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Viral News: पेड़ पर फंसे पालतू तोते को उतारने के लिए बुलाई फायर ब्रिगेड, हजारों लीटर पानी बहाया; जानें क्या है ‘मिट्ठू’ की ये कहानी

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक पालतू तोता पेड़ पर जाकर बैठ गया, जिसे नीचे उतारने के लिए कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी. काफी कोशिशों के बावजूद जब तोता नीचे नहीं उतरा, तो फायर ब्रिगेड को बुलाया गया. तोते को नीचे लाने के लिए पानी की तेज धार का इस्तेमाल किया गया, जिसमें हजारों लीटर पानी खर्च हो गया. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, यह घटना ओबीसी बॉयज हॉस्टल के पास की बताई जा रही है. यहां किसी का पालतू तोता उड़कर एक ऊंचे पेड़ पर जा बैठा था. काफी देर तक वह वहीं बैठा रहा और नीचे उतरने का नाम नहीं ले रहा था. स्थानीय लोगों ने उसे नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद फायर ब्रिगेड को बुलाया गया.

हजारों लीटर पानी खर्च हो गया

मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने पाइप के जरिए पानी की तेज धार पेड़ की ओर छोड़ी. तोता काफी ऊंचाई पर बैठा हुआ था, इसलिए उसे नीचे लाने के लिए लगातार पानी डाला गया. काफी देर तक चली इस कोशिश के बाद आखिरकार तोता नीचे आ गया. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लीटर पानी खर्च हो गया, जो अब विवाद का कारण बन गया है.

बताया जा रहा है कि यह तोता किसी अधिकारी का पालतू है, लेकिन अब तक उस अधिकारी की पहचान सार्वजनिक नहीं हो पाई है. इस वजह से मामले ने और तूल पकड़ लिया है. लोगों का कहना है कि यदि यह आम व्यक्ति का पालतू होता, तो क्या इसी तरह सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता?

इस घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवा का उपयोग आगजनी, दुर्घटना या किसी बड़े खतरे की स्थिति में होना चाहिए, न कि इस तरह के मामलों में. खासकर तब, जब क्षेत्र पहले से ही भीषण गर्मी और पानी की कमी से जूझ रहा हो.

स्थानीय लोगों में आक्रोश

लोगों ने इसे सरकारी संसाधनों और पानी की खुली बर्बादी करार दिया है. उनका कहना है कि एक ओर जहां आम जनता पानी के लिए परेशान है, वहीं दूसरी ओर इस तरह हजारों लीटर पानी बहाना गैरजिम्मेदाराना है. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं.

मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है. फिलहाल अधिकारियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं, और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.