Swachh Korba: दिल्ली-इंदौर की तर्ज पर आधुनिक मशीनों से होगी कोरबा की सफाई, 50 करोड़ के PPP मॉडल का प्रस्ताव तैयार
कोरबा: शहर में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। आने वाले समय में कोरबा में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत ‘इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (Integrated Solid Waste Management System) लागू किया जाएगा। इस संबंध में राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
🚫 मैनुअल और ठेकेदारी प्रथा से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान में शहर के विभिन्न वार्डों में साफ-सफाई की व्यवस्था मैनुअल और ठेकेदारी पद्धति के माध्यम से संचालित होती है। वार्डवार ठेकेदार तय किए जाते हैं जो आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कर्मचारियों से काम कराते हैं और जेम पोर्टल के माध्यम से विज्ञापन और वार्डों की सफाई का कार्य किया जाता है। हालांकि, कई बार कर्मचारियों की क्षमता कम होने और अनुपस्थिति जैसी शिकायतें सामने आती हैं। इन कमियों को दूर करने और पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक व तकनीक-युक्त बनाने के लिए यह नई योजना लाई जा रही है।
🚜 दिल्ली-इंदौर की तर्ज पर मशीनीकृत सफाई और रियल-टाइम मॉनिटरिंग
अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दिल्ली, चंडीगढ़ और इंदौर जैसे बड़े महानगरों की तर्ज पर कोरबा में भी मशीनीकृत (Mechanized) रूप से सफाई की जाएगी। इसके लिए एक बड़ा एकीकृत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है। इसमें बड़ी और संसाधन-युक्त कंपनियों को जोड़ा जाएगा, जो आधुनिक मशीनों से काम करेंगी। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें कर्मचारियों, श्रमिकों और सफाई कर्मियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी।
♻️ कचरा बनेगा 100% उपयोगी, 50 करोड़ का है बजट
डीएमएफ (DMF) फंड, शासन से मिलने वाली राशि और राज्य शासन के सहयोग से इस पूरे प्लान का विज्ञापन किया जाएगा। कचरे की प्रोसेसिंग करके उसे 100% उपयोगी बनाया जाएगा, जिससे शहर को पूरी तरह स्वच्छ और सुंदर रखने में मदद मिलेगी। इस योजना का पूरा बजट लगभग 50 करोड़ रुपये है। कोरबा के पास डीएमएफ फंड है, इसलिए इसे लागू करने में अधिक परेशानी नहीं आनी चाहिए। सचिव स्तर से ही इस प्रस्ताव को मंगाया गया था, जिसके कारण इसे जल्द स्वीकृति मिलने के आसार हैं। हालांकि प्रशासन को यह भी ध्यान रखना होगा कि जिस बड़ी कंपनी को काम मिले, वह मनमानी न करे।
🗣️ निगमायुक्त का बयान: एकीकृत प्रणाली से होगी मॉनिटरिंग
नगर पालिका निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पांडे ने बताया कि कोरबा में इंटीग्रेटेड सफाई व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव शासन स्तर पर भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही काम चालू कर दिया जाएगा। इससे अलग-अलग ठेकेदारों से काम लेने वाली व्यवस्था से छुटकारा मिलेगा। देश के बड़े महानगरों की तर्ज पर कोरबा की सफाई व्यवस्था एकीकृत प्रणाली से होगी, जिससे मॉनिटरिंग में आसानी होगी और कचरे का शत-प्रतिशत उपयोग किया जाएगा।
🗑️ जानिए कितने तरह के होते हैं कचरे?
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गीला कचरा: सब्जी के छिलके और बचा हुआ खाना (यह बायोडिग्रेडेबल होता है)।
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सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, कांच, मेटल (यह रीसाइक्लेबल होता है)।
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हानिकारक कचरा: बैटरी, दवाइयां, अस्पताल का मेडिकल वेस्ट।
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ई-वेस्ट (E-Waste): खराब मोबाइल, लैपटॉप, तार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।