नेपाल से वीडियो जार... Naturopathy Treatment: प्राकृतिक चिकित्सा से रोगों का निदान, बिना दवा के स्वस्थ रहने की कला

BIT Mesra Success Story: 400 रुपये हफ्ते से शुरू हुआ सफर, सफाईकर्मी मां की बेटी आरती ने इंजीनियरिंग में पूरी की पीएचडी

राजधानी रांची से एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली सफलता की कहानी सामने आई है। किसी ने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए अपनी जिंदगी के 26 साल कड़े संघर्ष में बिता दिए, तो किसी ने उन्हीं मुश्किलों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखकर एक नई मिसाल कायम कर दिखाई। रांची के तुरुप गांव की रहने वाली आरती कुमारी की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करने वाली है। उनकी मां रानू देवी पिछले 26 वर्षों से बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) संस्थान में सफाईकर्मी के रूप में ईमानदारी से काम कर रही हैं और अब उनकी बेटी आरती ने इसी प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली है।

👩‍🎓 तुरुप गांव की पहली महिला बनीं आरती, मां के त्याग और बेटी की लगन लाई रंग

आरती की यह शानदार उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे तुरुप गांव और समाज के लिए गर्व का विषय है। वह अपने गांव की पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। आरती के लिए यह सफर केवल एक डिग्री पाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे परिवार की आर्थिक तंगी, मां का अंतहीन संघर्ष, खुद की अटूट लगन और बीआईटी मेसरा के शिक्षकों का भरपूर सहयोग शामिल है। संस्थान के दीक्षांत समारोह में उन्हें यह मानद उपाधि प्रदान की गई।

💰 400 रुपये साप्ताहिक वेतन से शुरू हुआ था सफर, मां के संघर्ष ने दी मंजिल

आरती की मां रानू देवी ने जब बीआईटी मेसरा में नौकरी की शुरुआत की थी, तब उन्हें एक सप्ताह के केवल 400 रुपये मिलते थे। पति के निधन के बाद तीनों बच्चों के पालन-पोषण का पूरा बोझ उन्हीं के कंधों पर आ गया था। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी। वर्तमान में उन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। तीन भाई-बहनों में मझली आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक करने के बाद अपना शोध कार्य पूरा किया। इस लंबी यात्रा में मां के त्याग और बेटी के समर्पण ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।