Jharkhand High Court ED Case: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर लगाया 8 हजार का जुर्माना, ईडी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई
रांची: झारखंड के उच्च न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की गई। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के दौरान विलंब से जवाब दाखिल करने के रुख पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार पर आर्थिक जुर्माना लगाया है।
जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, लगाया 8 हजार रुपये का जुर्माना
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पक्ष की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के वास्ते अदालत से कुछ और समय की मांग की गई। इस अनुरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 8,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया। न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जुर्माने की यह निर्धारित राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के खाते में जमा करवाई जाए। इस पूरे प्रकरण की सुनवाई जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ में संपन्न हुई।
इससे पहले मुख्यमंत्री पक्ष की तरफ से समय मांगने पर भी कोर्ट ने लगाया था 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना
अधिवक्ता धीरज कुमार के अनुसार, इस मामले की अगली सुनवाई अब से ठीक चार सप्ताह के पश्चात निर्धारित की गई है। इस मुकदमे में पूर्व में 1 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या दो यानी मुख्यमंत्री पक्ष की ओर से भी जवाब देने के लिए मोहलत मांगी गई थी। उस वक्त अदालत ने चार सप्ताह का समय प्रदान करते हुए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। इस प्रकार, अलग-अलग पक्षों द्वारा सुनवाई के दौरान बार-बार समय मांगे जाने के कारण हाईकोर्ट अब तक कुल 18,000 रुपये का जुर्माना लगा चुका है।
ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज और देवव्रत झा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को दी है चुनौती
यह पूरा कानूनी विवाद प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा तथा अन्य से जुड़ा हुआ है। इन केंद्रीय अधिकारियों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई आपराधिक प्राथमिकी को पूरी तरह से निरस्त करने का आग्रह किया गया है। अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा।
31 जनवरी को रांची के एससी-एसटी थाने में दर्ज कराई गई थी प्राथमिकी, दिल्ली आवास पर रेड और छवि धूमिल करने का लगाया गया था आरोप
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीते 31 जनवरी को रांची स्थित एससी-एसटी थाने में ईडी के अधिकारियों—कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल तथा अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इसके उपरांत, संबंधित अधिकारियों ने न्याय की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस प्राथमिकी को कानूनी रूप से चुनौती दी। दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 के दौरान रांची में ही रहने को कहा था, लेकिन इसी बीच उनकी गैर-मौजूदगी में दिल्ली स्थित उनके आवास पर बिना किसी पूर्व सूचना के छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक व सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी तथा मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबरें फैलाकर उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल किया गया।