US Intelligence Report: हमलों के बावजूद ईरान ने फिर खड़ी की अपनी सैन्य ताकत; 6 हफ्ते के युद्धविराम में दोबारा शुरू किया ड्रोन निर्माण
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए विनाशकारी हवाई हमलों के बावजूद ईरान अपनी सैन्य और सामरिक ताकत को उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से फिर से तैयार कर रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (US Intelligence Agencies) की एक बेहद गोपनीय और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बीते 8 अप्रैल से शुरू हुए छह हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) के मिले समय का फायदा उठाकर अपने ड्रोन विनिर्माण संयंत्रों को दोबारा चालू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी CNN की रिपोर्ट में इस बात का सनसनीखेज खुलासा किया गया है। कई वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और खुफिया सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि ईरान की नष्ट हुई सैन्य क्षमता अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुमान से कहीं जल्दी वापस लौट रही है।
🚀 मिसाइल लॉन्चर और हथियार फैक्ट्रियों का पुनर्निर्माण जारी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीति और इजराइल के लिए खड़ा हुआ बड़ा खतरा
खुफिया रिपोर्ट के बारीक आंकड़ों के मुताबिक, ईरान युद्धविराम की आड़ में अपने तबाह हो चुके मिसाइल लॉन्चरों, अंडरग्राउंड मिसाइल साइटों और हथियार बनाने वाली बड़ी फैक्ट्रियों को युद्धस्तर पर फिर से तैयार कर रहा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भविष्य में ईरान पर दोबारा सैन्य हमला शुरू करते हैं, तो ईरान अब भी इजराइल और खाड़ी देशों (Gulf Countries) के लिए एक अत्यंत घातक और बड़ा खतरा साबित हो सकता है। ईरान की इस अप्रत्याशित तेजी ने अमेरिका और इजराइल के उन कूटनीतिक दावों पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिनमें कहा गया था कि हालिया हमलों के बाद ईरान का सैन्य ढांचा कई दशकों के लिए पूरी तरह कमजोर हो गया है।
🛸 सिर्फ 6 महीने में ड्रोन हमले की पूर्ण क्षमता वापस पा लेगा ईरान: मिसाइलों के नुकसान की भरपाई ड्रोन सेना से करने की रणनीति
पेंटागन के एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अलग-अलग जटिल हथियारों को फिर से असेंबल और तैयार करने में तकनीकी रूप से भिन्न समय लग सकता है, लेकिन कुछ अमेरिकी रक्षा आकलन बताते हैं कि ईरान महज अगले छह महीने के भीतर अपनी ड्रोन हमला क्षमता (Drone Strike Capacity) को 100% वापस पा सकता है। अधिकारी ने स्वीकार किया कि ईरान ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के शुरुआती अनुमानों को धता बताते हुए दोगुनी रफ्तार से काम किया है। वर्तमान में ये ड्रोन हमले इजराइल और अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता बने हुए हैं। रिपोर्ट कहती है कि हालांकि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन ईरान कम लागत वाले घातक ‘आत्मघाती ड्रोन’ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके इस कमी की पूरी भरपाई कर सकता है।
🇨🇳🇷🇺 रूस और चीन के गुप्त कूटनीतिक सहयोग से संभला ईरान: इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के आरोपों को चीन ने बताया गलत
CNN को मिले खुफिया सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और नाकेबंदी के बावजूद ईरान इतनी तेजी से इसलिए संभल पाया क्योंकि उसे वैश्विक महाशक्ति रूस और चीन से बैकचैनल के जरिए लगातार तकनीकी व रणनीतिक मदद मिल रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन अभी भी ईरान को ऐसे क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और पार्ट्स की निर्बाध सप्लाई कर रहा था जिनका सीधा इस्तेमाल घातक मिसाइलें बनाने में किया जाता है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी के बाद इन गुप्त रास्तों की सप्लाई में कुछ कमी जरूर आई है। गौरतलब है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सार्वजनिक मंच से कहा था कि चीन लगातार ईरान को मिसाइल बनाने के पुर्जे दे रहा है, हालांकि बीजिंग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
🛡️ ईरान की कुल ड्रोन ताकत का 50% हिस्सा अब भी पूरी तरह सुरक्षित: होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय तेल जहाजों के लिए बढ़ा रिस्क
ताजा सैन्य आकलन रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान के पास मौजूद हजारों ड्रोनों का जखीरा अब भी पूरी तरह सुरक्षित और एक्टिव है, जो अमेरिकी हमलों से पहले की उसकी कुल ड्रोन ताकत का करीब 50% है। इसके अलावा, ईरान की कई अत्याधुनिक क्रूज मिसाइलें (Cruise Missiles) भी अंडरग्राउंड बंकरों में सुरक्षित बच गई हैं। इन बची हुई मिसाइलों और ड्रोनों के जरिए ईरान सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और जहाजों के लिए कभी भी बड़ा संकट पैदा कर सकता है।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने हाल ही में बड़ा दावा करते हुए कहा था कि अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) ने ईरान की 90% डिफेंस इंडस्ट्रीयल क्षमता को नेस्तनाबूद कर दिया है और वह कई सालों तक दोबारा उठ नहीं पाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की यह नई रिपोर्ट सेंट्रल कमांड के दावों से बिल्कुल अलग और डराने वाली तस्वीर दिखा रही है। सूत्रों का कहना है कि ईरान को हुआ वास्तविक नुकसान उसे सिर्फ कुछ महीनों पीछे ले गया है, कई साल नहीं।