ब्रेकिंग
Supreme Court on Air Ticket Price Hike: हवाई किराये में 700% बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पण... Tej Pratap Yadav Security Increase Demand: जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने क... ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ’ मार्च के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तेलंगाना से कांग्रेस को ... गुजरात में सख्त शराबबंदी के नियमों को धत्ता बताते हुए राजकोट के एक होटल में आयोजित हुई हाई-प्रोफाइल ... पैनिक अटैक: बिना किसी वास्तविक खतरे के अचानक शरीर में क्यों उत्पन्न होने लगती है घबराहट और बेचैनी? Dewas TI Dilip Puri Murder Case: शहीद टीआई दिलीप पुरी के परिवार को 1 करोड़ की सहायता और पत्नी को एसआ... Dilip Puri Funeral Barmandal Dhar: शहीद टीआई दिलीप पुरी का पैतृक गांव बरमंडल में राजकीय सम्मान के सा... Ayodhya Ram Mandir Donation Case Supreme Court: राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फ... Dilip Puri Murder Case Dewas: अवैध शराब पकड़ने गए टीआई दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या, सिविल ड्र... PDP Foundation Day Srinagar 2026: श्रीनगर में पीडीपी के कार्यकर्ता सम्मेलन में महबूबा मुफ्ती का केंद...

पैनिक अटैक: बिना किसी वास्तविक खतरे के अचानक शरीर में क्यों उत्पन्न होने लगती है घबराहट और बेचैनी?

नई दिल्ली: पैनिक अटैक एक ऐसी शारीरिक और मानसिक स्थिति है, जिसमें बिना किसी स्पष्ट या वास्तविक खतरे के भी शरीर ऐसे रिएक्ट करने लगता है जैसे इंसान किसी बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गया हो। इस दौरान शरीर खुद को खतरे से बचाने के लिए अचानक अत्यधिक एक्टिव हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित को अचानक तीव्र घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। हालांकि, इसके लक्षण आमतौर पर कुछ ही मिनटों तक रहते हैं। जब मस्तिष्क के भीतर सेरोटोनिन (Serotonin), नॉरपेनेफ्रिन (Norepinephrine) और जीएबीए (GABA) जैसे जरूरी रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो पैनिक अटैक के लक्षण सामने आ सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में अत्यधिक गंभीर तनाव, पुराना मानसिक आघात (Trauma), जीवन में अचानक कोई बहुत बड़ा बदलाव आना, कैफीन का अत्यधिक सेवन, बचपन के बुरे अनुभव या फिर अनुवांशिकी (Genetics) की समस्या शामिल हो सकती है।

पैनिक अटैक के प्रमुख लक्षण: सांस फूलना, छाती में जकड़न और कंपकंपी महसूस होना

इस विषय पर जानकारी देते हुए कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट साइकाइट्रिस डॉक्टर मेघा अग्रवाल बताती हैं कि जब कोई मरीज पैनिक अटैक की शिकायत लेकर पहुंचता है, तो उसमें सबसे प्रमुख लक्षण सांस लेने में गंभीर परेशानी होना होता है। मरीज या तो बहुत तेजी से सांस लेने लगता है या उसे सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। इसके अलावा शरीर में भारी घबराहट, अत्यधिक पसीना आना और हाथ-पैरों में कंपन होना इसके सामान्य संकेत हैं। कई बार मरीजों को छाती में तेज दबाव या जकड़न महसूस होती है और घबराहट इतनी अधिक बढ़ जाती है कि मरीज को ऐसा लगने लगता है जैसे उसकी जान जाने वाली है। ये सभी भयावह लक्षण अमूमन 10 से 15 मिनट तक बने रह सकते हैं।

क्या पैनिक अटैक के लिए चिकित्सकीय इलाज कराना जरूरी है और इसका मेडिकल ट्रीटमेंट क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में पैनिक अटैक के ये लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं, फिर भी ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर के पास अवश्य जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह समस्या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ी के कारण तो नहीं है। पैनिक अटैक से पीड़ित कुछ मरीजों को चिकित्सकीय दवाओं की आवश्यकता होती है। जब कोई मरीज इलाज के लिए आता है, तो सबसे पहले उसका कार्डियक असेसमेंट (Cardiac Assessment) कराया जाता है ताकि हृदय से जुड़ी किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके। इसके बाद मरीज की पेशेवर काउंसलिंग की जाती है और जरूरत पड़ने पर एंटीडिप्रेसेंट्स या एंटी-एंग्जायटी दवाएं दी जाती हैं। साथ ही, जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने की सलाह दी जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार ही उसका इलाज तय किया जाता है।

पैनिक अटैक आने की स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए और कैसे करें बचाव?

  • यदि किसी व्यक्ति में पैनिक अटैक के लक्षण दिखाई दें, तो उसे धीरे-धीरे नाक से गहरी सांस लेने और छोड़ने की सलाह दें।

  • अटैक के समय मरीज को अकेला न छोड़ें, उसके पास शांत भाव से बैठें और आसपास का माहौल पूरी तरह शांत बनाए रखें।

  • इस स्थिति में मरीज के चेहरे और गर्दन पर ठंडे पानी के छींटे मारें या उनके चेहरे पर हल्का गीला कपड़ा रखें।

  • पैनिक अटैक आने पर पीड़ित के चारों ओर भीड़ बिल्कुल भी न इकट्ठा होने दें और न ही उसे किसी शोर-शराबे वाली जगह पर रखें।

  • यदि आप खुद कभी ऐसी स्थिति का सामना करें, तो स्वयं को यह याद दिलाएं कि यह समस्या केवल कुछ मिनटों की है, जो जल्द ही बीत जाएगी और यह बिल्कुल भी जानलेवा नहीं है।

क्या पैनिक अटैक खतरनाक होता है और इससे सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार, पैनिक अटैक अपने आप में सीधे तौर पर जानलेवा नहीं होता है और समय बीतने के साथ इसके लक्षण स्वतः समाप्त हो जाते हैं। हालांकि, बार-बार आने वाले पैनिक अटैक के डर के कारण लोगों में गंभीर एंग्जायटी (चिंता) की समस्या घर कर सकती है। इस निरंतर तनाव और एंग्जायटी के चलते व्यक्ति की जीवनशैली की गुणवत्ता (Quality of Life) प्रभावित हो सकती है, क्योंकि लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से अन्य कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं।