ब्रेकिंग
Nomadic Elephant 2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, रूम इंटरवेंशन और बोख कुश... Yogi Adityanath Delhi Visit: पीएम मोदी और जेपी नड्डा से मिले सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी चुनाव और संगठ... सोशल मीडिया पर दिखावा पड़ा भारी: यूट्यूबर मधुमिता के घर से ₹1 करोड़ के सोने-हीरे के जेवर चोरी Delhi Festive Preparations: रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पर्व के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई 3 विशेष समित... वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई बेहद आसान: अब दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति, घर आएंगे BLO मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी ने साझा किया जिजी थॉमसन का दावा UKSSSC VPDO Scam: 2016 भर्ती घोटाले में हरीश रावत से ईडी ने किए सवाल-जवाब, कांग्रेस ने बताया बदले की... Sambhal News: आचार्य प्रमोद कृष्णम को बब्बर खालसा से जुड़ी धमकी, विदेशी नंबर से ऑडियो कॉल; गृह मंत्र... Roorkee News Today: रुड़की में दोहरे हत्याकांड से सनसनी, गांव में भारी पुलिस बल तैनात; एसएसपी बोले- ... Election Commission Reforms: चुनाव आयोग में पारदर्शिता की नई पहल, SIR प्रोसेस, ECINet और अधिकारियों ...

कांकेर में तबाही का एनीकट! महानदी का पानी घुसने से 200 एकड़ खेत डूबे, 10 साल से परेशान बागोड़ के किसानों ने दी चेतावनी

कांकेर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले अंतर्गत बागोड़ गांव में बीते दो दिनों से हो रही मुसलाधार बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। महानदी का विकराल पानी आसपास के करीब 200 एकड़ लहलहाते खेतों में समा गया है। नदी के तेज बहाव के कारण धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं, वहीं कई किसानों की उपजाऊ जमीन भी कटकर महानदी में बह गई है। स्थानीय ग्रामीणों और कृषकों का स्पष्ट आरोप है कि दशपुर-बागोड़ एनीकट का निर्माण होने के बाद से हर मानसून सीजन में यही भयावह स्थिति उत्पन्न हो रही है।

🌊 खेतों में नदी की तरह बह रहा पानी, धान की फसलों को भारी नुकसान

बागोड़ गांव के कृषि क्षेत्र इन दिनों किसी उफनती नदी की भांति दिखाई दे रहे हैं।

खेतों की मेढ़ों को पार कर पानी तेज रफ्तार में बह रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि जलभराव का बहाव इतना तेज है कि यदि कोई मवेशी या व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाए तो बह सकता है। इस भीषण जलप्लावन से धान सहित अन्य मौसमी फसलों को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

🏗️ 10 वर्षों से बना है एनीकट का संकट, शहर की प्यास बुझाने के फेर में किसान पस्त

ग्रामीणों के अनुसार, कांकेर शहर को निर्बाध पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महानदी पर दशपुर-बागोड़ एनीकट और सम्पवेल का निर्माण कराया गया था।

शहरवासियों को पानी तो मिल रहा है, किंतु एनीकट के कारण नदी का बैकवाटर दबाव बढ़ जाता है, जिससे बारिश के दिनों में पानी सीधे खेतों में फैल जाता है। कृषकों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से हर साल उन्हें यह दंश झेलना पड़ रहा है।

  • टेश्वर जैन (उप सरपंच एवं किसान): “जब से यह एनीकट बना है, तभी से हमारी परेशानी शुरू हुई है। लगभग 10 सालों से हम लोग परेशान हैं। पूरी फसल सड़कर बर्बाद हो जाती है।”

  • हरिराम कोर्राम (पूर्व सरपंच एवं किसान): “हमारी मांग है कि सरकार इसका उचित और सम्मानजनक मुआवजा दे तथा भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए तकनीकी रूप से सही निर्माण कराए।”

💥 टूटा एनीकट, नदी ने बदला अपना प्राकृतिक रास्ता; 20 से अधिक पेड़ और बिजली के पोल बहे

ग्रामीणों के साथ ग्राउंड जीरो पर पहुंचने पर एनीकट की बदहाली की पोल खुल गई।

एनीकट का एक मुख्य हिस्सा टूट चुका है और जल रोकने के लिए बनाई गई पक्की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके कारण महानदी ने अपना प्राकृतिक रास्ता बदल लिया है, जिससे किसानों की नाप-भूमि का बड़ा हिस्सा कट गया है। यही नहीं, लाख की खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले 20 से अधिक कीमती पेड़ और कई विद्युत पोल भी नदी के तेज बहाव में बह गए हैं।

💸 मरम्मत के नाम पर 10 करोड़ फूंकने का आरोप, मुआवजे के नाम पर महज 6 से 8 हजार की छलावा

ग्रामीणों का दावा है कि इस विवादित एनीकट की मरम्मत और रखरखाव पर जल संसाधन विभाग अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर चुका है।

इसके बावजूद हर साल बारिश में बागोड़ का यही हाल होता है। लगभग 200 से अधिक किसान परिवारों की फसलें हर वर्ष स्वाहा हो जाती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से राहत व मुआवजे के नाम पर महज 6 से 8 हजार रुपये थमा दिए जाते हैं।

🗣️ शिकायत मिलते ही होगी जांच और समाधान: कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर

मामले की गंभीरता पर कांकेर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि, “जलभराव और एनीकट से हो रहे नुकसान को लेकर अभी तक ग्रामीणों की ओर से कोई आधिकारिक या लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलते ही राजस्व व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर सर्वे कराया जाएगा और समस्या के स्थायी समाधान का ठोस प्रयास किया जाएगा।”

⚠️ किसानों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी, मांगे न मानने पर सड़क पर उतरने की तैयारी

बागोड़ के उद्वेलित किसानों का कहना है कि उन्हें केवल 6 से 8 हजार रुपये का ऊंट के मुंह में जीरा समान मुआवजा नहीं चाहिए।

वे चाहते हैं कि शासन-प्रशासन इस समस्या का स्थायी तकनीकी समाधान निकाले या फिर वास्तविक नुकसान के आधार पर उचित मुआवजा राशि प्रदान करे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो वे कलेक्ट्रेट का घेराव कर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।