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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक एक्शन: मंत्री कार्यालयों से 550 कर्मचारियों की मूल विभागों में वापसी

मुंबई (महाराष्ट्र): राज्य सरकार के मंत्री कार्यालयों में नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत तैनात किए गए करीब 550 अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है।

कार्यमुक्त किए गए कर्मचारियों में अन्य प्रशासनिक विभागों से प्रतिनियुक्ति या अस्थायी तौर पर लिए गए कर्मी, बाहरी निजी एजेंसियों (आउटसोर्सिंग) के माध्यम से कार्यरत लोग तथा केवल मौखिक आदेशों पर तैनात कर्मचारी शामिल हैं। प्रशासनिक हलकों में दूसरे विभागों से अस्थायी तौर पर बुलाए गए इन कर्मियों को ‘उधार पर लिए गए कर्मचारी’ कहा जाता है। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की अचानक वापसी से राज्य के कई महत्वपूर्ण मंत्री कार्यालयों के दैनिक प्रशासनिक कामकाज पर व्यापक असर पड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

📊 904 स्वीकृत पदों के विपरीत 550 अतिरिक्त कर्मी: CMO की आंतरिक समीक्षा में हुआ खुलासा

प्रशासनिक ढांचा और पदों की स्थिति:

  • अस्थायी पदों का ढांचा: सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के गठन के पश्चात मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के सचिवालयीय कार्यों के लिए अस्थायी पदों का एक वैधानिक ढांचा तय किया जाता है।

  • महायुति सरकार का कोटा: वर्तमान महायुति सरकार ने समस्त मंत्री कार्यालयों के संचालन हेतु कुल 904 अस्थायी पदों की वैधानिक मंजूरी प्रदान की थी।

  • समीक्षा में सामने आई विसंगति: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की गई आंतरिक समीक्षा में यह उजागर हुआ कि 40 मंत्री कार्यालयों में 549 पद ही निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत भरे गए थे, जबकि लगभग 550 कर्मचारी बिना किसी औपचारिक अनुमोदन अथवा निर्धारित प्रक्रिया के विभिन्न माध्यमों से कार्यालयों में पदस्थापित थे।

📜 सामान्य प्रशासन विभाग का कड़ा शासनादेश: 10 सितंबर की तय की गई थी समयसीमा

शासनादेश और निगरानी तंत्र:

  • 25 अगस्त को जारी हुआ आदेश: अनियमित तैनातियों का संज्ञान लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 25 अगस्त को एक कड़ा शासनादेश निर्गत किया था।

  • वेतन रोकने की चेतावनी: इस आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि 10 सितंबर तक अनाधिकृत अथवा प्रक्रिया से इतर तैनात सभी कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में प्रत्यावर्तित किया जाए, अन्यथा उनका मासिक वेतन रोक दिया जाएगा।

  • CMO की सख्त मॉनिटरिंग: मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कार्यकारी अधिकारी (OSD) चंद्रशेखर वझे ने व्यक्तिगत रूप से सभी 40 मंत्री कार्यालयों के मानव संसाधन की स्थिति की निगरानी की। तय समयसीमा समाप्त होते ही नियमों के अनुरूप नियुक्त न पाए गए सभी 550 कर्मियों को कार्यमुक्त कर दिया गया।

📁 अतिरिक्त स्टाफ पर अत्यधिक निर्भरता: फाइलों के निपटारे और विधायी कार्यों पर संकट

मंत्री कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर प्रभाव:

  • स्वीकृत स्टाफ की कमी: मंत्रियों के कार्यालयों का तर्क रहा है कि स्वीकृत पदभार की तुलना में वास्तविक प्रशासनिक कार्यों का दबाव कहीं अधिक रहता है।

  • दैनिक कार्यों की विविधता: विधानसभा सत्र के दौरान तारांकित-अतारांकित प्रश्नों के उत्तर तैयार करना, विभागीय जांच-सुनवाई, प्रशासनिक फाइलों का त्वरित निस्तारण और निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े जनहित के आवेदनों के प्रबंधन के लिए भारी श्रमबल की जरूरत होती है।

  • कामकाज की नई चुनौती: इस व्यवस्था पर पूर्ण रोक लगने के बाद अब मंत्री सचिवालयों को मात्र निर्धारित और स्वीकृत स्टाफ के बलबूते ही फाइलों और जनसमस्याओं का निपटारा करना होगा।

⚡ महायुति के तीनों दलों के कार्यालय प्रभावित: 4 निजी सचिवों पर भी गिरी गाज

राजनीतिक असर और भविष्य की नीति:

  • उपमुख्यमंत्री कार्यालय भी दायरे में: 550 कर्मचारियों की सामूहिक वापसी की गाज सत्ताधारी महायुति गठबंधन के तीनों घटक दलों के मंत्रियों के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री कार्यालयों पर भी पड़ी है।

  • निजी सचिवों का तबादला: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नियमों की अनदेखी के चलते चार प्रमुख मंत्रियों के निजी सचिवों (PS) को भी मंत्री कार्यालय से हटाकर उनके पैतृक विभागों में वापस भेज दिया गया है।

  • नेताओं में असंतोष: अचानक लिए गए इस सख्त फैसले से कई वरिष्ठ मंत्रियों और विधायकों में अंदरूनी असंतोष देखा जा रहा है।

  • सत्यापन के बाद ही नई नियुक्ति: प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में मंत्री कार्यालयों में कोई भी पदस्थापना केवल कठोर पृष्ठभूमि सत्यापन, योग्यता और निर्धारित प्रक्रिया के पालन के उपरांत ही संभव होगी, जिससे नियुक्तियों पर सीएमओ का नियंत्रण और अधिक सुदृढ़ हो गया है।