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allianwala Bagh: जलियांवाला बाग शहादत दिवस पर राष्ट्रीय दिशा मंच ने जयस्तम्भ चौक पर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर: 13 अप्रैल 1919, अमृतसर के जलियांवाला बाग में रौलट एक्ट का विरोध कर रही भीड़ पर अंग्रेजों ने बिना चेतावनी के अंधाधुंध गोलियां चलाईं. सैकड़ों लोग इसमें मारे गए. गोली चलाने का आदेश अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने दिया था. जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश देने से पहले वहां बने एकमात्र संकरे रास्ते को बंद कर दिया था ताकि कोई भी वहां से बचकर निकल न पाए. अंग्रेजों की इस बर्बरता को आज भी भारतीय भूले नहीं हैं. हर साल 13 अप्रैल के दिन देशभर में जलियांवाला बाग शहादत दिवस मनाया जाता है.

जलियांवाला बाग शहादत दिवस का आयोजन

हर साल की तरह इस साल भी समाजसेवी संस्था राष्ट्रीय दिशा मंच ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया. राजधानी के जयस्तंभ पर जलियांवाला बाग में शहीद हुए लोगों को याद करने के साथ ही आजादी की लड़ाई के शहीदों को भी याद करके श्रद्धांजलि दी गई. श्रद्धांजलि कार्यक्रम के पूर्व जयस्तंभ चौक की साफ सफाई की गई और रंगोली से सजाया गया. कार्यक्रम का थीम इन पंक्तियों पर आधारित थी, “जिन्होंने हमारी जिंदगी बनाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया, आजादी की बलिवेदी पर, उन्हें नमन करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है.”

राष्ट्रीय दिशा मंच ने किया आयोजन

जलियांवाला बाग शहादत दिवस पर राष्ट्रीय दिशा मंच द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन सन 1997 से लगातार श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. जयस्तम चौक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन करने के साथ ही राष्ट्रीय दिशा मंच ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन राजधानी के टिकरापारा के नूतन स्कूल में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भाग लिया. बच्चों ने इस अवसर पर स्वच्छता अभियान में “मोर पारा सबले सुघ्घग पारा अभियान ” में प्रतिदिन भागीदारी निभाने की शपथ ली.

राज्यपाल से की मांग

इस मौके पर राष्ट्रीय दिशा मंच ने 3 सूत्रीय ज्ञापन राज्यपाल को भेजकर कर मांग की है, कि इतिहास सिर्फ किताबों में अतीत का लेखा-जोखा ही नहीं वर्तमान में भी सांस लेता है, युवाओं में प्रेरणा बनकर. इसलिए 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग शहादत दिवस पर हर वर्ष स्कूल और कॉलेजों में राष्ट्रीयता से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन अनिवार्य किया जाए. जिसमें आजादी के आंदोलन में शहीद हुए सेनानियों के अलावा, शहीद होने वाले सेना के जवानों, अर्द्ध सैनिक बलों और पुलिस जवानों को भी श्रद्धांजलि दी जाए.

मंच ने कहा कि इससे स्कूली बच्चों और कॉलेज के युवाओं में राष्ट्रीयता का जज्बा जागृत होगा. जो राष्ट्र और समाज के लिए जवाब देही का भाव पैदा करेगा. शहीद हुए है उन्हें स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में अंकित किया जाए. साथ ही सोशल मीडिया में भी शासन की ओर से इन शहीदों के प्रेरक प्रसंगों को रील और यूट्यूब के माध्यम से भी प्रसारित किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को राष्ट्रीयता से जुड़े विषयों की जानकारी मिले, वो उससे सीख लें.

2 मिनट का रखा गया मौन

शहादत दिवस के मौके पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ ही 2 मिनट का मौन भी रखा गया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया.