ब्रेकिंग
कवर्धा में नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़: ₹12.50 लाख के जाली नोट, टाटा पंच EV कार और प्रिंटर के साथ 3 ग... पचमढ़ी नागद्वारी मेले में दो दिन में पहुंचे 2 लाख श्रद्धालु: अव्यवस्थाओं से आक्रोशित भीड़ का हंगामा,... छतरपुर में सनसनी: मशहूर व्यापारी के इंजीनियर बेटे की रेलवे ट्रैक किनारे मिली संदिग्ध लाश, वर्क फ्रॉम... बुरहानपुर में 'वेस्ट से बेस्ट' की अनूठी मिसाल, केले के तनों से महिलाओं ने बनाईं ईको-फ्रेंडली राखियां विदिशा में बेतवा नदी के उफान से बिगड़े हालात, चरणतीर्थ घाट डूबा; शिव मंदिर में फंसे 3 बेजुबान जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग को मिली ऐतिहासिक सफलता, नई थेरेपी से एड्स पीड़ित माताओं के 13 बच्चे बने ए... ग्वालियर के श्मशान घाटों में खत्म होगी मनमानी: अब तय रेट पर मिलेंगे कंडे और लकड़ी, नगर निगम का बड़ा ... मध्य प्रदेश में लगेगा नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, भोपाल-विदिशा मार्ग होगा 4-लेन; MP कैबिनेट के... भोपाल में 'हर घर तिरंगा' अभियान की भव्य तैयारी: कोलार से बैरागढ़ तक निकलेगी तिरंगा यात्रा, प्रशासन न... रतलाम में 24 घंटे में ढाई इंच बारिश: फसलों को मिला संजीवनी बूस्टर, जिला अस्पताल के वार्डों में टपका ...

Maharashtra Politics: शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट की तैयारी; क्या बिखर जाएगी उद्धव ठाकरे की पार्टी?

महाराष्ट्र: शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी के सामने एक बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट द्वारा उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के 9 में से 7 सांसद जल्द ही बागी तेवर अपना सकते हैं।

🔓 क्या है बगावत का पूरा गणित?

दावा किया जा रहा है कि बागी सांसदों का यह गुट पहले अलग दल के रूप में उभरेगा और उसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय कर लेगा। सूत्रों के मुताबिक, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख, अरविंद सावंत सहित कई प्रमुख नाम इस सूची में शामिल हैं। वहीं, शिंदे गुट के विधायक कृपाल तुमाणे ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि उद्धव ठाकरे के पास बचे 16 में से 14 विधायक भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं।

🚫 नेताओं की बेचैनी: सम्मान की कमी या राजनीतिक भविष्य?

पार्टी छोड़ने के कारणों पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के जनप्रतिनिधियों में भारी बेचैनी है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। वहीं, शिंदे गुट के नेताओं ने तंज कसते हुए कहा है कि संजय राउत की कार्यशैली के कारण पार्टी का आधार लगातार कमजोर हो रहा है।

⏳ क्या जल्द होगा ‘ऑपरेशन’?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्पीकर को औपचारिक पत्र सौंपने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जा सकती है। पार्टी में इस टूट को रोकने के लिए संजय राउत और अनिल देसाई जैसे दिग्गज नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। अब देखना यह होगा कि उद्धव ठाकरे अपने कुनबे को बिखरने से कैसे बचाते हैं।