महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा उलटफेर: अजित पवार की NCP की रणनीति संभालेंगे प्रशांत किशोर? सुनेत्रा पवार संग 5 घंटे चली बैठक
मुंबई (महाराष्ट्र): बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को उपचुनावों में कड़ी चुनौती देने के उपरांत जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) का मुंबई दौरा अब राष्ट्रीय राजनीति में गहन मंथन का केंद्र बन गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार तथा पार्थ पवार के साथ उनके आधिकारिक आवास पर लगभग पांच घंटे तक चली बंद कमरे की मैराथन बैठक ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में नए समीकरणों की अटकलों को हवा दे दी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या प्रशांत किशोर अब महाराष्ट्र में अजित पवार की पार्टी के मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाएंगे और इसका सीधा प्रभाव प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर क्या पड़ेगा?
🤝 ‘देवगिरी’ निवास पर रणनीतिक मंथन, डिजाइन बॉक्स की जगह ले सकते हैं प्रशांत किशोर
गुरुवार को मुंबई स्थित सुनेत्रा पवार के ‘देवगिरी’ निवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार एवं प्रशांत किशोर ही उपस्थित थे।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में महाराष्ट्र की तेजी से बदलती राजनीतिक परिस्थितियों, पार्टी कैडर को सक्रिय करने, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) तथा भविष्य के विधानसभा/लोकसभा चुनावों हेतु सुदृढ़ रणनीति बनाने पर बिंदुवार चर्चा हुई। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रशांत किशोर अब एनसीपी (अजित पवार) के आधिकारिक राजनीतिक सलाहकार का दायित्व संभाल सकते हैं, जो जिम्मेदारी पूर्व में ‘डिजाइन बॉक्स’ के पास थी। यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो यह प्रथम अवसर होगा जब प्रशांत किशोर महाराष्ट्र में ‘महायुति’ के किसी घटक दल के लिए चुनावी बिसात बिछाते नजर आएंगे।
❓ बिहार-यूपी में बीजेपी विरोधी रुख और महाराष्ट्र में महायुति का साथ! क्या हैं इसके सियासी मायने?
इस राजनीतिक घटनाक्रम ने अनेक तर्क-वितर्क भी खड़े कर दिए हैं।
बिहार में जन सुराज के माध्यम से एनडीए और महागठबंधन दोनों के खिलाफ ताल ठोकने वाले प्रशांत किशोर तथा उत्तर प्रदेश में भी स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प तैयार करने में जुटे पीके, आखिर महाराष्ट्र में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी एनसीपी (अजित पवार) के लिए किस आधार पर रणनीति तैयार करेंगे? इस पर महाराष्ट्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी रणनीतिकार का चयन करना एनसीपी (अजित पवार) का आंतरिक प्रशासनिक निर्णय है। महायुति के सभी घटक दलों में पूर्ण समन्वय कायम है और गठबंधन में किसी भी प्रकार के मतभेद की गुंजाइश नहीं है।
🎯 महाविकास अघाड़ी (MVA) के वोट बैंक में सेंधमारी की योजना, कांग्रेस-शिवसेना (UBT) से सीधा मुकाबला
राजनीतिक विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि महाराष्ट्र का चुनावी समीकरण बिहार या उत्तर प्रदेश की तुलना में सर्वथा भिन्न है।
यदि प्रशांत किशोर एनसीपी (अजित पवार) की चुनावी कमान संभालते हैं, तो उनका सीधा मुकाबला विपक्षी ‘महाविकास अघाड़ी’ (कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी) से होगा। अजित पवार की एनसीपी का पारंपरिक प्रभाव मराठा समुदाय तथा धर्मनिरपेक्ष (Secular) वोट बैंक के एक बड़े वर्ग पर माना जाता है। यदि पीके अपनी रणनीति से इस वोट बैंक को महायुति के पक्ष में गोलबंद करने में सफल रहते हैं, तो इसका सीधा नुकसान महाविकास अघाड़ी को उठाना पड़ सकता है।
🗣️ ‘गूंगी गुड़िया’ टिप्पणी और भावी रणनीति पर चर्चा, बीजेपी को नहीं कोई प्रत्यक्ष नुकसान
सूत्रों के मुताबिक, इस गोपनीय बैठक में हाल के चर्चित विवादों, विशेष रूप से कांग्रेस नेताओं द्वारा सुनेत्रा पवार पर की गई टिप्पणी, पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही पार्टी के सांगठनिक पुनर्गठन एवं जमीनी स्तर पर जनसंपर्क अभियानों पर विचार-विमर्श हुआ। एनसीपी (अजित पवार) प्रवक्ताओं का कहना है कि चुनावी तैयारी के दृष्टिगत रणनीतिकार नियुक्त करना पार्टी का सर्वाधिकार है। व्यापक परिदृश्य में देखें तो जहां बिहार और यूपी में प्रशांत किशोर की सक्रियता से विपक्षी वोटों के विभाजन की बात होती है, वहीं महाराष्ट्र में उनकी भूमिका से महाविकास अघाड़ी को नुकसान और सत्तारूढ़ महायुति को स्पष्ट राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।