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India-Bangladesh Border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर अभेद्य सुरक्षा; BSF ने खुले हिस्सों में शुरू किया बाड़ लगाने का काम

नई दिल्ली/कोलकाता: भारत और बांग्लादेश के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को पूरी तरह से कड़ा और अभेद्य बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा के उन अत्यधिक संवेदनशील और खुले हिस्सों (Unfenced Patches) में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने मजबूत बाड़ लगाने (Fencing) का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है, जो भौगोलिक कठिनाइयों के कारण सालों से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बने हुए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल राज्य में हुए राजनीतिक बदलाव और नई भाजपा सरकार के गठन के बाद, पिछले कई वर्षों से फाइलों में लंबित पड़े भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के मामलों में अप्रत्याशित तेजी आई है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्परता दिखाई है और बीएसएफ को बाड़बंदी के लिए आवश्यक जमीन सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया को गति दे दी है।

🗺️ उत्तर 24 परगना के रणनीतिक इलाकों का संयुक्त सर्वे: प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सुगम हुई जमीन सौंपने की प्रक्रिया

इस मिशन को धरातल पर उतारने के लिए बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने उत्तर 24 परगना और उसके आस-पास के अन्य सीमावर्ती जिलों के ‘चक्रबंदा’ जैसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों का सघन दौरा किया। इस दौरे के दौरान सुरक्षा अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों, भू-स्वामियों और जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर प्रस्तावित भूमि का एक संयुक्त जायजा (Joint Survey) लिया ताकि काम में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

बीएसएफ के एक शीर्ष अधिकारी ने मीडिया को इस संबंध में ब्रीफिंग देते हुए बताया, “बॉर्डर पर जमीन सौंपने की प्रक्रिया अब आपसी समन्वय के चलते बेहद सुचारू रूप से चल रही है। बहुत जल्द करीब 27 किलोमीटर लंबे एक बड़े और अत्यधिक संवेदनशील हिस्से समेत कई अन्य छोटे-बड़े पैच की जमीन भी आधिकारिक तौर पर बीएसएफ को सौंप दी जाएगी। स्थानीय जिला प्रशासन और सीमावर्ती नागरिकों से मिल रहा सकारात्मक सहयोग इस राष्ट्रीय काम को समय सीमा के भीतर तेजी से पूरा करने में मददगार साबित हो रहा है।”

🚧 क्यों अहम है 569 किलोमीटर के इस खुले हिस्से की बाड़बंदी? घुसपैठ, मवेशी तस्करी और नकली नोटों के सिंडिकेट पर होगा सीधा प्रहार

रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 2,216 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 569 किलोमीटर के हिस्से पर विभिन्न जटिल कारणों से अब तक पक्की बाड़बंदी नहीं हो पाई थी। इस भौगोलिक खुलेपन या क्षेत्र के कारण सीमा पार से अवैध घुसपैठ, मवेशियों की तस्करी, जाली भारतीय मुद्रा (FICN) और खतरनाक ड्रग्स की तस्करी जैसी राष्ट्रविरोधी घटनाएं लगातार होती रहती हैं। यही खुला बॉर्डर एरिया हमेशा से बीएसएफ और देश की अन्य खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक मुख्य सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

इस 569 किलोमीटर के खुले हिस्से में मुख्य रूप से बेहद पेचीदा नदी क्षेत्र (Riverine Borders), घने रिहायशी इलाके और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से सटे किसानों के खेत शामिल हैं, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व आसानी से अंधेरे का लाभ उठाकर सीमा पार कर लेते थे।

🛡️ एंटी-कट सेंसर और नाइट-विज़न कैमरों से लैस होगी स्मार्ट फेंसिंग: स्थानीय सीमावर्ती आबादी ने फैसले का किया स्वागत

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस नए बाड़बंदी कार्य के पूरी तरह संपन्न होने से सीमा पर न केवल अवैध घुसपैठ और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी पर पूरी तरह रोक लगेगी, बल्कि मवेशियों व अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी पर भी प्रभावी ढंग से लगाम कसी जा सकेगी। इस बार लगाई जा रही अत्याधुनिक भौतिक बाड़ के साथ-साथ इस पूरे सीमा कॉरिडोर में हाई-बीम फ्लड लाइट्स, एंटी-कट सेंसर (Anti-Cut Sensors) और अत्याधुनिक नाइट-विज़न कैमरों से लैस एक ‘स्मार्ट फेंसिंग सिस्टम’ भी इंटीग्रेट किया जा रहा है, जो किसी भी तरह की छेड़छाड़ होने पर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगा। इस सुरक्षा घेरे से स्थानीय ग्रामीण खुद को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया है।

📡 जिन इलाकों में बाड़ लगाना असंभव, वहां तैनात होगी CIBMS तकनीक: अंडरवॉटर सेंसर और थर्मल इमेजर रखेंगे हर हरकत पर नजर

सुरक्षा सूत्रों से मिली तकनीकी जानकारी के अनुसार, सीमा के जिन दुर्गम इलाकों में नदी, दलदली भूमि या गहरे नाले होने के कारण भौतिक लोहे की बाड़ (Physical Fence) लगाना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है, वहां अत्याधुनिक ‘तकनीकी बाड़’ यानी कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस स्मार्ट सिस्टम में पानी के भीतर भी सटीक काम करने वाले अत्याधुनिक सोनार व अंडरवॉटर सेंसर और दूर तक देखने वाले थर्मल इमेजर (Thermal Imagers) शामिल किए गए हैं, ताकि देश की मुख्य निगरानी प्रणाली में एक इंच का भी ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (Blind Spot) न रहने पाए। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और पश्चिम बंगाल की नई राज्य सरकार के बीच बने इस बेहतर और मजबूत तालमेल के चलते माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों के भीतर ही इस सुरक्षा मिशन के पहले चरण को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा, जिससे देश की पूर्वी सीमा हमेशा के लिए पूरी तरह सील और सुरक्षित हो जाएगी।