Breast Cancer Cases in Punjab: अमृतसर में स्तन कैंसर पर डॉक्टरों की चेतावनी, चार साल में हजारों महिलाओं की हुई मौत
अमृतसर: देवभूमि और गुरुओं की नगरी पंजाब में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए स्तन कैंसर (Breast Cancer) एक अत्यंत भयावह और गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहा है। इस बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी दर्दनाक आंकड़े से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश भर में कैंसर के कारण कुल 13,299 महिलाओं की मृत्यु हुई, जिनमें से अकेले 7,186 महिलाओं की जान स्तन कैंसर की वजह से गई। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्वास्थ्य विभागों द्वारा चलाए जाने वाले तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानने में गंभीर लापरवाही बरतती हैं। कई बार महिलाएं स्तन में गांठ या शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों को मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर उनके लिए जानलेवा साबित होता है। अकेले वर्ष 2025 के दौरान ही स्तन कैंसर के कारण 1,457 महिलाओं की मौत दर्ज की जा चुकी है।
स्तन में गांठ या बदलाव को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर जांच से संभव है सफल इलाज
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन कैंसर के शुरुआती और प्रमुख लक्षणों में स्तन के भीतर नई गांठ का बनना, त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव आना, स्तन के आकार में असमानता होना, निप्पल का अंदर की तरफ मुड़ना तथा बगल (अंडरआर्म) में गांठ महसूस होना शामिल है। शुरुआती अवस्था में आमतौर पर इनमें दर्द नहीं होता, जिसके कारण महिलाएं इसे सामान्य परेशानी समझकर डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी कर देती हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि स्तन में किसी भी प्रकार की असामान्य गांठ या बदलाव महसूस हो, तो बिना किसी संकोच के तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समय रहते जांच करवाने से बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही पहचान हो जाती है, जिससे उपचार के सफल होने और मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर का स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बन रहा है मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद का केंद्र
बढ़ते मामलों के बीच अमृतसर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज का स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (State Cancer Institute) कैंसर पीड़ितों के लिए एक वरदान और प्रमुख उपचार केंद्र साबित हो रहा है। इस संस्थान में विशेषज्ञ डॉक्टरों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स की कुशल टीम की देखरेख में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और तकनीकों के जरिए मरीजों का बेहतरीन उपचार किया जा रहा है। यहां स्थापित आधुनिक मशीनों के कारण मरीजों को एक ही छत के नीचे रेडिएशन थेरेपी सहित कैंसर से जुड़ी तमाम अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हो रही हैं।
पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से भी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं पीड़ित
इस कैंसर संस्थान की उन्नत चिकित्सा व्यवस्था का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यहां केवल अमृतसर स्थानीय क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि गुरदासपुर, पठानकोट, तरनतारन समेत पंजाब के तमाम अलग-अलग जिलों से मरीज उपचार कराने आ रहे हैं। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ित मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पहुंच रहे हैं।
आधुनिक बायरियन ड्यूलम लिनियर एक्सीलरेटर से मिल रही है रेडिएशन, कीमो और इम्यूनोथेरेपी की हाई-टेक सुविधा
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक बायरियन ड्यूलम लिनियर एक्सीलरेटर मशीन उपलब्ध है। इस विभाग के प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी डॉ. मनराज सिंह कंग के अनुसार, इस उन्नत तकनीक के माध्यम से मरीजों को आई.एम.आर.टी. (IMRT), आई.जी.आर.टी. (IGRT) और वीमैट (VMAT) जैसी अत्यंत आधुनिक तकनीकों से सटीक रेडिएशन उपचार प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, मरीज की बीमारी की स्थिति और उसकी चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा कुछ चुनिंदा मामलों में इंटरवेंशनल ब्रेकीथेरेपी की सुविधा भी पूरी सावधानी के साथ दी जाती है। डॉक्टरों द्वारा प्रत्येक मरीज की जांच रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन कर एक प्रभावी उपचार योजना तैयार की जाती है, ताकि स्वस्थ अंगों को बचाते हुए केवल टार्गेटेड हिस्से का ही इलाज हो सके।
सामाजिक झिझक छोड़कर जागरूकता और समय पर जांच अपनाने की अपील, शुरुआती पहचान ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में मौजूद थोड़ी बहुत झिझक, जानकारी का अभाव और लक्षणों को छिपाने की प्रवृत्ति कई बार इलाज में बड़ी बाधा बन जाती है। डॉ. मनराज सिंह कंग ने महिलाओं से अपील की है कि वे स्तन स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। समय पर अस्पताल पहुंचकर सही समय पर जांच और इलाज शुरू करवाने से न केवल इस गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है, बल्कि अनमोल जिंदगियों को भी सुरक्षित बचाया जा सकता है। संस्थान की पूरी टीम इस दिशा में लगातार समर्पित भाव से अपनी सेवाएं दे रही है।