ब्रेकिंग
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी! सांसदों को मिली संविधान संशोधन बिल की कॉपी, जानें क्या है परिसीमन ... Bengal Election: बंगाल चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी- भारत में जन्मे हर व्यक्ति को वोट का अध... Bengal Election 2026: रायगंज, मालदा और मुर्शिदाबाद में आज राहुल गांधी की हुंकार; जानें कांग्रेस के इ... Mumbai Drugs Case: मुंबई में कॉन्सर्ट के दौरान ड्रग्स ओवरडोज से 2 MBA छात्रों की मौत, पुलिस ने 6 तस्... Noida News: 'ढाई-तीन हजार में कैसे चले घर?' नोएडा में सड़कों पर उतरीं हजारों मेड्स, न्यूनतम वेतन को ... Delhi-Dehradun Expressway vs Old Route: मेरठ, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद वालों के लिए कौन सा रास्ता बेह... Kolkata: कोलकाता के डॉक्टर का 'जय श्री राम' कहने पर डिस्काउंट, बंगाली डॉक्टर के फैसले पर बंगाल में र... Bhopal News: भोपाल में 4100 पेड़ कटे पर पौधारोपण का डेटा गायब, भड़का NGT; सरकार से मांगा पिछले 5 साल... Delhi Flood Control: यमुना की बाढ़ से अब सुरक्षित होगी दिल्ली, सरकार बनाएगी 4.72 KM लंबी 'फ्लड प्रोट... Nitish Kumar Resigns: नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बोले- 'अब नई सरकार काम देखेगी, ...

Noida News: ‘ढाई-तीन हजार में कैसे चले घर?’ नोएडा में सड़कों पर उतरीं हजारों मेड्स, न्यूनतम वेतन को लेकर की ये मांग

Noida News: नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन ने मंगलवार को नया रूप ले लिया. घरों में काम करने वाली महिलाएं यानी घरेलू सहायिकाएं भी सड़कों पर उतर आईं. नोएडा के स्केटर-121 क्लियो काउंटी सोसाइटी में बड़ी संख्या में महिलाएं इकट्ठा हुईं. उन्होंने अपने हक के लिए आवाज बुलंद की. यह प्रदर्शन केवल समर्थन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं ने अपनी अलग-अलग मांगों को भी खुलकर सामने रखा. उनका कहना है कि मौजूदा वेतन और काम की स्थिति में घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है.

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि उन्हें महीने में केवल 2500 से 3000 तक का मिलता है. आज के महंगे भरे दौर में इतने कम पैसे में कैसे काम किया जाए? महिलाओं का कहना है कि गैस सिलेंडर, राशन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन उनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी कम कमाई होगी तो वह अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगी?

इतने कम पैसों में कैसे चलाएं घर?

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि ढाई से तीन हजार रुपए में हर महीने का खर्चा चलाना लगभग असंभव हो गया है. महंगाई आसमान छू रही है. गैस, राशन, बच्चों के स्कूल की फीस सब कुछ महंगा हो चुका है. ऐसे में इतनी कम आय में बच्चों की परवरिश और घर का खर्च उठाना, उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है. महिलाओं ने यह भी कहा कि जिन घरों में वह काम करती हैं, वहां के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है, लेकिन उनके अपने बच्चों के लिए वे वही सुविधा नहीं दे पा रही हैं.

महिलाओं ने केवल वेतन ही नहीं बल्कि काम की शर्तों पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने बताया कि उन्हें पूरे महीने में सिर्फ दो छुट्टियां दी जाती हैं. अगर इससे ज्यादा छुट्टी ली जाए तो उनका वेतन काट लिया जाता है या उन पर गलत आरोप लगा दिए जाते हैं. इसके अलावा ओवर टाइम के लिए भी कोई अलग से भुगतान नहीं किया जाता, जबकि उनसे अतिरिक्त काम लिया जाता है. यह स्थिति उनके लिए और भी मुश्किल खड़ी कर रही है.

4 छुट्टियां और बेहतर शर्तों की मांग

प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने मांग रखी कि उन्हें महीने में कम से कम चार छुट्टियां दी जाएं. उनका कहना है कि उन्हें अपने परिवार और बच्चों के लिए समय चाहिए. कई बार बच्चों के बीमार होने पर भी काम छोड़कर नहीं जा पातीं, क्योंकि इससे उनका वेतन कट जाता है. इसलिए वह बेहतर कामकाजी परिस्थितियों पर काम करने की मांग कर रही हैं. प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने साफ संदेश दिया कि जब तक उनका वेतन नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक वह अब वापस कम पर नहीं लौटेंगी.

पुलिस ने कहा- शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन

सेंट्रल नोएडा की DCP शैव्या गोयल ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-70 और सेक्टर-121 में महिलाओं ने विरोध जताया, लेकिन कहीं भी कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं हुई. पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. वहीं नोएडा के सेक्टर-121 में कुछ महिलाएं सोसाइटी के बाहर इकट्ठा हुईं थी, जो कि प्रदर्शन कर रही थीं.

पुलिस ने उनको शांति से समझा कर वापस उन्हें घर भेज दिया. हालांकि अब इन सब के बीच घरेलू सहायिकाओं का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि असंतोष केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अन्य वर्ग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि जहां मजदूरों के कुछ प्रदर्शन हिंसक हुए थे, वहीं महिलाओं को आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.