ब्रेकिंग
Ram Mandir Donation Scam SIT: सुप्रीम कोर्ट में SIT का खुलासा; राम मंदिर काउंटिंग रूम से चोरी के 105... Delhi High Court PIL: डीटीसी बस हड़ताल से थमीं दिल्ली की रफ्तार; जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की पीठ करे... Faridabad CM Flying Raid: तिगांव में अवैध बुलेटप्रूफ कार वर्कशॉप पर CM फ्लाइंग का छापा; 4 लग्जरी गाड... Gurugram MCG Action: भोंडसी में नगर निगम का बड़ा बुलडोजर एक्शन; 6 अवैध भवन सील, 4 ध्वस्त Gurugram Crime News: गुड़गांव की नाथूपुर सब्जी मंडी में हिताची ATM में लगी भीषण आग; मशीन में रखा कैश... Raipur News: रायपुर उत्तर में विधायक पुरन्दर मिश्रा की 8 दिवसीय पदयात्रा; सीएम साय करेंगे आगाज, राज्... Kanker Yuva Udaan Event: '2047 तक विकसित भारत का सपना युवाओं के कंधे पर'; कांकेर में बोले युवा आयोग ... Kanker BSF Camp News: माओवाद के साये से निकलकर वर्दी के सपने; कांकेर के तुमापाल में BSF कैंप में उमड... Raipur News: भाटागांव सब्जी बाजार विवाद में आयुक्त का आश्वासन; 7 दिनों में सामने आएंगे लॉटरी आवंटन क... Chhattisgarh News: कोरबा के पूछपारा में शर्मनाक घटना; नमाजी बुजुर्ग पर हमला कर युवक फरार, मेडिकल कॉल...

West Bengal Bill 2026: बंगाल में ‘गुंडा’ एक्ट की तैयारी; सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की होगी संपत्ति जब्त

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक अव्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज-विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक, 2026’ पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार का दावा है कि यह कानून संगठित अपराध, राजनीतिक हिंसा और हिंसक भीड़ द्वारा सरकारी संस्थानों पर हमलों को रोकने के लिए अनिवार्य है।

⚖️ विधेयक के कठोर प्रावधान और ‘गुंडा’ की परिभाषा

प्रस्तावित कानून में अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। विधेयक में ‘गुंडा’ को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है:

  • कोई भी व्यक्ति जो आदतन असामाजिक गतिविधियों में शामिल हो।

  • अपराधिक गिरोहों या सिंडिकेट का सदस्य या नेता।

  • हथियार, विस्फोटक, नशीले पदार्थों या मानव तस्करी में संलिप्त अपराधी।

  • संपत्ति की क्षतिपूर्ति: कानून के तहत अधिकारियों को दोषी अपराधियों की संपत्ति बेचकर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करने का अधिकार दिया गया है।

🚨 निवारक हिरासत और पुलिस को बड़ी शक्तियां

विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में पुलिस और प्रशासन को व्यापक अधिकार दिए गए हैं:

  • निवारक हिरासत: पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।

  • आपातकालीन अधिकार: जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्तों को 15 दिनों के लिए आपातकालीन हिरासत आदेश जारी करने का अधिकार होगा।

  • प्रतिबंध: संदिग्धों को विशिष्ट क्षेत्रों से प्रतिबंधित करने और उनके आवागमन पर रोक लगाने का प्रावधान है।

🗣️ विपक्ष का तीखा हमला

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे आपातकाल के ‘मीसा’ (MISA) और ‘यूएपीए’ (UAPA) से भी अधिक कठोर बताते हुए कहा कि यह कानून केवल शक के आधार पर पुलिस को अपार शक्तियां देता है और इसमें न्यायिक सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं।

🏛️ यूसीसी (UCC) से पहले मजबूत हो रहा कानूनी ढांचा

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था के ढांचे को मजबूत करना चाहती है। यह विधेयक न केवल संगठित अपराधों पर रोक लगाएगा, बल्कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उसकी पूरी वसूली भी सुनिश्चित करेगा।